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KayaKalp -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कायाकल्प द्वारा : एम. आई. राजस्वी विधा: उपन्यास Veteran  पब्लिशिंग हाउस   द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299 समीक्षा क्रमांक : 209                                             गुणात्मक एवं स्तरीय साहित्य की अभिलाषा रखने वाले सुधि पाठक , वरिष्ठ लेखक एवं  संपादक, राजस्वी जी के नाम से बखूबी परिचित हैं , बात करें यदि उनकी साहित्य जगत में उपस्थिति और साहित्य सेवा की तो कहना अतिशयोक्ति न होगी की उनका कार्य स्वमेव उनकी पहचान है। उनके प्रकाशित एवं संपादित हिन्दी साहित्य की फेहरिस्त लंबी है फिर भी “अश्वत्थामा का अभिशाप,” “रामायण,” “जय  हनुमान केसरीनंदन” इत्यादि का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उनके लेखन से सहज लक्षित होता है की वे अपने गहन अध्ययन, गहरी पौराणिक एवं ऐतिहासिक समझ एवं रचनाशीलता का प्रयोग ऐतिहासिक एवं पौराणिक विषयों पर उच्च कोटि के सारगर्भित साहित्य सृजन हेतु करते हैं। सामान्य भाषा का प्रयोग , विचार...

Shri Ramayana -- pustak samiksha : Atulya Khare

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Pustak samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक :  श्री रामायण द्वारा      : एम. आई. राजस्वी प्रकाशक: FINGERPRINT रामायण के रचयिता वाल्‍मीकि ने प्रथम अलंकृत काव्‍य लिखकर समस्‍त पश्चातवर्ती भारतीय कवियों के लिए आदर्श प्रस्‍तुत   किया था। वाल्मीकि रचित रामायण में राम की   कथा बहुत विस्‍तार से वर्णित है।   वाल्‍मीकि की दृष्टि   इतनी सूक्ष्म और कल्‍पना-शक्ति इतनी उर्वर है कि प्रत्येक दृश्‍य को उन्‍होंने सुन्दर विस्‍तार प्रदान किया है।   रामायण का विभाजन सात खण्डों में हुआ है यथा - बालकाण्‍ड , अयोध्‍याकाण्‍ड ,  अरण्‍यकाण्‍ड , किष्किन्धा कांड , सुन्दरकाण्‍ड , लंकाकाण्‍ड तथा उत्तरकाण्‍ड। रामायण काल की बात करें तो रामायण की रचना पाँचवी शताब्दी ई. पू.   में मानी जाती है जो महाभारत के पूर्व का घटना क्रम है एवं महाभारत में रामायण की पूरी कथा वर्णित है और   राम के जीवन से सम्‍बद्ध कुछ स्‍थलों को वहाँ तीर्थ के रूप में देखा गया है। रामायण का   संकेत जैन और बौद्ध ग्रन्‍थों से भी प्राप्‍त होता है। रामायण के केंद्र म...

Ashwatthama Ka Abhishap -- pustak samiksha : Atulya Khare

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  pustak samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : अश्वत्थामा   का अभिशाप द्वारा : एम आई राजस्वी फिंगरप्रिंट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित               महान क्रांतिवीरों   सुखदेव , विपिन चंद्र , अशफाक उल्लाह खान, महाराणा सांगा   एवं सुविख्यात कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी   महान   शख्शियतों पर पुस्तकें   लिखने वाले एवं हिंदी साहित्य को, उच्च कोटि की अन्य बेशुमार   रचनाएं देने वाले प्रख्यात ,  कलम के जादूगर एम आई राजस्वी एक स्थापित कलमकार है एवं लेखन में पाठक के मस्तिष्क को अपने नियंत्रण में करने की कला से बखूबी वाकिफ़ हैं। इस   पुस्तक की समीक्षा प्रारम्भ से   ही मेरे लिए अत्यंत   दुरूह कार्य लगा क्योंकि     तथ्यों   का स्वल्प प्रकटीकरण मात्र   पाठक का रोमांच समाप्त कर सकता है मुझे उस रोमांच को बरकरार रखते हुए अपनी बात भी रखनी है।              समीक्षाधीन   पुस्तक , ‘अश्वत्थामा  का अभिशाप में’   राज...