KAHE KE ANNDATA -- PUSTAK SAMIKSHA :ATULYA KHARE
Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : काहे के अन्नदाता विधा : उपन्यास द्वारा: मधुर कुलश्रेष्ठ विचार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2025 मूल्य : 225.00 समीक्षा क्रमांक : 242 जमीनी हकीकत और वास्तविकताओं से मुंह फेरकर, बड़े बड़े मंचों से हम जिसे अत्यधिक मान-सम्मान का प्रदर्शन करते हुए “अन्नदाता” कहते हैं, वास्तव में उसकी ज़िंदगी में झांक कर देखें तो असल जिंदगी में उस निरीह प्राणी की वास्तविक हालत किसी 'बंधुआ मजदूर' से भी बद्तर हो गई है। मात्र वोट की राजनीति हेतु कागजों और नारों में ही वह देश का भाग्यविधाता है, हमारा अन्नदाता है लेकिन हकीकत में वह ही है जो जमीन पर वह मौसम, कर्ज, व्यवस्था और समाज की मार झेलने वाला सबसे लाचार इंसान और इन सब के खिलाफ जंग लड़ता हुआ अकेला योद्धा बन चुका है। हम और आप चाहे दिल को लाख वास्तविकताओं एवं हकीकतों से दूर देखने हेतु विवश कर दें , सब कुदरत का खेल और हमारे हाथ में क्या ही है कह कर व्यवस्था का दोष बताते हुए अपना दामन पाक साफ रखने की कितनी भी कोशिश क्यूँ न कर ...