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Adhjale Thudde -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : अधजले ठुड्डे विधा : कहानी द्वारा : हंसा दीप वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 399.00 समीक्षा क्रमांक : 214    हंसा दीप समकालीन हिंदी साहित्य का सुपरिचित, प्रखर, हस्ताक्षर जिन्होंने सात समंदर पार से भी हिन्दी के साहित्यिक परिदृश्य को अपनी अविस्मरणीय कृतियों द्वारा समृद्द किया है। उनकी लेखनी का साहित्य के माध्यम से दो भिन्न राष्ट्रों की भिन्न संस्कृतियों के बीच एक सूत्र रूप में उल्लेखनीय एवं अविस्मरणीय योगदान है। उनकी कहानियों के माध्यम से वे भारतीय संस्कारों तथा विचारों को पाश्चात्य परिवेश के साथ अत्यंत गरिमा मर्यादा एवं संवेदनशीलता से संबद्द करती है। ​एक विदुषी के रूप में उनकी वैचारिक स्पष्टता एवं लेखिका के रूप में सहज एवं स्पष्ट अभिव्यक्ति को पाठकों से सदैव श्रेष्ट सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हुआ है। उन के द्वारा सृजित कृतियों की फेहरिस्त लंबी है किन्तु चंद नाम उल्लेखनीय हैं यथा उपन्यासों में : “बंद मुट्ठी”,“कुबेर”, “केसरिया बालम”, “कांच के घर”, तो वहीं कहानी संग्रह, “चश्मे अपने अपने”, “प्रवास में आ...

क se kahaniyan -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : क से कहानियाँ विधा: कहानी द्वारा: अभिनव गुप्ता बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2025 मूल्य : 200 समीक्षा क्रमांक : 210 “क से कहानियां,” युवा लेखक अभिनव गुप्ता का पहला कहानी संग्रह है किन्तु अभिव्यक्ति में परिपक्वता , सरल भाषा, प्रवाह में सरलता तथा पाठक के दिल तक पहुचने की कला , उनमें अपार संभावनाएं दर्शाती है। पुस्तक के प्रारंभ से पूर्व ही , पिता के लिए श्रद्धा सुमन स्वरूप लिखित चंद पंक्तियां प्रभावित करती हैं एवं पुस्तक की सबसे सुंदर पंक्तियों में से है। पुस्तक में यूं तो 12 कहानियां संग्रहीत हैं किन्तु सब अपने भाव एवं कथानक में विविधता रखते हुए हमारे इर्द गिर्द की बात ही लगती हैं। कही किसी विषय विशेष अथवा अद्भुत पात्र का सृजन नहीं है , पात्र भी हमारे अपने ही लगते हैं, फिर वह करीबी रिश्तेदार हो अथवा कोई मित्र या पड़ोसी, सब से पाठक को सहज ही जुड़ाव हो जाता है एवं सब अपने लगने लगते हैं, और कहानी अपनी कहानी । प्रमुखता से कहा जा सकता है कि विषय अथवा परिदृश्य सृजित कर, पात्र उसमें पिरोये गए हों ऐसे प्रतीत नहीं होते, अपितु व...