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DashrathNandan Dashanan Gatha -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : दशरथनंदन-दशानन गाथा द्वारा : एम.आई.राजस्वी विधा : पौराणिक गाथा फिंगर प्रिन्ट मीडिया द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2020 मूल्य : 250  समीक्षा क्रमांक : 247                 भारतीय साहित्य में रामायण एक ऐसा अक्षय स्रोत है , जिसे जितनी बार पढ़ा जाए , वह हर बार एक नई प्रेरणा देता है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' इसी चिरंतन गाथा को पुनः जीवित करने का एक और विनम्र प्रयास है। इस पुस्तक में हमें वे सभी घटनाएँ मिलती हैं जिनसे हम सदियों से परिचित हैं , लेकिन लेखक की प्रस्तुति में वह प्रवाह और सहजता है जो पाठक को एक बार फिर से उस महायात्रा पर साथ ले जाने में सफल रहती है। " यूं भी ​ " रामायण की कथा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। ' दशरथनंदन दशानन गाथा ' उन पाठकों के लिए एक सुंदर संकलन है जो मूल कथा के प्रवाह को बिना किसी विरूपण के एक पुस्तक में समेटे हुए देखना चाहते हैं। लेखक ने दशरथ के पुत्र राम और लंकापति दशानन के बीच के संघर्ष को उन्हीं पारंपरिक घटनाओं के माध्यम से पिरोया है , जो हम...

Syaah Hote Rang -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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    • Pustak Samiksha : Atulya Khare     • समीक्षित  पुस्तक : स्याह होते रंग     • द्वारा : डॉ. प्रदीप उपाध्याय     • विधा : लघुकथा     • लिटरेचर लेंड द्वारा प्रकाशित       • प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2026      • मूल्य : 461      • समीक्षा क्रमांक : 247                               ​वरिष्ठ साहित्यकार एवं अपने तीक्ष्ण व्यंग्य लेखों हेतु विशेष रूप से पहचाने जाने वाले डॉ. प्रदीप उपाध्याय का लघुकथा संग्रह "स्याह होते रंग" हालिया दौर में हिंदी लघुकथा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाता है। उनका यह लघुकथा संग्रह किसी साहित्यिक प्रयोग की महत्त्वाकांक्षा से नहीं लिखा गया है अपितु इसमें उन्होंने आज के जीवन की वास्तविकता के धरातल पर असहज कर देने वाली और बाज दफा तो चुभती हुई सच्चाइयों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है। यूं भी प्रतीत होता है की यह उनके प्रत्यक्ष घटित एवं स्व-अनुभूत वाकयों और प्राप्त तज...

Damyanti -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : दमयन्ती द्वारा : शिखा मनमोहन शर्मा दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम प्रकाशन : 2026 मूल्य : 250 समीक्षा क्रमांक : 246                     शिखा मनमोहन शर्मा द्वारा लिखित उपन्यासों " नीरा " एवं " अभी मैं जिंदा हूँ " की समीक्षा पूर्व में मेरे द्वारा की गई थी एवं उनके द्वारा रचित इस तीसरी पुस्तक को पढ़ने के पश्चात लेखिका की शैली के विषय में अब निःसंकोच कहा जा सकता है कि वे मात्र कथानक में रंग ही नहीं भरती अपितु पात्रों के भावों को जीती हैं उनके पात्रों के मनोभावों की शाब्दिक अभिव्यक्ति ही उनके द्वारा हमारे समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं एवं अपने कथानक के पात्रों के मनोभावों को सहज स्वाभाविक एवं पूर्ण वास्तविकता के संग व्यक्त करने में उन्हें महारथ हासिल हैं।                     प्रस्तुत पुस्तक " दमयंती ", प्रसिद्द नल दमयंती की कहानी है जो युगों युगों से कही सुनी जाती रही है , तथा विलक्षण आत्मिक प्रेम के लिए स...