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ATEET KE NIRJHAR BY PRAKASH PRIYAM

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अतीत के निर्झर द्वारा: प्रकाश प्रियम विधा: कथेतर   वेरा प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 225                                                                                                              गद्य साहित्य की प्रमुख कथेतर विधाओं में एक है संस्मरण। इस प्रमुख विधा में अत्यंत महत्वपूर्ण सृजन हुआ है जो निश्चय ही भविष्य में मार्गदर्शक का कार्य करेगा। संस्मरण को बाज दफा आत्मकथा के समान मान लिया जाता है एवं कहीं कहीं गलत रूप में प्रयुक्त भी होता है किन्तु दोनों में भेद हैं, यथा जहां आत्मकथा के द्वारा पूरे जीवन का क्रमबद्ध इतिहास दर्शाया जाता है वहीं संस्मरण में जीवन की कुछ खास घटनाएँ अथवा विशिष्ट यादें ही लिपिबद्द होती हैं। आत्मकथा में “मैं” ही महत...

Pratinidhi Kahaniyan By Rajendra Rajan

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  प्रतिनिधि कहानियाँ द्वारा: राजेन्द्र राजन विधा : कहानी समृद्ध पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2026 मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक : 224                                                                                          समीक्षाधीन पुस्तक, “प्रतिनिधि कहानियाँ” राजेन्द्र राजन की उन चुनिंदा कहानियों का संग्रह है जो विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई एवं बेहद पसंद की गईं। राजेन्द्र राजन एक ऐसी शक्सीयत, जिनका काम ही उनकी पहचान बन चुका है एवं उनका अलग से परिचय देना औपचारिकता भले ही हो, दरकार तो कदापि नहीं, फिर भी गर बात करें उनके साहित्यिक योगदान की तो उनके द्वारा सृजित अनेकों कहानी संग्रह , उपन्यास एवं संस्मरण तथा शोध ग्रंथों के संग , “हीरा मंडी” , जैसे बहुचर्चित उपन्यास एवं “पापा आर यू ओ के” जैसे कहानी संग्रह तथा Amazon...

Yogi Kathnamrat

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  योगी कथनामृत द्वारा: श्री श्री परमहंस योगानन्द संकलन एवं संपादन : एम. आई. राजस्वी VETERAN PUBLISHING HOUSE द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2025 मूल्य : 299.00 पुस्तक प्रस्तुति क्रमांक: 223   " संसार को यह मत बताओ कि तुम कितने अच्छे हो ; बल्कि यह कर के दिखाओ कि तुम कितने अच्छे हो।"   “शिक्षा केवल बौद्धिक नहीं होनी चाहिए बल्कि शरीर , और मन के समग्र विकास पर केंद्रित होनी चाहिए”।   आज से शताब्दी पूर्व ऐसे प्रगतिशील विचारों के संग 1917 में योगदा सत्संग विद्यालय की स्थापना करने वाले और “एक योगी की आत्मकथा” जैसी महान प्रेरणादायी पुस्तक के रचयिता, महान योगी परमहंस योगानन्द के द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण प्रवचनों का संकलन है प्रस्तुत पुस्तक “योगी कथनामृत” , जिसे इस रूप में प्रस्तुत करने में वरिष्ठ साहित्यकार, संकलनकर्ता तथा संपादक एम. आई. राजस्वी जी, प्रकाशक VETERAN PUBLISHING HOUSE तथा VPH के निदेशक समीर जी के अथक प्रयास सराहनीय हैं। यह पुस्तक मात्र पवित्र वचनों का शाब्दिक संग्रह नहीं है , अपितु यह तो एक दिव्य आमंत्रण है उस भव्य प्रवेश द्वार से प्रव...

Sanshaynivritti Aatmgyane Geetopdesh By Seema Saxena Varnika

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  “संशयनिवृत्ति”: आत्मज्ञाने गीतोपदेश द्वारा : सीमा सक्सेना “वर्णिका” BOOK RIVERS द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : वर्ष 2024 मूल्य : 199.00 समीक्षा क्रमांक: 222              अनंतकाल पूर्व रचित महान ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता, मनोविज्ञान, दर्शन एवं आध्यात्म का अद्भुत मेल है जिसकी शिक्षाएं वर्तमान युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी की आदिकाल में। गीता के दोहों की क्लिष्टता एवं आम जन को संस्कृत का सीमित ज्ञान उन्हें आम जन मानस के बीच वैसा प्रचलित एवं लोकप्रिय नहीं कर पाई जैसे की रामचरितमानस की चौपाइयाँ। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य ही मनुष्य के मन में व्याप्त संशयों को दूर कर मन के भटकाव को शांत कर उसे ज्ञान के मार्ग पर प्रशस्त करना है, उस दृष्टि से सीमा सक्सेना ' वर्णिका ' द्वारा रचित पुस्तक “संशयनिवृत्ति”: आत्मज्ञाने गीतोपदेश (हिन्दी दोहा भावानुवाद) ' का शीर्षक अपनी तार्किकता प्रमाणित करता है एवं पुस्तक के भाव हेतु पूर्णतः युक्तियुक्त है।   ख्यातिलब्ध कवियत्री सीमा सक्सेना “वर्णिका” ने काव्य विधा में वह महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कि...

Thakur Darwaza By Sumati Saxena Lal

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  ठाकुर दरवाज़ा द्वारा : सुमति सक्सेना लाल विधा : उपन्यास अमन प्रकाशन, कानपुर द्वारा प्रकाशित प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2018 मूल्य : 225.00 समीक्षा क्रमांक : 221 जब कभी भी हिंदी साहित्यि को विशिष्ठ योगदान देने वाले रचनाकारों का ज़िक्र होता है , तो उन में अत्यंत वरिष्ट लेखिका सुमति सक्सेना लाल का नाम विशेष आदर, सम्मान के साथ लिया जाता है। गंभीर , सामान्य - तौर पर पारिवारिक अथवा अपने बेहद करीबी परिवेश से चुने गए विषय को कथानक का आधार बना कर अत्यंत सुरुचिपूर्ण , गरिमामयी , स्वस्थ रचनाएँ गढ़ने में वरिष्ट लेखिका सुमति सक्सेना लाल का कोई सानी दूर दूर तक दृष्टिगोचर नहीं होता। उनकी विभिन्न रचनाएँ तत्कालीन समस्त प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं , साथ ही आपने उसी दौरान साहित्य को कई अनमोल संग्रहणीय रचनाएँ दे कर कृतार्थ किया। यूं तो उनके द्वारा सृजित विभिन्न उपन्यास एवं कहानी संग्रह आदि हैं किन्तु उनमें से चंद उल्लेखनीय हैं यथा “ अलग अलग दीवारें ”, “  फिर...और फिर “, ”  दूसरी शुरुआत ”,”  होने से न होने तक  ” “ वे लोग “ आदि। उनकी कृतियां सदैव ही काफी स...