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Mere Pratinidhi Hasya-Vyangya -- pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : मेरे प्रतिनिधि हास्य व्यंग्य द्वारा : अरुण अर्णव खरे विधा : व्यंग्य कथाएं नोशन प्रेस द्वारा प्रकाशित मूल्य : 240.00 पृष्ट संख्या :117 समीक्षा क्रमांक :   113                                                      व्यंग्य विधा साहित्य सृजन की वह विधा है, साहित्य सृजन का ऐसा खंड है जिसमें या तो किन्हीं घटनाओं के परिदृश्य में निहित कारणों का इस विधि आलोचनात्मक विवेचन किया जाता है कि उसमें कटाक्ष , हास्य , आलोचना एवं तीक्ष्ण व्यंग्य निहित होता है, अथवा किसी विषय विशेष पर व्यंग्यात्मक तीक्ष्ण टिप्पणी की जाती है। व्यंग्य लेखन की भाषा एवं शैली अत्यंत संतुलित सहजगम्य एवं पैनी धारदार होना अनिवार्य होता है, ताकि संदर्भित विषय पर कटाक्ष तो हो ही उसमें हास्य एवं व्यंग्य के संग संग विचारण हेतु मुद्दे भी व्यंग्यकार द्वारा पाठक को दिए जा सकें। व्यंग्य विधा एक ऐसी कला है जिसमें व्यंग्यका...