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Har Shakh Par Ullu Baitha Hai By Mukul Ranjan Pustak samiksha By Atulya Khare

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                 PUSTAK SAMIKSHA : ATULYA KHARE समीक्षित पुस्तक : हर शाख पर उल्लू बैठा है द्वारा : मुकुल रंजन विधा : उपन्यास राज मंगल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण 2026 मूल्य : 329 .00 समीक्षा क्रमांक : 254                                              बतौर पटकथा लेखक , निर्देशक फिल्म जगत से विगत् 30 वर्षों से संबद्ध रहते हुए मुकुल रंजन , मनोरंजन उद्योग की पेचीदगियों का गहरा तजुर्बा रखते हैं। समय समय पर उनकी कहानियाँ , लेख इत्यादि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं वहीं उनकी निर्देशन की कला भी हमने कई फिल्मों एवं tv सीरियल्स यथा महायात्रा , रजनी , और बीपीएल सुपरस्टार्स में देखी है। यूं तो हिन्दी में मुकुल रंजन जी का यह दूसरा ही उपन्यास है किन्तु दृश्य प्रस्तुति की प्रभावी शैली एवं कथानक में सृजित प्रवाह जहां एक ओर इसे रोचक मनोरंजक एवं पठ...

islet Pinsin By Pavan Kumar Arpit : Pustak samiksha By Atulya Khare

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Pustak Samiksha: Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : इस्लेट पिंसिन विधा : कहानी द्वारा : पवन कुमार अर्पित Lion’s Publication द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2024 मूल्य : 160.00 समीक्षा क्रमांक : 253                                                          बेशक यह युवा लेखक पवन कुमार अर्पित का पहला ही कहानी संग्रह है किन्तु उनकी कहानियों के भाव एवं पात्र की भावनाओं को अभिव्यक्त करने की कला निःसंदेह सराहनीय है। यदि बात सिर्फ उनकी कहानियों के आकार विस्तार की हो तो उनकी कहानियों को कमोबेश  लघुकथा की श्रेणी में भी रख सकते हैं। अल्प शब्दों में ही सुंदरता से भाव अभिव्यक्त करे गए हैं एवं अपनी सभी कहानियों में वे मुद्दे पर रहे हैं , व्यर्थ का भटकाव लक्षित नही होता। लेखक अपने आप में स्पष्ट है कि उसे क्या लिखना है उसका संदेश क्या है उसके पात्रो...

Virhantar By Ramesh_Khatri : Samiksha By Atulya_khare

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        Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : विरहांतर  विधा : उपन्यास द्वारा : रमेश खत्री दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2026 मूल्य : 450.00 समीक्षा क्रमांक : 253         वरिष्ट साहित्यकार प्रकाशक , लेखक एवं समाजसेवी रमेश खत्री जी का यह उपन्यास कई मायनों में विशिष्ट है।  प्रस्तुत उपन्यास का कथानक बच्चे के गलत लालन पालन के दुष्प्रभाव दिखलाते हुए आधुनिक पारिवारिक विघटन   , मानवीय कमजोरियों , स्वार्थ और अंततः अंतर्मन के परिवर्तन का एक जीवंत दस्तावेज प्रतीत होता है। कथानक एक ऐसी बिगड़ैल और जिद्दी लड़की के इर्द - गिर्द घूमता है , जिसे लाड़ - प्यार की अति ने कामचोर , फिजूल - खर्चीली और नकचढ़ी बना दिया। उसकी पसंद के लड़के से किया गया विवाह भी उसे प्रसन्न नहीं रख पाता , वहीं आर्थिक रूप से कमजोर ससुराल पक्ष का लालच कथानक का महत्वपूर्ण भाग है जो यूं तो कथानक को सीधे ही मोड़ नहीं देता किन्तु घटनाक्रम में सास द्वारा जमाई को बेटी के द्वारा भेजे गए पै...