संदेश

Ki Tum Mere Kya Ho -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कि तुम मेरे क्या हो   द्वारा : पारुल अग्रवाल मित्तल विधा : उपन्यास VLMS Publications Pvt Ltd द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण वर्ष : 2026 मूल्य : 300.00 समीक्षा क्रमांक : 228 हिन्दी साहित्य की दुनिया में तेजी से उभरती हुई प्रतिभाशाली लेखिका है पारुल अग्रवाल मित्तल, जो हिन्दी साहित्य के मंच पर अपनी पुख्ता जगह बना चुकी हैं – “पारुल”, एक ऐसी लेखिका , जिसकी कलम में जीवन की कड़वी सच्चाईयों के संग प्रेम की कोमलता है, जो प्रेम को भावनात्मकता से आगे ले जा कर हालिया सामाजिक स्थिति और वास्तविकताओं के धरातल पर रखती है। उनके कथानक में प्रेम के संग जीवन के कड़वे-मीठे सच रूमानियत से परे अपनी वास्तविकताओं के संग बराबर चलते हैं।   पारुल अग्रवाल मित्तल   के प्रस्तुत उपन्यास “कि तुम मेरे क्या हो” को   VLMS Publications Pvt Ltd  ने प्रकाशित किया है , एवं इस के अतिरिक्त अब तक उनके दो उपन्यास पाठकों के बीच अपनी सुंदर छवि छोड़ चुके हैं   , पहला “उड़ान” और दूसरा “तुम्हारे इश्क में”, उनकी दोनों ही कृतियों न...

Sahitya Ki Gumtee -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
  समीक्षा  द्वारा: अतुल्य खरे  समीक्षित पुस्तक : साहित्य की गुमटी द्वारा: धर्मपाल महेंद्र जैन शिवना प्रकाशन सीहोर द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 275.00 समीक्षा क्रमांक : 227 प्रभावी शैली के वरिष्ठ व्यंग्यकार, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखने वाले सम्मानीय लेखक, प्रवासी धर्मपाल महेंद्र जैन का नवीनतम व्यंग्य संग्रह  ' साहित्य की गुमटी ' समकालीन हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है। 50 व्यंग्य रचनाओं का यह संग्रह समाज , राजनीति , प्रशासन की विसंगतियों का एक बेहतरीन कच्चा चिट्ठा है जिसे शिवना प्रकाशन सीहोर द्वारा आकर्षक आवरण पृष्ट के संग प्रकाशित किया गया है। इसमें शामिल समस्त रचनाएं रचनाएँ यूं आकार में तो छोटी हैं , किन्तु व्यवस्था की विसंगतियों पर चोट बड़ी ही करती है। इसके पूर्व धर्मपाल जी के 8 व्यंग्य संग्रह एवं 4 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जबकि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं मे स्थायी स्तम्भ लेखन एवं सम्पादन कार्य की लंबी सूची है एवं साहित्य विभूषण तथा व्यंग्य भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान के साथ ही समय समय पर उनके साहित्य जगत मे...

Love You Zindgi -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
 Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : “लव यू ज़िंदगी” द्वारा : गीतांजलि गंभीर विधा: उपन्यास विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2025 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 226 विभाजन की त्रासदी के परिप्रेक्ष्य में सृजित  “लव यू ज़िंदगी”,  गीतांजलि गंभीर द्वारा सृजित तथा विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित,  कथानक न केवल उस तकलीफदेह निर्णय की प्रासंगिकता को कटघरे में खड़ा करता है अपितु विस्थापन के ज़ख्म, जो अब नासूर बन गए हैं, कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी दर्द दे रहे हैं इसे बखूबी लक्षित करता है। कहानी भारत-पाक विभाजन के उस रक्तरंजित अध्याय से शुरू होती है , जहाँ लाहौर शहर में बसा एक सम्पन्न, खुशहाल हिन्दू परिवार रातों-रात न सिर्फ बेघर हो जाता है अपितु आर्थिक रूप से पूर्णतः तबाह हो चुकने के साथ ही अपने परिवार के सदस्यों की इज्जत एवं जीवन रक्षा हेतु भी संघर्षरत रहता है।  शिवानी जो पाठकों को अपने संग यादों के इस सफ़र पर लेकर चलती हैं उनके दादा-दादी , माता,पिता जो कभी लाहौर की संभ्रांत हस्ती थे , रातों-रात शरणार्थी बन जाते हैं तथा अपनी पुश्तैनी जायज़ाद , सं...

Ateet Ke Nirjhar -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : अतीत के निर्झर द्वारा: प्रकाश प्रियम विधा: कथेतर  वेरा प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 225                                                                                                              गद्य साहित्य की प्रमुख कथेतर विधाओं में एक है संस्मरण। इस प्रमुख विधा में अत्यंत महत्वपूर्ण सृजन हुआ है जो निश्चय ही भविष्य में मार्गदर्शक का कार्य करेगा। संस्मरण को बाज दफा आत्मकथा के समान मान लिया जाता है एवं कहीं कहीं गलत रूप में प्रयुक्त भी होता है किन्तु दोनों में भेद हैं, यथा जहां आत्मकथा के द्वारा पूरे जीवन का क्रमबद्ध इतिहास दर्शाया जाता है वहीं संस्मरण में जीवन की कुछ खास घटनाएँ अथवा विशिष्ट यादें ही लिपिबद...

Pratinidhi Kahaniyan -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

चित्र
  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : प्रतिनिधि कहानियाँ द्वारा: राजेन्द्र राजन विधा : कहानी समृद्ध पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2026 मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक : 224                                                                                          समीक्षाधीन पुस्तक, “प्रतिनिधि कहानियाँ” राजेन्द्र राजन की उन चुनिंदा कहानियों का संग्रह है जो विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई एवं बेहद पसंद की गईं। राजेन्द्र राजन एक ऐसी शक्सीयत, जिनका काम ही उनकी पहचान बन चुका है एवं उनका अलग से परिचय देना औपचारिकता भले ही हो, दरकार तो कदापि नहीं, फिर भी गर बात करें उनके साहित्यिक योगदान की तो उनके द्वारा सृजित अनेकों कहानी संग्रह , उपन्यास एवं संस्मरण तथा शोध ग्रंथों के संग , “हीरा मंडी” , जैसे बहुचर्चित उपन्यास एवं “प...