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PACHHISVAN PREM PATRA BY ABHA SHRIVASTAVA

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  पच्चीस वां प्रेम पत्र   विधा: कहानी संग्रह   द्वारा   : आभा श्रीवास्तव   न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित   प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 250 पाठकीय प्रतिक्रिया क्रमांक   : 171 “ काली बकसिया ” , “दिसंबर संजोग” जैसे बेजोड़ कहानी संग्रहों की शानदार कामयाबी जिनके नाम है साथ ही अमूमन हर प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में जिनकी   कहानियाँ प्रकाशित होती ही रहती हैं एवं जो हालिया चलन के विपरीत प्रचार प्रसार से दूरी बना कर रखती हैं , और जिनके पाठक वर्ग को सदैव उनकी रचनाओं का इंतजार बना रहता है उन , वरिष्ट कहानीकार आभा श्रीवास्तव जी का कहानी संग्रह “ पच्चीस वां प्रेम पत्र”, प्रेम रस में सरोबार अपने प्रबुद्धह पाठकों हेतु प्रस्तुत है , जिसमें प्रेम के विभिन्न रंगों में डूबी 20 कहानियाँ हैं और सभी में कुछ न कुछ नयापन , कथानक में कुछ विविधता तथा बहुत कुछ आज की बात है। पूर्व में उन्होनें बाल साहित्य पर भी काफी कार्य किया है एवं इस संग्रह के प्रकाशन के पश्चात जिसमें युवाओं को लेकर बहुत सारी कहानियाँ हैं वे निश्चय ही जेन Z   की पसंदीदा ल...

EK THEE ANEETA BY AMRITA PREETAM

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  एक थी अनीता द्वारा अमृता प्रीतम उपन्यास प्रथम संस्करण : 1989 हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित (आवरण: इमरोज़) पाठकीय समीक्षा क्रमांक : मूल्य : 15.00 ( तत्कालीन )   आम तौर पर पुस्तक का कवर किसने डिजाईन किया है मैं इस विषय पर नहीं लिखता किन्तु इस पुस्तक के विषय में खास बात यह रही कि यह कवर इमरोज़ के द्वारा डिजाईन किया गया था , आप कहेंगे कौन इमरोज़ तो बता दूँ , ये     वही इमरोज़ हैं जो अमृता का प्यार थे जिनके विषय में बहुत पढ़ा सुना गया। उन से सम्बंधित इंटरनेट पर एक लेख मिला “अमृता प्रीतम और इमरोज़: प्रेम कहानी एक कवियत्री और चित्रकार की” जो बीबीसी हिंदी पर पहली बार 25.10.2014 को प्रकाशित हुआ था , तो पुस्तक चर्चा के पहले , जो भी अमृता और इमरोज़ कि सुन्दर प्रेम कहानी जानने के इक्षुक हों , एक बार उस लेख को ज़रूर पढ़ें , उसके कुछ अंश आपकी पाठन   यात्रा को रोचक बनाने के लिए यहाँ प्रस्तुत हैं। अमृता और इमरोज़ का सिलसिला धीरे-धीरे ही शुरू हुआ था। अमृता ने एक चित्रकार सेठी से अपनी किताब ' आख़िरी ख़त ' का कवर डिज़ाइन करने का अनुरोध किया था। सेठी ने कहा कि...

