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Dimag Walo Savdhan -- Pustak Samiksha : Atulya Khare Dharmpal Mahendra Jain

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : दिमाग वालो सावधान विधा : व्यंग्य द्वारा : धर्मपाल महेंद्र जैन किताबगंज   प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2020 मूल्य : 500.00 समीक्षा क्रमांक :  140 धर्मपाल महेंद्र जैन व्यंग्य लेखन में एक जाना पहचान नाम है। मूलतः मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाबुआ के निवासी, किन्तु वर्तमान में कनाडा में बस जाने के बावजूद वे अपने देश अपनी मिट्टी से जुड़े हुए है और यह उनकी रचनाओं में, उनके चिंतन में स्पष्ट नजर आता है। मूलतः व्यंग्य लेखन करते हुए वे काव्य सृजन के क्षेत्र में भी स्तरीय रचनाएं लिख कर साहित्य समृद्धि में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।   उनकी विभिन्न व्यंग्य रचनाओं का संग्रह है “दिमाग वालो   सावधान”। रचनाओं का जिक्र करें उसके पहले थोड़ी बात   इस विशिष्ट विधा की। व्यंग्य लेखन हिन्दी साहित्य में वह विशिष्ठ एवं दुष्कर शैली है जिसमें व्यंग्यकार समाज , राजनीति , या किसी अन्य विषय पर व्यंग्यात्मक एवं आलोचनात्मक दृष्टिकोण से लिखता है तथा चुभती हुई बातें कुछ इस तरह प्रस्तुत कर दी जाती हैं की “घाव ...

Adhlikhe Panne -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक :   अधलिखे पन्ने   द्वारा :धर्मपाल महेंद्र जैन विधा :कविता संग्रह   New World Publication द्वारा प्रकाशित   मूल्य 250.00 प्रथम संस्करण : 2024 समीक्षा क्रमांक :127 विगत 30 से भी अधिक वर्षों से कनाडा में जा बसे   धर्मपाल महेंद्र जैन जी मूलतः मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाबुआ से हैं एवं आज भी वे अपनी भाषा अपनी मिट्टी से किस कदर जुड़े हुए हैं ये उनकी कृति प्रस्तुत काव्य   संग्रह “ अधलिखे पन्ने” की विभिन्न रचनाओं के द्वारा स्पष्ट लक्षित है। प्रस्तुत काव्य संग्रह “ अधलिखे पन्ने ” उनका तीसरा काव्य संग्रह है, इसके पूर्व उनके   "कुछ सम कुछ विषम" और "इस समय तक"   काव्य संग्रह आ चुके हैं, किंतु फिर भी अभी उनके अंदर कितना कुछ घुमड़   रहा है जो बाहर आने को बेताब है उनके इस आत्मकथ्य से प्रकट होता है कि : कितना भी लिख लूँ कविता हमेशा ही बकाया रहती है एक ओर यह उनकी कविता को जी लेने की जिजीविषा को तो दर्शाता ही है साथ ही उनके मानस में घूमते हुए विचारों के विशाल   सागर का भी आ...