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Tooti Pencil -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  ·        .  Pustak   Samiksha : atulya khare   ·         .   टूटी पेंसिल ,  ·        .  द्वारा: हंसा दीप ,  ·        .  विधा : कहानी ,  ·        .  शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित   ·        .  प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2024 ·        .  मूल्य : 225 :00 ·        .  समीक्षा क्रमांक :  231   माँ सरस्वती के आशीर्वाद स्वरूप हिंदी साहित्य जगत के अनमोल खजाने में मूर्धन्य साहित्यकारों के रूप में असंख्य बेशकीमती रत्न मौजूद हैं उनमें से चंद रत्न ऐसे भी हैं जो सात समुद्र पार विदेशों में भी हिन्दी साहित्य की मशाल को न सिर्फ प्रज्वलित किये हुए हैं अपितु बहुत ऊंचा उठाए हुए हैं , उन्हीं में से एक ख्यातिलब्ध नाम वरिष्ठ साहित्यकार “हंसा दीप” है। हंसा जी ने अपने लेखन से जो ख्याति प्राप्त की है एवं जिस मुकाम को हासिल किया है वह नितांत दुर्लभ है। आज ...

Gadula -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  ·       .   Pustak Samiksha : Atulya Khare ·        .  समीक्षित पुस्तक : गाडूला ·        .  विधा: उपन्यास ·        .  द्वारा: संतोषी देवी ·        .  बोधि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ·        .  प्रथम संस्करण : 2025 ·        .  मूल्य : 249.00 ·        .  समीक्षा क्रमांक : 230     ​ प्रचार प्रसार से दूर, शांत एवं सहज भाव से, साहित्य साधना में रत संतोषी देवी साहित्य जगत में तेजी से उभरता हुआ नाम हैं, हालांकि अपनी विशिष्ट लेखन शैली के चलते साहित्य जगत में वे पहले ही अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। गुणवत्ता की दृष्टि से संतोषी जी की यह पुस्तक उन्हें उन ऊंचाइयों पर ले जाती है जहां पहुंचना अनेकों का स्वप्न होता है। अल्पकाल में ही संतोषी जी के तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, विभिन्न प्रतिष्ठित स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में भी उनकी रचनाएं तथा कविताएं इत्यादि अक्स...

deep mein divakar -- pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : दीप में दिवाकर     द्वारा : मीरा जैन विधा : लघुकथा हिन्दी साहित्य संस्था द्वारा प्रकाशित    प्रथम संस्करण : 2025     मूल्य : 280.00     समीक्षा क्रमांक : 229 इसमें दो मत नहीं कि लघुकथा हिंदी साहित्य की एक प्रचलित एवं सशक्त विधा है , हिंदी साहित्य में लघुकथा की यात्रा सदियों पुरानी है , भारतीय साहित्य में हितोपदेश , पंचतंत्र और जातक कथाओं में भी लघुकथा की उपस्थिति प्रतिविंबित होती हैं। माधवराव सप्रे द्वारा रचित “एक टोकरी भर मिट्टी” को साहित्य मनीषियों ने देश की पहली लघुकथा माना है। प्रतिष्ठित साहित्यकारों यथा कमलेश्वर , राजेंद्र यादव जी ,   और विष्णु प्रभाकर जी जैसे लेखकों ने इसे परिपक्व बनाया और साहित्य की इस विधा को पहचान दिलवाई। एक विधा के रूप में इसका विकास आधुनिक काल में हुआ। आज लघुकथा एक स्थापित विधा है। यह केवल "छोटी कहानी" नहीं है , बल्कि कम शब्दों में एक गहरा प्रभाव छोड़ने वाली कला है। लघुकथा की संरचना आम लघुकथा से कई मायनों में भिन्न होती है। स...

Ki Tum Mere Kya Ho -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कि तुम मेरे क्या हो   द्वारा : पारुल अग्रवाल मित्तल विधा : उपन्यास VLMS Publications Pvt Ltd द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण वर्ष : 2026 मूल्य : 300.00 समीक्षा क्रमांक : 228 हिन्दी साहित्य की दुनिया में तेजी से उभरती हुई प्रतिभाशाली लेखिका है पारुल अग्रवाल मित्तल, जो हिन्दी साहित्य के मंच पर अपनी पुख्ता जगह बना चुकी हैं – “पारुल”, एक ऐसी लेखिका , जिसकी कलम में जीवन की कड़वी सच्चाईयों के संग प्रेम की कोमलता है, जो प्रेम को भावनात्मकता से आगे ले जा कर हालिया सामाजिक स्थिति और वास्तविकताओं के धरातल पर रखती है। उनके कथानक में प्रेम के संग जीवन के कड़वे-मीठे सच रूमानियत से परे अपनी वास्तविकताओं के संग बराबर चलते हैं।   पारुल अग्रवाल मित्तल   के प्रस्तुत उपन्यास “कि तुम मेरे क्या हो” को   VLMS Publications Pvt Ltd  ने प्रकाशित किया है , एवं इस के अतिरिक्त अब तक उनके दो उपन्यास पाठकों के बीच अपनी सुंदर छवि छोड़ चुके हैं   , पहला “उड़ान” और दूसरा “तुम्हारे इश्क में”, उनकी दोनों ही कृतियों न...