संदेश

जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Itna Bhi Mushkil Nahi By Sanjeev Kumar Gangwar

चित्र
  इतना भी मुश्किल नहीं द्वारा: संजीव कुमार गंगवार बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 350 पृष्ट : 221 समीक्षा क्रमांक :   121                           संजीव गंगवार जी साहित्य की अमूमन प्रत्येक विधा में सक्रिय हैं एवं सतत सशक्त लेखन हेतु बखूबी पहचाने जाते है। प्रख्यात फिल्मकार गुरुदत्त साहब पर लिखी उनकी पुस्तक “कागज के फूल” ने उनकी ख्याति मे सुनहरे सफ़े जोड़े थे हालांकि उनकी अन्य पुस्तकें भी मैंने पढ़ी हैं एवं आपके लिए उनकी समीक्षा भी प्रस्तुत की है जो की समान रूप से सराहनीय थीं।             उनकी प्रस्तुत पुस्तक “इतना भी मुश्किल नहीं” सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के भाव और सफलता की दिशा में अन्य कारकों पर विस्तार से प्रकाश डालती है।             यूं तो हिन्दी में प्रेरणादायी साहित्य एवं वक्ताओं की प्रचुरता है किन्तु अधिकांश को पढ़ने एवं सुनने के पश्चात मेरा यह अनुभव रहा है की पाठक अथवा श्रोता कित...

Avtarvad Ek Nayi Drishti By Ram Pal Shrivastav

चित्र
  “अवतारवाद” एक नई दृष्टि विधा : शोध द्वारा : राम पाल श्रीवास्तव संकल्प प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 335 पृष्ट   :239 समीक्षा क्रमांक : प्रथम संस्करण : 2023 अवतार से तात्पर्य देवता अथवा शक्ति का विभिन्न रूपों में अवतरण अथवा   प्रकट होना।   सामान्य तौर पर अवतार विभिन्न काल एवं रूप में धर्म स्थापना, अधर्म का नाश , पाप शक्तियों का अंत एवं मानव मातृ   की रक्षा तथा सतयुग की परिकल्पना को साकार रूप प्रदान करने हेतु अवतरित हुए हैं। रामपाल श्रीवास्तव जी द्वारा प्रस्तुत “अवतारवाद” एक नई दृष्टि वस्तुतः अवतारवाद के विभिन्न आयामों पर एक संक्षिप्त शोध एवं गहन चिंतन है जहां उन्होनें   अवतारवाद क्या है से प्रारंभ कर उसकी   कोटि एवं संख्या की धार्मिक ग्रंथों में दीये गए वर्णन को उद्धहरित करते हुए विवेचना प्रस्तुत की है। वहीं अवतारवाद   के आवश्यक तत्व एवं विकास का चिंतन भी है । मूल रूप से उchuनके अध्ययन का विषय वैष्णव धर्म में तथा वैष्णव संप्रदायों में अवतारवाद   रहा है। साथ ही उन्होंने हिन्दू धर्म में अवतार वाद से इतर अन्य धर्मों यथा बौद्ध,...

Hamare Whats App Veer By Sanjeev Kumar Gangwar

चित्र
  हमारे WhatsApp वीर विधा : व्यंग्य लेख द्वारा : संजीव कुमार गंगवार साहित्य संचय द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण :2019 पृष्ट संख्या : 160.00 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 116 संचार जगत में मोबाइल अवतरण निःसंदेह एक संचार क्रांति थी। Calls की सुविधा के पश्चात व्हाट्सएप ही एक मात्र ऐसी सुविधा थी जिसने अनचाहे ही हर खासोआम को बेतरह व्यस्त कर दिया । संदेश के आदान प्रदान , जो की   इस एप का मूल मकसद थे वे तो कहीं बहुत पीछे ही छूट गए थे तथा आम जन ने उस का प्रयोग या दुरुपयोग जिस अंदाज में किया उन में से ही कुछ पर संजीव जी ने अपनी इस पुस्तक “हमारे WhatsApp वीर” में व्यंग्य शैली में विचार प्रस्तुत किये हैं साथ ही उन्होंने फेसबुक इंटरनेट ट्वीटर जैसे संचार माध्यमों पर भी विस्तृत विमर्श एवं व्यंग्य किया है तथा इन समस्त संचार माध्यमों के गुण दोषों पर चर्चा करते हुए इनके समाज पर पढ़ने वाले प्रभाव पर विमर्श प्रस्तुत करना उनकी समाज के प्रति गंभीर चिंता को दर्शाता है। विभिन्न तरह के मैसेज को उन्होंने, अलग अलग भागों में विभक्त कर उस पर व्यंग्य प्रस्तुत किया है। सामान्य तौर पर व...