Maykhana By Rajesh Chouhan
मयखाना विधा : गजल द्वारा : राजेश चौहान सम्पादन: एम . ए . समीर VETERAN PUBLISHING HOUSE द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 199 समीक्षा क्रमांक : 215 अरबी में सामान्य बोलचाल में शराब को खमर कहते हैं जो सूफी संदर्भ में मरीफ़त (ज्ञान) के साथ मिलकर रूहानी मस्ती को दर्शाता है,और साधक ईश्वर के प्रेम में लीन हो दुनिया से बेखबर हो जाता है। अर्थात दुनिया के मोह-माया से मुक्ति और ईश्वर में विलीन होना यह संदेश मुखतः इन गज़लों का उद्देश्य होता है। सूफी शायरी में शराब कोई भौतिक द्रव्य नहीं अपितु ईश्वर के प्रेम और ज्ञान का नशा है वहां साकी खुद ईश्वर है , और मयखाना वह स्थान है जहाँ आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है। प्रस्तुत गजल संग्रह ”मयखाना” वरिष्ठ गजलकार राजेश चौहान की चुनिंदा गज़लों का संग्रह है जिसे एम . ए . समीर जी के सम्पादन में VETERAN पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित किया गया है। यथा नाम से ही स्पष्ट है संग्रहीत गजलें शराब और मयखाने के परिवेश में ही रची गई हैं। वहीं सूफी शायरी से जुदा आम शायरी में, इश्क में मिली नाकामी , बेवफाई , तन्हाई और जमाने के गम ...