Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : विरहांतर विधा : उपन्यास द्वारा : रमेश खत्री दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2026 मूल्य : 450.00 समीक्षा क्रमांक : 253 वरिष्ट साहित्यकार प्रकाशक , लेखक एवं समाजसेवी रमेश खत्री जी का यह उपन्यास कई मायनों में विशिष्ट है। प्रस्तुत उपन्यास का कथानक बच्चे के गलत लालन पालन के दुष्प्रभाव दिखलाते हुए आधुनिक पारिवारिक विघटन , मानवीय कमजोरियों , स्वार्थ और अंततः अंतर्मन के परिवर्तन का एक जीवंत दस्तावेज प्रतीत होता है। कथानक एक ऐसी बिगड़ैल और जिद्दी लड़की के इर्द - गिर्द घूमता है , जिसे लाड़ - प्यार की अति ने कामचोर , फिजूल - खर्चीली और नकचढ़ी बना दिया। उसकी पसंद के लड़के से किया गया विवाह भी उसे प्रसन्न नहीं रख पाता , वहीं आर्थिक रूप से कमजोर ससुराल पक्ष का लालच कथानक का महत्वपूर्ण भाग है जो यूं तो कथानक को सीधे ही मोड़ नहीं देता किन्तु घटनाक्रम में सास द्वारा जमाई को बेटी के द्वारा भेजे गए पै...