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Raagmahal By Mukesh Sohan

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  रागमहल द्वारा: मुकेश “सोहन” दृष्टि प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित      कथाकार : मुकेश सोहन जी मूलतः राजस्थान से हैं एवं   अरसे से हिंदी लेखन से जुड़े हुए हैं एवं अमूमन साहित्य की समस्त विधाओं में आपने अपना रचनात्मक योगदान दिया है किन्तु आपका अधिक झुकाव उपन्यास की ओर   प्रतीत होता है यथा प्रस्तुत उपन्यास   “राग महल” के पूर्व आपके पांच उपन्यास “द्रोंण   की व्यथा” , “स्वयंसिद्धा” ,    “व्यर्थ का प्रलाप” , “इर्द गिर्द” व “राग हवेली”   प्रकाशित हो चुके हैं जिन्हें उनकी विशिष्ठ विषयवस्तु के दृष्टिगत आम जन के बीच काफी सराहा गया   तथा राज्य स्तर पर विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थानों द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया एवं “साहित्य सुधाकर” , “साहित्य श्री” व   “साहित्य कुसुमाकर” जैसी श्रेष्ठ उपाधियों से नवाज़ा गया।     भाषा शैली :- भाषा सामान्य है बोलचाल की ही भाषा है जो पात्रों   के स्तर एवं परिवेश के   उपयुक्त है। वाक्य विन्यास , सुन्दर है किन्तु चंद वर्तनी सम्बंधित कमियां आनन्द दायक पाठन में व...

Ratan Kumar sambhariya ki chayanit kahaniya By Ratan Kumar sambhariya Editor Dr.Varsha Verma

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  रत्नकुमार सांभरिया की चयनित कहानियां संपादन : डॉ. वर्षा वर्मा दृष्टि प्रकाशन - जयपुर द्वारा प्रकाशित विभिन्न सम्मानों एवं पुरुस्कारों से राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर नवाजे जा चुके मूर्धन्य साहित्यकार, विभिन्न विधाओं में सृजन कार्य में संलग्न ,वरिष्ठ रचनाकार रत्नकुमार सांभरिया जी के विभिन्न कहानी संग्रह , लघु कथा संग्रह , एकांकी आलोचना ग्रंथ इत्यादि प्रकाशित हो चुके हैं ।    वहीं उनके द्वारा अनुवादित, सम्पादित ग्रंथों की भी एक लम्बी फेहरिस्त है तथा प्रस्तुत पुस्तक से इतर उनकी विभिन्न रचनाओं को यहाँ सूचीबद्ध करना न तो संभव है न ही तर्कसंगत ।   उनकी रचनाओं पर टेलीफिल्म का निर्माण , रेडियो प्रसारण एवं विभिन्न रंगमंचों पर मंचन एक अनंत सिलसिला है।    उनकी रचनाएँ विभिन्न पाठ्यक्रमों में विश्वविद्यालयों   में पढाई जा रहीं हैं व उनकी रचनाओं पर अनेकों विद्यार्थियों द्वारा शोधकार्य किया जा चुका है।      रत्नकुमार सांभरिया जी की कहानियाँ दलित समाज से जुड़ी हुई कहानियाँ हैं ,   उनकी कहानियों में दलित विमर्श एवं स्त्री विमर्श प्रम...