संदेश

Books लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

KayaKalp By M.I.Rajsve

चित्र
  कायाकल्प द्वारा : एम. आई. राजस्वी विधा: उपन्यास Veteran  पब्लिशिंग हाउस     द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299 समीक्षा क्रमांक : 209                                             गुणात्मक एवं स्तरीय साहित्य की अभिलाषा रखने वाले सुधि पाठक , वरिष्ठ लेखक एवं  संपादक, राजस्वी जी के नाम से बखूबी परिचित हैं , बात करें यदि उनकी साहित्य जगत में उपस्थिति और साहित्य सेवा की तो कहना अतिशयोक्ति न होगी की उनका कार्य स्वमेव उनकी पहचान है। उनके प्रकाशित एवं संपादित हिन्दी साहित्य की फेहरिस्त लंबी है फिर भी “अश्वत्थामा का अभिशाप,” “रामायण,” “जय  हनुमान केसरीनंदन” इत्यादि का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उनके लेखन से सहज लक्षित होता है की वे अपने गहन अध्ययन, गहरी पौराणिक एवं ऐतिहासिक समझ एवं रचनाशीलता का प्रयोग ऐतिहासिक एवं पौराणिक विषयों पर उच्च कोटि के सारगर्भित साहित्य सृजन हेतु करते हैं। सामान्य भाषा का प्रयोग , विचारों में स्पष्टता और व्यर्थ के विष...

Doob By Hariyash Rai

चित्र
  दूब विधा : उपन्यास द्वारा : हरियश राय सेतु प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 325.00 समीक्षा क्रमांक :   208 वरिष्ठ साहित्यकार, जिन्हें ज्वलंत एवं   विशिष्ठ विषयों पर गंभीर, तथ्यपरक, प्रभावी एवं सूक्ष्म विश्लेषण तथा गहन अध्ययनपरक लेखन हेतु जाना जाता है, प्रचार प्रसार से दूर एक ऐसी शख्सियत, जो   शांत रहते हुए विनम्रता से निरंतर साहित्य सृजन कर्म में तल्लीन हैं , ऐसे कथाकार हरियश राय जी द्वारा सृजित यह   उपन्यास “दूब”   अपने नाम से ही आकृष्ट करता है (आवरण पृष्ट भी आकर्षक, किन्तु लीक से हटकर है जो विषय के संग बहुत सहज मेल करता है)।   शीर्षक “दूब” अपनी स्वाभाविक एवं प्राकृतिक नजाकत के साथ जहां पर्यावरण की सुरक्षा की आवश्यकता पर प्रमुखता से ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास करता है, वहीं यह संदेश भी देने में पूर्णतः सक्षम एवं प्रभावी सिद्द होता है कि वर्तमान विकास एक बड़ी हद तक पर्यावरण का व्यतक्रमानुपाती है। दूब, जहां एक ओर विनम्रता की मिसाल है वहीं यह संदेश भी, कि कठिन से कठिन तूफान भी दूब के अस्तित्व को नहीं मिटा सकते। दूब प्रतीक है पवित्रता का , द...

Utre Pairahan Khamoshi Ke By Kishwar Anjum

चित्र
  “ उतरे पैरहन खामोशी के ”  विधा : कविता द्वारा: किश्वर अंजुम   पाखी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 240.00 समीक्षा क्रमांक : 207                               “ उतरे पैरहन खामोशी के ”, “किश्वर अंजुम” , द्वारा रचित भावपूर्ण कविताओं का सुंदर संग्रह है , “किश्वर अंजुम” वह नाम है जो आज साहित्य से ताल्लुक रखने वालों के बीच खूब पहचाना  जाता है और किसी परिचय का मोहताज तो कतई नहीं है उनकी कृति स्वयं उनका परिचय हैं ।       पूर्व में जहां उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपनी बेहतरीन कृतियों यथा   “परछाइयाँ अँधेरों की” ,” त्रिवेणी”, “प्रतीक्षा में प्रेम”, आदि   के द्वारा समृद्द किया है उसी शृंखला में अब उनका नवीनतम काव्य संग्रह   “उतरे पैरहन खामोशी के” कुछ ऐसी भाव प्रधान नज़्म लेकर आया है जो पाठक को अपने मन के अंदर उस ढंकें हुए कोने में   झाँकने को विवश करता है जिस से वह या तो बचता रहा है या फिर कभी उस पर गौर ही नहीं किया है और इस प्रक्रिया में जीवन के उन अनछ...

