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Zinda Hoon Main By Praveen Banjara -- Pustak samiksha : Atulya Khare

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      Pustak Samiksha: Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : जिंदा हूँ मैं द्वारा : प्रवीण ' बनजारा ' विधा : कहानी प्रथम संस्करण : 2026 New World Publication द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक : 252 पूर्व बैंकर प्रवीण ' बंजारा '  ​ ने बैंकिंग सेवा से संबद्द रहते हुए भी अपने साहित्य प्रेम वशीभूत साहित्य के प्रति समर्पण एवं लगाव बरकरार रखा । लंबे अरसे से उनकी कहानियाँ और कविताएँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है एवं वर्ष 2025 में हिंदी साहित्य द्वारा उनका कहानी संग्रह ' मोरपंख '   प्रकाशित किया गया जिसे पाठकों ने बेहद सराहा । वर्तमान में भी वे निरंतर साहित्य सेवा को समर्पित रहते हुए स्वतंत्र लेखन से जुड़े हुए हैं। आज उनके हालिया प्रकाशित कहानी संग्रह " जिंदा हूँ मैं " की समीक्षा .. प्रस्तुत कहानी संग्रह की पहली कहानी " पहले जैसा पीला " प्रथम दृष्ट्या एक रूपक समान प्रतीत होती है किन्तु कहानी अत्यंत गंभीर , मनोवैज्ञानिक एवं जीवन से जुड़े कई स्त...

साहित्य सफर के हमराही

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        साहित्य सफर के हमराही               

Sur : Neelima_Sharma -- Pustak_Samiksha : Atulya_Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : सुर द्वारा : नीलिमा शर्मा विधा : उपन्यास शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रकाशन वर्ष : 2026 मूल्य : 400.00 समीक्षा क्रमांक : 2 51  भावनात्मक एवं गंभीर विषय पर केंद्रित एक अत्यंत सशक्त संवेदनशील कथानक , जहां दास्ताँ या कहें जीवन गाथा है एक ऐसी बेटी की जिसे उसकी माँ ने सारा जीवन तिरस्कृत ही रखा एवं मात्र इसी लिए ठुकराया क्यूंकि वह एक लड़की थी , साथ ही कहानी उस माँ की भी है कि उसकी क्या मज़बूरियाँ थीं , क्यूँकर वह अपनी ही बेटी के प्रति ऐसी निष्ठुर बन गई। अत्यंत रोचक एवं वास्तविकता के बेहद करीब सृजित घटनाक्रम है जिसे लेखिका ने बहुत ही रोचक शैली में प्रस्तुत किया है , एवं उनके लेखन की यह विशिष्टता पुस्तक में अंत तक रोचकता बनाए रखती है वहीं पुस्तक का अंत भी अप्रत्याशित होते हुए अनुकरणीय , प्रगतिशील तथा विचारोत्तेजक है। घर - घर से जुड़े या फिर समग्रता में कहें तो जाति - उपजाति के भेद से परे सम्पूर्ण समाज के इस ज्वलंत विषय पर संकीर्...