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Dil Madari -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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           ·        Pustak Samiksha: Atulya Khare ·        समीक्षित पुस्तक : दिल मदारी   ·        द्वारा : पूनम अहमद ·        साहित्य विमर्श द्वारा प्रकाशित ·        प्रथम संस्करण : 2026 ·        मूल्य- 199/- ·        समीक्षा क्रमांक : 241                                                                                                              " मून गेट", "अपने अपने मेघदूत", "कोयले की लकीर", और "कुछ इस तरह" जैसे लोकप्रिय कहानी संग्रहों के बाद अब पूनम जी की यह नवीनतम रचना एव...

Us Din -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : उस दिन   द्वारा :   पूनम अहमद   विधा :   आत्मकथा अद्विक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित   संस्करण : प्रथम 2024 मूल्य : 220 समीक्षा क्रमांक : 147      पूनम जी की कई पुस्तकें अभी तक पढ़ीं ,   उन पर लिखा भी ,   और उनकी पहली पुस्तक पढ़ने के समय से ही उनके अंदाज़े बयां का मुरीद हूं, और अब जो उन्होंने अपनी कहानी या कहें जीवन के संस्मरण   “उस दिन” शीर्षक से पुस्तक के रूप में सँजोये हैं    उस पर तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं। बस यही कहना काफी होगा लिखने के तरीके के लिए और   लिखने की सहजता के लिए पढ़ा जाना चाहिए। भाव तो उनके कहन में सहज ही आ गए और इस पुस्तक के प्रारंभिक   संस्मरण   जैसे “उस दिन” और पिता से आखरी मुलाकात में तो भावनाओं का दरिया आपको अपने साथ सहज ही बहा ले जाता है। उस दिन ,   आम   इंसान की जिंदगी में जो कुछ बीतता है उसे इतने खूबसूरत तरीके से भी बतलाया जा सकता है यह इस पुस्तक को पढ़ कर ही पता लगा। अपने विषय में लिखते हुए यह एक ...

Apne Apne Meghdoot -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक  :  अपने अपने मेघदूत द्वारा : पूनम अहमद विधा : कहानी  इंडिया नेटबुक्स द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2022 मूल्य : 225.00 पुस्तक समीक्षा क्रमांक : 106 सरल सहज पठनीय एवं सुंदर यदि यह सभी खूबियाँ किसी एक लेखक में देखनी हो तो बेशक पूनम जी का नाम लिया जा सकता है, जो बोधगम्य भाषा , सरल प्रवाहमयी   शैली एवं आम जन जीवन के बीच से लिए गए विषयों पर लिखने हेतु बखूबी जानी जाती हैं। इसके पूर्व मेरे द्वारा उनकी पुस्तक “ मूनगेट” की समीक्षा की गयी थी जिसकी चारों कहानियों में नारी विमर्श को प्रमुखता से देखा गया था । उ सके बाद उ नकी पुस्तक “कोयले की लकीर”   जो की कहानी संग्रह है उस की भी समीक्षा मैंने लिखी थी जिसमें भी नारी विमर्श प्रमुख है . प्रस्तुत पुस्तक जो की पुनः एक कथा संग्रह है , अपने आप में 19 खूबसूरत कहानियों का एक गुलदस्ता है जिसमें हर मिजाज की कहानियाँ उन्होनें कहीं हैं। क हानियां अत्यंत मनोरंजक , रोचक एवं आसान रोजमर्रा की भाषा में हैं , और विषय भी या तो सामान्य जनजीवन के रोजाना के मुद्दे हैं या फिर...