RACHNASHEELTA KA GANIT BY DILIP KUMAR PANDEY

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  रचनाशीलता का गणित (समीक्षात्मक लेख) समीक्षक -दिलीप कुमार पाण्डेय   प्रकाशक -आस्था प्रकाशन गृह जालंधर   प्रथम संस्करण - 2024 मूल्य - 325 पाठकीय प्रतिक्रिया क्रमांक :169  दिलीप कुमार पाण्डेय जी वर्तमान स्थापित साहित्यकारों में एक उल्लेखनीय नाम है जिन के पास साहित्य के क्षेत्र में विशाल अनुभव तो है ही,   वह एक जाने माने समीक्षक तथा प्रतिष्ठित कवि भी हैं। हाल फिलहाल तक उनके दो काव्य-संग्रह “उम्मीद की लौ” एवं “अंधेरे में से” तथा एक   संपादित पुस्तक “दृष्टिकोण” प्रकाशित हो चुकी हैं। वहीं उनके अनेक समीक्षात्मक लेख विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समय समय पर प्रकाशित होते रहते हैं l अपने सृजन के क्रम को आगे बढाते हुए, उन्होंने विभिन्न पुस्तकों की उनके द्वारा की गई समीक्षाओं को पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया है।                “रचनाशीलता का गणित” उनकी चौथी पुस्तक है जिसमें   विभिन्न साहित्यकारों की विभिन्न विधाओं की पुस्तकों यथा कविता , कहानी , लघुकथा , उपन्यास , क्षणिकाएं , गजल संग्रह , कुंडलियां आदि पर उनक...

DO GAZ KI DOORI BY MAMTA KALIYA

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  दो गज की दूरी द्वारा : ममता कालिया विधा : कहानी संग्रह सेतु प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 249 प्रथम संस्करण : 2022 पाठकीय प्रतिक्रिया क्रमांक : 168   साहित्य प्रेमियों को ममता जी के विषय में कुछ परिचय देना निश्चय ही उन साहित्य से सरोकार रखने वालों के प्रति एक अविश्वास ही होगा क्यूंकि जो हिन्दी साहित्य से ताल्लुक   रखता है वह निश्चय ही ममता जी द्वारा रचित साहित्य से परिचित होगा और उन   के लेखन की सराहना किये बगैर नहीं रह सकता एवं यह कहना अतिशयोक्ति भी नहीं होगी कि जिसने अब तक उन्हें पढ़ा नहीं अर्थात अभी उसने साहित्य को जाना ही नहीं   है या फिर अभी उनकी साहित्य के आँगन में नई नई आमद है , शुरुआत है। वरिष्ट लेखिका का लेखन तो हमारी उम्र से भी पुराना हो परिपक्व हो चुका है एवं सहज ही उन्हें हिन्दी साहित्य की लेखन साम्राज्ञी के रूप में पहचान जा सकता है। पुस्तक का आमुख अमिताभ राय जी द्वारा लिखा गया है एवं उन्होंने अपनी शैली में पुस्तक के बारे में जो उद्गार प्रकट किये हैं संभवतः वह आम पाठक को समझ पाना सहज न होगा , उस विषय में इतना ही कहना पर्याप्त होगा क...

Vihan Ki Aahat By Vandana Bajpai

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  विहान की आहट (कहानी संग्रह) कथाकार : वंदना बाजपायी भावना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2025 मूल्य: 250.00 पुस्तक क्रमांक : 167   “इस प्रस्तुति का उद्देश्य सम्माननीय पाठकों को पुस्तक की विषयवस्तु एवं कथाकार की भाषा शैली इत्यादि से सरल भाषा में परिचय   कराते हुए अपने विचार रखना तथा पाठक को पुनः पुस्तकों के करीब लाने का और साहित्य से जोड़ने का एक अदना सा प्रयास मात्र है।“ “ विहान की आहट ” वंदना बाजपायी जी की नवीनतम कृति है।  विहान से तात्पर्य है भोर अथवा सुबह, कहीं कहीं शाब्दिक अर्थ सूरज की पहली किरण भी पढ़ने में आता है किन्तु मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आज भी प्रातः काल को “भियाने” कहा जाता है जो की निश्चय ही विहान का शाब्दिक अपभ्रंश ही है , वैसे विहान मूलतः संस्कृत शब्द है जो की वि एवम हान दो शब्दों के योग से बनता है   तथा इसे उज्जवलता एवम प्रगति के सकारात्मक   प्रतीक के रूप में भी लेते हैं। पुस्तक का ब्लैक एंड वाइट कवर अपने नाम को सार्थकता प्रदान करता है तथा यूं प्रतीत होता है मानो प्रकाश अंधकार को लीलता चला जा रहा है। नई कों...