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Jai Hanuman Kesari Nandan -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : जय हनुमान केसरी नंदन द्वारा: एम . आई . राजस्वी Veteran पब्लिशिंग   हाउस  द्वारा प्रकाशित   प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 299 समीक्षा क्रमांक : 212                                                                          एम. आई. राजस्वी हिन्दी के पाठकों के बीच सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। पौराणिक एवं ऐतिहासिक विषयों पर उनकी कृतियाँ अनेकों शोधार्थीयों द्वारा, उनके लेखन हेतु गहन शोध एवं तथ्यों के दृष्टिगत बतौर संदर्भ   ली   जा रही हैं एवं अपनी सार्थकता एवं प्रामाणिकता साबित कर रही हैं। आज तलक उन्होंने 125 से अधिक पुस्तकें विभिन्न विषयों पर लिखी एवं यह तथ्य अचंभित करता है की उनमें से 70 से अधिक   पुस्तकों के विषय पौराणिक अथवा ऐतिहासिक हैं। यह आँकड़े प्रभावित करते हैं तथा उनके इस जज्बे एवं प्रत्येक विषय पर गहन शोध के अथक प्रयासों हेतु उन...

KayaKalp -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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  Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कायाकल्प द्वारा : एम. आई. राजस्वी विधा: उपन्यास Veteran  पब्लिशिंग हाउस   द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299 समीक्षा क्रमांक : 209                                             गुणात्मक एवं स्तरीय साहित्य की अभिलाषा रखने वाले सुधि पाठक , वरिष्ठ लेखक एवं  संपादक, राजस्वी जी के नाम से बखूबी परिचित हैं , बात करें यदि उनकी साहित्य जगत में उपस्थिति और साहित्य सेवा की तो कहना अतिशयोक्ति न होगी की उनका कार्य स्वमेव उनकी पहचान है। उनके प्रकाशित एवं संपादित हिन्दी साहित्य की फेहरिस्त लंबी है फिर भी “अश्वत्थामा का अभिशाप,” “रामायण,” “जय  हनुमान केसरीनंदन” इत्यादि का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उनके लेखन से सहज लक्षित होता है की वे अपने गहन अध्ययन, गहरी पौराणिक एवं ऐतिहासिक समझ एवं रचनाशीलता का प्रयोग ऐतिहासिक एवं पौराणिक विषयों पर उच्च कोटि के सारगर्भित साहित्य सृजन हेतु करते हैं। सामान्य भाषा का प्रयोग , विचार...

Shri Ramayana -- pustak samiksha : Atulya Khare

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Pustak samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक :  श्री रामायण द्वारा      : एम. आई. राजस्वी प्रकाशक: FINGERPRINT रामायण के रचयिता वाल्‍मीकि ने प्रथम अलंकृत काव्‍य लिखकर समस्‍त पश्चातवर्ती भारतीय कवियों के लिए आदर्श प्रस्‍तुत   किया था। वाल्मीकि रचित रामायण में राम की   कथा बहुत विस्‍तार से वर्णित है।   वाल्‍मीकि की दृष्टि   इतनी सूक्ष्म और कल्‍पना-शक्ति इतनी उर्वर है कि प्रत्येक दृश्‍य को उन्‍होंने सुन्दर विस्‍तार प्रदान किया है।   रामायण का विभाजन सात खण्डों में हुआ है यथा - बालकाण्‍ड , अयोध्‍याकाण्‍ड ,  अरण्‍यकाण्‍ड , किष्किन्धा कांड , सुन्दरकाण्‍ड , लंकाकाण्‍ड तथा उत्तरकाण्‍ड। रामायण काल की बात करें तो रामायण की रचना पाँचवी शताब्दी ई. पू.   में मानी जाती है जो महाभारत के पूर्व का घटना क्रम है एवं महाभारत में रामायण की पूरी कथा वर्णित है और   राम के जीवन से सम्‍बद्ध कुछ स्‍थलों को वहाँ तीर्थ के रूप में देखा गया है। रामायण का   संकेत जैन और बौद्ध ग्रन्‍थों से भी प्राप्‍त होता है। रामायण के केंद्र म...