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Kagaaz-ki-Naav : By Rajendra-Rajan : Pustak-Samiksha : By Atulya-Khare

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    Pustak Samiksha: Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कागज़ की नाव विधा : उपन्यास द्वारा : राजेन्द्र राजन आकृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2026 मूल्य : 340.00 समीक्षा क्रमांक : 254                " काग़ज़ की नाव " ,  प्रख्यात कथाकार , साहित्यिक जगत की जानी पहचानी , नामचीन हस्ती राजेन्द्र राजन जी का यह नया उपन्यास सुधि पाठकों के लिए मरुस्थल में ओस की उस बूंद के समान है जिसने न जाने कितने प्यासे चातकों की प्यास बुझाई है। हर दृष्टि से उपयुक्त , सार गर्भित , अर्थ - पूर्ण , वास्तविकता के बेहद करीब प्रतीत होता कथानक है। कहानी , सुंदर भाव अभिव्यक्ति एवं शब्द चयन , अर्थ - पूर्ण वाक्यांश , सहज घटनाक्रम , दरकते दाम्पत्य संबंधों का संतान पर प्रभाव एवं एक उभरते हुए नाट्य कलाकार के जीवन के संघर्ष को खूबसूरती से उकेरती है एवं वास्तविकता के बेहद करीब या कहें की वास्तविक सी प्रतीत होती है। राजन जी की इस पुस्तक में एक रंगमंच के प्रतिभाशाली कलाकार की भावनाएं, उसके कठि...

Zinda Hoon Main By Praveen Banjara -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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      Pustak Samiksha: Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : जिंदा हूँ मैं द्वारा : प्रवीण ' बनजारा ' विधा : कहानी प्रथम संस्करण : 2026 New World Publication द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक : 252 पूर्व बैंकर प्रवीण ' बंजारा '  ​ ने बैंकिंग सेवा से संबद्द रहते हुए भी अपने साहित्य प्रेम वशीभूत साहित्य के प्रति समर्पण एवं लगाव बरकरार रखा । लंबे अरसे से उनकी कहानियाँ और कविताएँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है एवं वर्ष 2025 में हिंदी साहित्य द्वारा उनका कहानी संग्रह ' मोरपंख '   प्रकाशित किया गया जिसे पाठकों ने बेहद सराहा । वर्तमान में भी वे निरंतर साहित्य सेवा को समर्पित रहते हुए स्वतंत्र लेखन से जुड़े हुए हैं। आज उनके हालिया प्रकाशित कहानी संग्रह " जिंदा हूँ मैं " की समीक्षा .. प्रस्तुत कहानी संग्रह की पहली कहानी " पहले जैसा पीला " प्रथम दृष्ट्या एक रूपक समान प्रतीत होती है किन्तु कहानी अत्यंत गंभीर , मनोवैज्ञानिक एवं जीवन से जुड़े कई स्त...