InBox -- Pustak Samiksha : Atulya Khare
Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक: इन बॉक्स विधा : उपन्यास द्वारा : गीता पण्डित श्वेतवर्ण प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य: 299 समीक्षा क्रमांक : 204 विकलांगता विमर्श पर संभवतः पहली बार इस तरह से किसी रचना का सृजन किया गया है कृति का केंद्र ही विकलांगता है। सम्पूर्ण कृति उस पीढ़ा को बयान करती है जो एक विकलांग बच्चा और उसका परिवार विशेष तौर पर माँ, मानसिक स्तर पर सहते हैं। यह इस उपन्यास की विशिष्टता कही जाएगी की अमूमन जिस विषय को कथानक के एक हिस्से में महज किसी पात्र विशेष के प्रति सहानुभूति एकत्र करने हेतु उपयोग किया जाता था लेखिका ने उसे ही अपने कृतित्व का केन्द्रबिन्दु बना दिया। विकलांगता जैसे विषय को इतनी प्रमुखता से प्रस्तुत करने का उनका यह प्रयास सराहनीय है। किसी ने कहा था की your presence and absence both should be felt और संभवतः यह बात बच्चों के विषय में शतप्रतिशत सच है वे रहें तब अपनी उपस्थिति का सुखद एहसास सभी को करवाते हैं और यदि बदकिस्मती से न रहें तो तब तो उनकी कमी निःसंदेह चुभती है, एक पोलिओ ग्रस्त बच्चे की म...