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Ek Tukda Zindagi -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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 Pustak samiksha : Atulya Khare एक टुकड़ा ज़िंदगी विधा: कहानी द्वारा: जितेन ठाकुर काव्यांश प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण :2026 मूल्य: 200.00 समीक्षा क्रमांक : 211   हाल ही में उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2025 हेतु “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से नवाजे गए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जितेन ठाकुर हिंदी साहित्य में सुस्थापित, अत्यंत प्रतिष्ठित कथाकार हैं। विगत पाँच दशकों से साहित्य जगत में उनकी उपस्थिति एवं सतत सक्रियता तथा महत्वपूर्ण लेखन क्रम द्वारा उनके अविस्मरणीय योगदान ने उन्हें उन ऊंचाइयों पर विराजित कर दिया है जहां काम ही नाम बन जाता है। उनकी पहली कविता तत्कालीन प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग मे 1975 में प्रकाशित हुई थी तत्पश्चात उस दौर की अमूमन प्रत्येक साहित्यिक पत्रिका यथा सारिका, रविवार, साप्ताहिक हिंदुस्तान, कादम्बनी सहित अन्य सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने उनकी रचनाएं प्रमुखता से प्रकाशित करीं। उनकी साहित्यिक कृतियों का देश की अमूमन प्रत्येक भाषा में अनुवाद किया गया जो की उनके साहित्यिक सृजन की लोकप्रियता दर्शाता है। साहित्य की विभिन्न विधाओं में उनके प्रकाशित स...

क se kahaniyan -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : क से कहानियाँ विधा: कहानी द्वारा: अभिनव गुप्ता बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2025 मूल्य : 200 समीक्षा क्रमांक : 210 “क से कहानियां,” युवा लेखक अभिनव गुप्ता का पहला कहानी संग्रह है किन्तु अभिव्यक्ति में परिपक्वता , सरल भाषा, प्रवाह में सरलता तथा पाठक के दिल तक पहुचने की कला , उनमें अपार संभावनाएं दर्शाती है। पुस्तक के प्रारंभ से पूर्व ही , पिता के लिए श्रद्धा सुमन स्वरूप लिखित चंद पंक्तियां प्रभावित करती हैं एवं पुस्तक की सबसे सुंदर पंक्तियों में से है। पुस्तक में यूं तो 12 कहानियां संग्रहीत हैं किन्तु सब अपने भाव एवं कथानक में विविधता रखते हुए हमारे इर्द गिर्द की बात ही लगती हैं। कही किसी विषय विशेष अथवा अद्भुत पात्र का सृजन नहीं है , पात्र भी हमारे अपने ही लगते हैं, फिर वह करीबी रिश्तेदार हो अथवा कोई मित्र या पड़ोसी, सब से पाठक को सहज ही जुड़ाव हो जाता है एवं सब अपने लगने लगते हैं, और कहानी अपनी कहानी । प्रमुखता से कहा जा सकता है कि विषय अथवा परिदृश्य सृजित कर, पात्र उसमें पिरोये गए हों ऐसे प्रतीत नहीं होते, अपितु व...

Utre Pairahan Khamoshi Ke -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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 Pustak Samiksha : Atulya Khare उतरे पैरहन खामोशी के   विधा : कविता द्वारा: किश्वर अंजुम   पाखी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 240.00 समीक्षा क्रमांक : 207                               “ उतरे पैरहन खामोशी के ”, “किश्वर अंजुम” , द्वारा रचित भावपूर्ण कविताओं का सुंदर संग्रह है , “किश्वर अंजुम” वह नाम है जो आज साहित्य से ताल्लुक रखने वालों के बीच खूब पहचाना  जाता है और किसी परिचय का मोहताज तो कतई नहीं है उनकी कृति स्वयं उनका परिचय हैं ।       पूर्व में जहां उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपनी बेहतरीन कृतियों यथा   “परछाइयाँ अँधेरों की” ,” त्रिवेणी”, “प्रतीक्षा में प्रेम”, आदि   के द्वारा समृद्द किया है उसी शृंखला में अब उनका नवीनतम काव्य संग्रह   “उतरे पैरहन खामोशी के” कुछ ऐसी भाव प्रधान नज़्म लेकर आया है जो पाठक को अपने मन के अंदर उस ढंकें हुए कोने में   झाँकने को विवश करता है जिस से वह या तो बचता रहा है या फिर कभी उस पर गौर ही नहीं किया है और इस प...