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Cancer Se Meri Jang By Atulya Khare

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  कैंसर से मेरी जंग नमस्कार दोस्तों, आप लोगों द्वारा मेरे द्वारा लिखित  समीक्षाएं बड़े ही स्नेह के साथ पढ़ी जा रही हैं, एवं यह आप लोगों द्वारा दिया   जाने वाला प्रोत्साहन ही है जो मुझे निरंतर आपके सम्मुख नई समीक्षाएं प्रस्तुत करने हेतु एक नए जोश के साथ प्रेरित करता है।   हॉबी के तौर पर शुरू किया गया छोटा सा प्रयास आज दिन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आप लोगों से एक बेहद करीबी सा रिश्ता जुड़ गया है तो सोचा आप लोगों से अपनी एक कहानी साझा करूं। कहानी है मेरे संघर्ष की। यह जरूर कहना चाहूंगा कि लिखने का उद्देश्य सहानुभूति प्राप्त करना कतई नहीं है, बस दिल में आया कि अपनी बात अपनों से कहूं इसलिए लिख रहा हूं। तो, चलिए शुरुआत करते हैं दोनों तस्वीरों से, जो आप देख रहे हैं, ये दोनो मेरी ही तस्वीरें हैं, किन्तु फर्क देख चौंकिए मत, क्यूंकि जो फर्क है वो है 4 साल , एक मेजर सर्जरी ,   30 sitting   रेडिएशन , और 3 माह के मौन का , उसके साथ तकरीबन 25   किलो वजन और सबसे अहम् दमदार मूंछ का। अगस्त 2019 का वाकया है, जिंदगी चल रही थी , बैंक की नौकरी भी चल रही थी , साथ...

Juloos Ki Bheed By Bhavtosh Pandey

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  “ जुलूस की  भीड़ ” द्वारा :भवतोष  पाण्डेय                                           प्रकाशक:   Notion press       युवा लेखक भवतोष पाण्डेय जो  यूं तो एक इंजिनियर है , किन्तु दिल का झुकाव साहित्य रचना की ओर होने के कारण विभिन्न पत्र पत्रिकाओं व ऑन लाइन प्लेटफॉर्म्स पर लिख कर अपनी साहित्यिक क्षुधा  एवं ज्ञान पिपासा को शांत कर रहे थे , तत्पश्चात  उन्होंने अपनी विभिन्न कहानियों को संग्रह के रूप में प्रस्तुत किया। कहानी संग्रह ‘जुलूस की भीड़” , समाज में अपने आस पास के आम लोगों पर केन्द्रित है एवं उसमें उन्होंने हमारी रोजाना कि जिंदगी में पेश आते अनगिनत पात्रों में से कुछ पात्र चुन कर उन्ही से जुड़ी कुछ बेहद आम सी बातों को ही बेहद सुन्दर कथानक में परिवर्तित कर , 17 कहानियों के संग्रह के रूप में प्रस्तुत किया है। रोज़मर्रा की सामान्य , आम बातों एवं मामूली घटनाओं का सूक्ष्म एवं पैनी नज़र से अवलोकन कर बहुत ही सहज भाव से आम आदमी को केन्द्...

Shabd-Shabd By Ram Pal Shrivastava

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  शब्द-शब्द द्वारा : राम पाल श्रीवास्तव “अनथक“ प्रकाशन: समदर्शी प्रकाशन   “मेरी कविता आयास रचित नहीं अनुभूत होती है दुःख सुख वेदना और संवेदना की प्रसूत होती है”       उक्त पंक्तियों से अपनी पुस्तक “शब्द-शब्द”   का आरम्भ करने वाले, राम पाल श्रीवास्तव जी, साहित्य की विविध विधाओं में अपने उच्च स्तरीय   लेखन कार्य से निरंतर बहुमूल्य     योगदान दे रहे वरिष्ठ, तजुर्बेकार, लेखक, अनुवादक, पत्रकार एवं   कवि जो की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं से बतौर संपादक जुड़कर अपनी साहित्य प्रतिभा से उन्हें गौरान्वित कर साहित्य के क्षेत्र में अपना विशिष्ठ सहयोग दे रहे हैं, बतौर प्रधान संपादक एवं   पत्रकारिता के अपने लम्बे तजुर्बों से बहुत कुछ उन्होंने अर्जित किया एवं वह उनकी ओर से विभिन्न विधाओं में उनके द्वारा किये गए सृजन से भेंट स्वरुप साहित्य को प्राप्त होता रहा है।    उर्दू की विशिष्ट तालीम हासिल कर इस सुन्दर भाषा पर भी अच्छा नियंत्रण रखते हैं एवं अपनी रचनाओं में खुलकर प्रयोग करने से भी उन्हें कोई संकोच अथवा परहेज़ नहीं है, साथ ही...

Dil Hai Chhota Sa by Ran Vijay

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दिल है छोटा सा लेखक : रणविजय प्रकाशक : हिन्द युग्म                                                                                          हिंदी साहित्य में रूचि रखने वाले तथा स्तरीय पुस्तकों के शौकीन, प्रबुद्ध जनों हेतु रणविजय एक जानी   पहचानी शख्शियत है, स्थापित नामचीन लेखकों में उनका नाम शुमार है, उनकी   पुस्तक “ भोर उसके हिस्से की ” सफलता के उत्तुंग   शिखर   पर है एवं आम जन द्वार इस पुस्तक में उन की भाव अभिव्यक्ति , सरल भाषा प्रवाह युक्त शैली , सहजगम्य   वाक्य विन्यास एवं परिवेश को उसकी सम्पूर्ण मौलिकता संग कलात्मक रूप से की गयी प्रस्तुति को अत्यंत पसंद किया गया है तथा मेरा भी उस पुस्तक को पढने के बाद ही संभवतः रणविजय जी की अन्य रचनाये पढने का मानस बन गया था, जो अब “दिल है छोटा सा“ पढ़ कर कुछ हद तक पूरा भी हुआ है हालाँकि अभी उ...

Shabd Mere Bhaav Mere by Nirupama Singh

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  शब्द मेरे , भाव मेरे द्वारा: निरुपमा सिंह प्रकाशक:शुभदा बुक्स   निरुपमा सिंह , साहित्य जगत के गलियारों का एक सुस्थापित नाम है जो किसी परिचय हेतु मोहताज़ नहीं हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न मासिक एवं त्रैमासिक पत्रिकाओं इत्यादि में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती ही रहती हैं तथा साझा काव्य संकलन में भी उनकी रचनाएँ   प्रकाशित हुयी हैं। पाठक वर्ग के बीच उनकी रचनाओं की सरलता को काफी पसंद किया जाता है , उनकी रचनाएं प्रबुद्ध पाठकों के काफी बड़े वर्ग द्वार पढ़ी एवं सराही जाती हैं। पाठक वर्ग से प्राप्त इस प्रतिसाद का मूल एवं एकमात्र कारण उनकी रचनाओं का सामान्य जीवनधारा   से जुड़े हुए विषयों पर आम जन की भाषा में सुन्दरता से   रचना सृजित करना ही है। उनकी रचनाओं की भाषा यूं तो सामान्य जन की सरल सहजगम्य भाषा ही है, किन्तु वे उपयुक्त स्थानों पर सुन्दर किन्तु आसान अलंकारिक शब्दों का प्रयोग कर कथ्य को और भी आकर्षक बना देनें में निपुण हैं। उस पर विशेषता यह कि अलंकरण पश्चात भी कथ्य वैसा ही सरल एवं सहज बना हुआ है और पाठक के दिल से जुड़ने में अ...