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Kagaaz-ki-Naav : By Rajendra-Rajan : Pustak-Samiksha : By Atulya-Khare

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    Pustak Samiksha: Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कागज़ की नाव विधा : उपन्यास द्वारा : राजेन्द्र राजन आकृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2026 मूल्य : 340.00 समीक्षा क्रमांक : 254                " काग़ज़ की नाव " ,  प्रख्यात कथाकार , साहित्यिक जगत की जानी पहचानी , नामचीन हस्ती राजेन्द्र राजन जी का यह नया उपन्यास सुधि पाठकों के लिए मरुस्थल में ओस की उस बूंद के समान है जिसने न जाने कितने प्यासे चातकों की प्यास बुझाई है। हर दृष्टि से उपयुक्त , सार गर्भित , अर्थ - पूर्ण , वास्तविकता के बेहद करीब प्रतीत होता कथानक है। कहानी , सुंदर भाव अभिव्यक्ति एवं शब्द चयन , अर्थ - पूर्ण वाक्यांश , सहज घटनाक्रम , दरकते दाम्पत्य संबंधों का संतान पर प्रभाव एवं एक उभरते हुए नाट्य कलाकार के जीवन के संघर्ष को खूबसूरती से उकेरती है एवं वास्तविकता के बेहद करीब या कहें की वास्तविक सी प्रतीत होती है। राजन जी की इस पुस्तक में एक रंगमंच के प्रतिभाशाली कलाकार की भावनाएं, उसके कठि...

Jashn E Bharan -- Pustak-Samiksha : Atulya Khare

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       .      Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : जश्न - ए - बहारां विधा : उपन्यास द्वारा : राजेन्द्र राजन अद्विक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2024 मूल्य : 190.00 समीक्षा क्रमांक : 250 वारिष्ट उपन्यासकार राजेंद्र राजन जी द्वारा रचित “ जश्न - ए - बहारां ” केवल एक प्रेम कहानी नहीं , बल्कि हालिया तथाकथित आधुनिक परिवेश में स्त्री - पुरुष संबंधों के बदल रहे समीकरणों का एक सूक्ष्म , मनोवैज्ञानिक , क्लिष्ट पृष्ट दर्शाता हुआ कथानक है , जहां शारीरिक संबंधों को वर्तमान स्वार्थ प्रमुख की सोच अथवा परिवेश ने एक नई व्याख्या दी है।  क्या किसी महिला द्वारा सफलता हासिल करने के लिए देह समर्पण एवं कार्य सम्पन्न हो जाने पर अर्थात तथाकथित सफलता की ऊँचाई हासिल कर लेने पर , उस पुरुष को तिरस्कृत कर दिया जाना उचित है जो पग पग पर उसकी उन्नति में सहायक रहा, विषय को प्रमुखता से अत्यंत रोचक कथानक में प्रस्तुत किया गया है ।  यूं तो स्त्री - विमर्...