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Agnipath Nahi Janpath -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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                     Pustak Samiksha : Atulya Khare ·                  समीक्षित पुस्तक : अग्निपथ नहीं जनपथ ·                  द्वारा: डॉ. सतीश पूनियाँ ·                  वेरा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ·                  प्रथम संस्करण : 10/2025 ·                  पंचम संस्करण : 01/2026 ·                  मूल्य : 299 ·                  समीक्षा क्रमांक : 234  “जहां हो...

Mai Krishn Sakhi -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक :  मैं कृष्ण सखी द्वारा : नीलिमा गुप्ता विधा : पौराणिक  साहित्यागार द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2021 मूल्य : 250.00  समीक्षा क्रमांक : 111    नीलिमा गुप्ता जी का शुमार उन वरिष्ठ लेखिकाओं में   है जो गहन अनुसंधान के पश्चात ही अपनी कृति प्रस्तुत करती हैं। पौराणिक कथाओं के नारी पात्रों को अपने नजरिए से देखती हैं किंतु विशिष्टता यह है की तार्किक रूप से उनके कथन से सहमत होना ही पड़ता है। इसके पूर्व उनकी दो पुस्तकें “मैं बाबा का कान्हा” और “मैं हूं सीता” पढ़ी थी एवं दोनो ही पुस्तकों ने सोच को एक नया आयाम दिया। मेरे द्वारा दोनो ही पुस्तकों के विस्तृत अध्यन के पश्चात उनकी समीक्षा भी लिखी गई थी जिसका अवलोकन किया जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक “मैं कृष्ण सखी” अर्थात द्रोपदी, के साथ जो कुछ महाभारत के द्वारा हमने जाना है उसे अपने भिन्न नजरिए से प्रस्तुत किया है जो निश्चित ही महाभारत की प्राचीन कथाओं द्वारा दी गई सोच से भिन्न दिशा में ले जाकर विचारधारा में परिवर्तन एवं द्रोपदी के अधोआकलित पात्र ...

Main Hoon Sita -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : मैं हूँ सीता विधा : पौराणिक  द्वारा : नीलिमा गुप्ता सन प्रिंटस अलवर द्वारा प्रकाशित मूल्य: 150.00 समीक्षा क्रमांक : 95                 “सीता” जिन्हें सिया , जानकी , मैथिली , वैदेही और भूमिजा के नाम से भी जाना जाता है , भगवान विष्णु के अवतार श्री राम की पत्नी हैं , और उन्हें विष्णु की पत्नी , लक्ष्मी का एक रूप माना जाता है । वह राम-केंद्रित हिंदू परंपराओं की प्रमुख देवी भी हैं। “मैं हूँ सीता” नीलिमा गुप्ता जी का एक प्रयास है उन्हीं सीता जी के पात्र को और करीब से, अपने नजरिए से समझने का। नीलिमा गुप्ता , दीर्घ काल तक शिक्षण   के क्षेत्र से संबद्ध रहीं हैं एवं पौराणिक पात्रों   के विषय में उपलब्ध जानकारी से कुछ अधिक जानने की सहज जिज्ञासा उन्हें निरंतर ही संबंधित विषयों पर   शोध हेतु प्रेरित करती रहती है एवं उनके यह शोध उनकी लेखनी एवं कृतित्व से स्पष्टतः प्रगट   होते हैं।    विशेषतौर पर पौराणिक लेखन से सम्बद्ध है व प्रस्तुत पुस्तक से अलावा कृष्ण पर लिखी उनकी कृति...

Mai Baba Ka Kanha -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : मैं बाबा   का कान्हा लेखिका : नीलिमा गुप्ता विधा: पौराणिक  प्रकाशक :   दृष्टि प्रकाशन जयपुर नीलिमा गुप्ता , विशेषतौर पर पौराणिक लेखन से सम्बद्ध है व प्रस्तुत पुस्तक से इतर सीता पर लिखी उनकी कृति “मैं हूँ सीता” व   ‘मैं कृष्ण सखी’ भी प्रकाशित हुयी हैं   एवं पौराणिक विषयों को देखने के अपने एक भिन्न नज़रिए के चलते सुधि पाठक वर्ग द्वारा बेहद सराही गयी, एवं उनके विशिष्ठ कृतित्व को   विभिन्न मंचों पर प्रतिष्ठित पुरुस्कारों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।  पुस्तक विभिन्न स्थानों पर प्रचलित कथाओं एवं मान्यताओं से भिन्न लेख देती है किन्तु किसी प्रमाणिकता का दावा प्रस्तुत नहीं किया गया है अतः उसे मात्र कथानक की रोचकता बनाये रखने हेतु किये गए संशोधन के रूप में ही लिया जाना चाहिये। प्रस्तुत पुस्तक में उन्होंने वासुदेव, जो कि विष्णु के आठवें अवतार थे , कृष्ण और उनके भाई बलराम और सुभद्रा के पिता थे व एक गोप राजकुमार थे और   महान यादव राजा शूरसेन के पुत्र थे व उनके   सखा नंद जो कि वासुदेव के चचेरे भाई...