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Hajir Hon -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : .. हाजिर हों  , द्वारा :अनिल माहेश्वरी   सेतु प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक :   202   अनिल माहेश्वरी द्वारा रचित “.... हाजिर हों” एक पूर्णतः भिन्न एवं   अभिनव सोच को दर्शाता कथानक है। यूं तो पौराणिक ग्रंथों पर आलोचनाएं एवं उनके घटना क्रम तथा पात्रों पर क्रिटिक्स द्वारा अपने अपने नजरिए प्रस्तुत किए गए हैं किन्तु अनिल जी के कथानक में भिन्नता है। पुस्तक मूल रूप से जहां एक ओर पात्रों के तत्कालीन   कृत्य एवं आचरण के आधार पर उनको वर्तमान विधि के मुताबिक आंकलन करती है वहीं पाठक को भी एक नई सोच एवं स्वयं की नवीन विचारण शैली जागृत करने का अवसर देती है। यूं तो पौराणिक पात्रों के विषय में भिन्न भिन्न नज़रिए पूर्व में भी पढ़ने में आते रहे हैं जहां पात्रों के क्रिया कलापों को तार्किकता के मापदंडों पर परखा जाकर उन्हें उस काल के हिसाब से उचित अथवा अनुचित सिद्ध किया गया किन्तु प्रस्तुत पुस्तक पौराणिक पात्रों को,   वर्तमान विधि के अंतर्गत दोषी कौन, यह ढूंढने का सफल   प्रयास करती...