Gajshardool By Anish Singh Kharsan

चित्र
  गजशार्दूल विधा : ऐतिहासिक गाथा, उपन्यास   द्वारा : अनीश सिंह खरसन   सम्पादन: M.I. राजस्वी VETERAN Publishing House ( VPH ) द्वारा प्रकाशित प्रकाशन वर्ष :   2025 मूल्य : 249 समीक्षा क्रमांक : 206 युवा लेखक एवं पेशी से इंजीनियर, अनीश सिंह खरसन द्वारा सृजित कृति “गजशार्दूल” वरिष्ठ साहित्यकार एम. आई. राजस्वी के सम्पादन में वेट्रन प्रकाशन द्वारा प्रस्तुत की गई है,   के विषय में असमंजस में हूँ की आपसे इसका परिचय शोध ग्रंथ के रूप में करवाऊँ अथवा ऐतिहासिक पात्रों एवं भौगोलिकता को   पुनर्जीवित करते हुए एक अनूठे उपन्यास के रूप में जिसके लेखक, कठिन श्रमसाध्य शोध्यके द्वारा   तत्कालीन भारतवर्ष की शासन व्यवस्था, एवं अन्य सामाजिक पहलुओं पर अत्यंत सूक्ष्म विश्लेषण सहित विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने में सफल हुए हैं।        गजशार्दूल, कल्चुरी नरेश महाराज जाजल्यदेव   एवं नागकुल के राजा   सोमेश्वरदेव की युद्ध विषयक रणनीतियों , कठोर एवं क्रूर दंड व्यवस्था, खुफिया अभियानों, सामाजिक सद्भावना , पारस्परिक विश्वास की कमी एवं ...

Immigrant By Dharmpal Mahendra jain

चित्र
  इमिग्रेंट विधा : उपन्यास द्वारा : धर्मपाल महेन्द्र जैन प्रकाशक : आईसेक्ट पब्लिकेशन , भोपाल मूल्य : 500/- रुपये समीक्षा क्रमांक : 205 धर्मपाल महेंद्र जैन एक ऐसा व्यक्तित्व जो वतन से दूर रहकर कभी अपनी मिट्टी से दूर न हो सका, और वहाँ रहकर भी सतत् मातृभाषा साहित्य को समृद्ध बनाने हेतु प्रयत्नशील रहते हुए नियमित लेखन कर्म में व्यस्त हैं।   महेंद्र जी को यूं तो एक प्रख्यात व्यंग्यकार के रूप में अधिक पहचान जाता है किन्तु मेरी दृष्टि में उनके व्यंग्य   मात्र हास्य हेतु सृजित व्यंग्य एक रचना न होकर व्यवस्था, संरचना एवं आम जीवन में व्याप्त कुरीतियों एवं   घटते   संस्कारिक मूल्यों पर अत्यंत गंभीर व तीक्ष्ण टिप्पणी होते हैं जिन्हें नश्तर कहना अधिक उपयुक्त होगा क्यूंकि वे कहीं न कहीं अपने इन्हीं तीक्ष्ण व्यंग्य रूपी नश्तरों के द्वारा समाज एवं व्यवस्था में व्याप्त   बुराइयों का इलाज करने का एक प्रयास तो अवश्य ही करते हैं। उनके लेखन को हमने उनके प्रकाशित 8 व्यंग्य कथा संग्रहों ( साहित्य की गुमटी, सर क्यों दांत फाड़ रहा है, गणतंत्र के तोते आदि ), 4 कविता सं...