Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : दशरथनंदन-दशानन गाथा द्वारा : एम.आई.राजस्वी विधा : पौराणिक गाथा फिंगर प्रिन्ट मीडिया द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2020 मूल्य : 250 समीक्षा क्रमांक : 247 भारतीय साहित्य में रामायण एक ऐसा अक्षय स्रोत है , जिसे जितनी बार पढ़ा जाए , वह हर बार एक नई प्रेरणा देता है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' इसी चिरंतन गाथा को पुनः जीवित करने का एक और विनम्र प्रयास है। इस पुस्तक में हमें वे सभी घटनाएँ मिलती हैं जिनसे हम सदियों से परिचित हैं , लेकिन लेखक की प्रस्तुति में वह प्रवाह और सहजता है जो पाठक को एक बार फिर से उस महायात्रा पर साथ ले जाने में सफल रहती है। " यूं भी " रामायण की कथा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' उन पाठकों के लिए एक सुंदर संकलन है जो मूल कथा के प्रवाह को बिना किसी विरूपण के एक पुस्तक में समेटे हुए देखना चाहते हैं। लेखक ने दशरथ के पुत्र राम और लंकापति दशानन के बीच के संघर्ष को उन्हीं पारंपरिक घटनाओं के माध्यम से पिरोया है , जो हम...