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Us Din -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : उस दिन   द्वारा :   पूनम अहमद   विधा :   आत्मकथा अद्विक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित   संस्करण : प्रथम 2024 मूल्य : 220 समीक्षा क्रमांक : 147      पूनम जी की कई पुस्तकें अभी तक पढ़ीं ,   उन पर लिखा भी ,   और उनकी पहली पुस्तक पढ़ने के समय से ही उनके अंदाज़े बयां का मुरीद हूं, और अब जो उन्होंने अपनी कहानी या कहें जीवन के संस्मरण   “उस दिन” शीर्षक से पुस्तक के रूप में सँजोये हैं    उस पर तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं। बस यही कहना काफी होगा लिखने के तरीके के लिए और   लिखने की सहजता के लिए पढ़ा जाना चाहिए। भाव तो उनके कहन में सहज ही आ गए और इस पुस्तक के प्रारंभिक   संस्मरण   जैसे “उस दिन” और पिता से आखरी मुलाकात में तो भावनाओं का दरिया आपको अपने साथ सहज ही बहा ले जाता है। उस दिन ,   आम   इंसान की जिंदगी में जो कुछ बीतता है उसे इतने खूबसूरत तरीके से भी बतलाया जा सकता है यह इस पुस्तक को पढ़ कर ही पता लगा। अपने विषय में लिखते हुए यह एक ...

Cancer Se Meri Jang By Atulya Khare

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  कैंसर से मेरी जंग नमस्कार दोस्तों, आप लोगों द्वारा मेरे द्वारा लिखित  समीक्षाएं बड़े ही स्नेह के साथ पढ़ी जा रही हैं, एवं यह आप लोगों द्वारा दिया   जाने वाला प्रोत्साहन ही है जो मुझे निरंतर आपके सम्मुख नई समीक्षाएं प्रस्तुत करने हेतु एक नए जोश के साथ प्रेरित करता है।   हॉबी के तौर पर शुरू किया गया छोटा सा प्रयास आज दिन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आप लोगों से एक बेहद करीबी सा रिश्ता जुड़ गया है तो सोचा आप लोगों से अपनी एक कहानी साझा करूं। कहानी है मेरे संघर्ष की। यह जरूर कहना चाहूंगा कि लिखने का उद्देश्य सहानुभूति प्राप्त करना कतई नहीं है, बस दिल में आया कि अपनी बात अपनों से कहूं इसलिए लिख रहा हूं। तो, चलिए शुरुआत करते हैं दोनों तस्वीरों से, जो आप देख रहे हैं, ये दोनो मेरी ही तस्वीरें हैं, किन्तु फर्क देख चौंकिए मत, क्यूंकि जो फर्क है वो है 4 साल , एक मेजर सर्जरी ,   30 sitting   रेडिएशन , और 3 माह के मौन का , उसके साथ तकरीबन 25   किलो वजन और सबसे अहम् दमदार मूंछ का। अगस्त 2019 का वाकया है, जिंदगी चल रही थी , बैंक की नौकरी भी चल रही थी , साथ...