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Ki Tum Mere Kya Ho -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कि तुम मेरे क्या हो   द्वारा : पारुल अग्रवाल मित्तल विधा : उपन्यास VLMS Publications Pvt Ltd द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण वर्ष : 2026 मूल्य : 300.00 समीक्षा क्रमांक : 228 हिन्दी साहित्य की दुनिया में तेजी से उभरती हुई प्रतिभाशाली लेखिका है पारुल अग्रवाल मित्तल, जो हिन्दी साहित्य के मंच पर अपनी पुख्ता जगह बना चुकी हैं – “पारुल”, एक ऐसी लेखिका , जिसकी कलम में जीवन की कड़वी सच्चाईयों के संग प्रेम की कोमलता है, जो प्रेम को भावनात्मकता से आगे ले जा कर हालिया सामाजिक स्थिति और वास्तविकताओं के धरातल पर रखती है। उनके कथानक में प्रेम के संग जीवन के कड़वे-मीठे सच रूमानियत से परे अपनी वास्तविकताओं के संग बराबर चलते हैं।   पारुल अग्रवाल मित्तल   के प्रस्तुत उपन्यास “कि तुम मेरे क्या हो” को   VLMS Publications Pvt Ltd  ने प्रकाशित किया है , एवं इस के अतिरिक्त अब तक उनके दो उपन्यास पाठकों के बीच अपनी सुंदर छवि छोड़ चुके हैं   , पहला “उड़ान” और दूसरा “तुम्हारे इश्क में”, उनकी दोनों ही कृतियों न...

Love You Zindgi -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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 Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : “लव यू ज़िंदगी” द्वारा : गीतांजलि गंभीर विधा: उपन्यास विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2025 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 226 विभाजन की त्रासदी के परिप्रेक्ष्य में सृजित  “लव यू ज़िंदगी”,  गीतांजलि गंभीर द्वारा सृजित तथा विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित,  कथानक न केवल उस तकलीफदेह निर्णय की प्रासंगिकता को कटघरे में खड़ा करता है अपितु विस्थापन के ज़ख्म, जो अब नासूर बन गए हैं, कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी दर्द दे रहे हैं इसे बखूबी लक्षित करता है। कहानी भारत-पाक विभाजन के उस रक्तरंजित अध्याय से शुरू होती है , जहाँ लाहौर शहर में बसा एक सम्पन्न, खुशहाल हिन्दू परिवार रातों-रात न सिर्फ बेघर हो जाता है अपितु आर्थिक रूप से पूर्णतः तबाह हो चुकने के साथ ही अपने परिवार के सदस्यों की इज्जत एवं जीवन रक्षा हेतु भी संघर्षरत रहता है।  शिवानी जो पाठकों को अपने संग यादों के इस सफ़र पर लेकर चलती हैं उनके दादा-दादी , माता,पिता जो कभी लाहौर की संभ्रांत हस्ती थे , रातों-रात शरणार्थी बन जाते हैं तथा अपनी पुश्तैनी जायज़ाद , सं...

Ateet Ke Nirjhar -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : अतीत के निर्झर द्वारा: प्रकाश प्रियम विधा: कथेतर  वेरा प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 225                                                                                                              गद्य साहित्य की प्रमुख कथेतर विधाओं में एक है संस्मरण। इस प्रमुख विधा में अत्यंत महत्वपूर्ण सृजन हुआ है जो निश्चय ही भविष्य में मार्गदर्शक का कार्य करेगा। संस्मरण को बाज दफा आत्मकथा के समान मान लिया जाता है एवं कहीं कहीं गलत रूप में प्रयुक्त भी होता है किन्तु दोनों में भेद हैं, यथा जहां आत्मकथा के द्वारा पूरे जीवन का क्रमबद्ध इतिहास दर्शाया जाता है वहीं संस्मरण में जीवन की कुछ खास घटनाएँ अथवा विशिष्ट यादें ही लिपिबद...

Pratinidhi Kahaniyan -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : प्रतिनिधि कहानियाँ द्वारा: राजेन्द्र राजन विधा : कहानी समृद्ध पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2026 मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक : 224                                                                                          समीक्षाधीन पुस्तक, “प्रतिनिधि कहानियाँ” राजेन्द्र राजन की उन चुनिंदा कहानियों का संग्रह है जो विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई एवं बेहद पसंद की गईं। राजेन्द्र राजन एक ऐसी शक्सीयत, जिनका काम ही उनकी पहचान बन चुका है एवं उनका अलग से परिचय देना औपचारिकता भले ही हो, दरकार तो कदापि नहीं, फिर भी गर बात करें उनके साहित्यिक योगदान की तो उनके द्वारा सृजित अनेकों कहानी संग्रह , उपन्यास एवं संस्मरण तथा शोध ग्रंथों के संग , “हीरा मंडी” , जैसे बहुचर्चित उपन्यास एवं “प...

Yogi Kathnamrat -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  स मीक्षित पुस्तक : योगी कथनामृत द्वारा: श्री श्री परमहंस योगानन्द संकलन एवं संपादन : एम. आई. राजस्वी VETERAN PUBLISHING HOUSE द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 299.00 पुस्तक प्रस्तुति क्रमांक: 223   " संसार को यह मत बताओ कि तुम कितने अच्छे हो ; बल्कि यह कर के दिखाओ कि तुम कितने अच्छे हो।"   “शिक्षा केवल बौद्धिक नहीं होनी चाहिए बल्कि शरीर , और मन के समग्र विकास पर केंद्रित होनी चाहिए”।   आज से शताब्दी पूर्व ऐसे प्रगतिशील विचारों के संग 1917 में योगदा सत्संग विद्यालय की स्थापना करने वाले और “एक योगी की आत्मकथा” जैसी महान प्रेरणादायी पुस्तक के रचयिता, महान योगी परमहंस योगानन्द के द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण प्रवचनों का संकलन है प्रस्तुत पुस्तक “योगी कथनामृत” , जिसे इस रूप में प्रस्तुत करने में वरिष्ठ साहित्यकार, संकलनकर्ता तथा संपादक एम. आई. राजस्वी जी, प्रकाशक VETERAN PUBLISHING HOUSE तथा VPH के निदेशक समीर जी के अथक प्रयास सराहनीय हैं। यह पुस्तक मात्र पवित्र वचनों का शाब्दिक संग्रह नहीं है , अपितु यह तो एक ...