संदेश

Sanjhi -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
  Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : सांझी द्वारा : शिवांगी पुरोहित विधा : उपन्यास Lion’s Publication द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण   : 2024 मूल्य : 160.00 समीक्षा क्रमांक : 249                                                                         प्रकाशन का दायित्व संभाल रही बहुमुखी प्रतिभा की धनी , प्रख्यात लेखिका विदुषी शिवांगी पुरोहित का  नारी विमर्श आधारित  यह उपन्यास " सांझी " जहां एक ओर साफ - सुथरी प्रेमकथा प्रस्तुत करता है , तो वहीं दूसरी ओर निम्न - मध्यमवर्गीय पारिवारिक परिस्थितियों और विशेष तौर पर परिवार में मुखिया द्वारा मदिरा सेवन के प्रभाव को उनके बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को सामने लाता है। शिवांगी जी के इसके पूर्व प्रस्तुत कृतियों यथा कटिंग चाय , जेल डायरी और अभ्युत्थानम को प्रबुद्द पाठ...

Stri Younikta Ke Samajik Sandarbh -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
    • Pustak Samiksha : Atulya Khare     • समीक्षित पुस्तक :  स्त्री यौनिकता के सामाजिक संदर्भ     • विधा : Non Fiction      • द्वारा : डॉ . सुनीता ठाकुर     • विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित     • प्रथम संस्करण : 2025     • मूल्य : 300.00     • समीक्षा क्रमांक : 248           स्त्री यौनिकता एक अत्यंत व्यापक और बहुआयामी विषय है जिसे मात्र जैविक प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसमें मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं का एक जटिल मिश्रण शामिल है। ​यौनिकता व्यक्ति की अपनी इक्षाओं, पसंद-नापसंद, भावनाओं और आत्म-बोध से गहराई से जुड़ी होती है।        समाज, परंपराएं, धर्म और शिक्षा यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं कि स्त्री यौनिकता को कैसे देखा जाता है। इतिहास में हम देखते हैं की समाज द्वारा विभिन्न दलीलें देकर अक्सर इसे दबाने या नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है, जिसके कारण आज भी हमारे समाज में इस पर खुलकर बात करना बहु...

DashrathNandan Dashanan Gatha -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : दशरथनंदन-दशानन गाथा द्वारा : एम.आई.राजस्वी विधा : पौराणिक गाथा फिंगर प्रिन्ट मीडिया द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2020 मूल्य : 250  समीक्षा क्रमांक : 247                 भारतीय साहित्य में रामायण एक ऐसा अक्षय स्रोत है , जिसे जितनी बार पढ़ा जाए , वह हर बार एक नई प्रेरणा देता है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' इसी चिरंतन गाथा को पुनः जीवित करने का एक और विनम्र प्रयास है। इस पुस्तक में हमें वे सभी घटनाएँ मिलती हैं जिनसे हम सदियों से परिचित हैं , लेकिन लेखक की प्रस्तुति में वह प्रवाह और सहजता है जो पाठक को एक बार फिर से उस महायात्रा पर साथ ले जाने में सफल रहती है। " यूं भी ​ " रामायण की कथा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' उन पाठकों के लिए एक सुंदर संकलन है जो मूल कथा के प्रवाह को बिना किसी विरूपण के एक पुस्तक में समेटे हुए देखना चाहते हैं। लेखक ने दशरथ के पुत्र राम और लंकापति दशानन के बीच के संघर्ष को उन्हीं पारंपरिक घटनाओं के माध्यम से पिरोया है , जो हम...