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Manrangana by Nanda Pandey

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  मनरंगना द्वारा : नंदा पाण्डेय विधा : काव्य श्वेतवर्णा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संस्करण- प्रथम     मूल्य :299 समीक्षा क्रमांक : 138 शीर्षक कुछ अलग सा है न , बरबस ही अपनी ओर बुलाता हुआ - “मनरंगना”। नंदा पाण्डेय जी का नवीनतम काव्य संग्रह इस बेहद आकर्षक शीर्षक एवं प्रस्तुति के साथ लुभाता है एवं बरबस ही अपने नाम एवं आकार से अपनी ओर आकृष्ट करता है । सहज ही प्रश्न कौंधता है कौन है   मनरंगना , क्या वह छलिया है या वह मनमोहन है जिस के प्रेम में दीवानी हुई     है नायिका और भुला बैठी है स्वयम को   उस छलिया के प्रेम रस में । जहां स्वयम को प्रियतम के प्रेम में सरोबार कर लिया आकंठ डूब गए ,स्वयम को प्रिय में इस कदर समा दिया की अब तो सब कुछ त्याग कर भी बहुत कुछ पा लेने का भाव आ   गया   तन मन सब ही प्रेम मय हो गया , कहाँ अलग हो प्रिय से , तुम तो हो ही नहीं यही तो प्रेम की पराकाष्ठा है भुला बैठे हो स्वयम को उस के प्रेम में और वही तो है मनरंगना . और मनरंगना भी कैसा, साँवरे मोहन जैसा जहां मीरा सब कुछ भुला बैठी, खुद को भूल गए अब तो जो है बस वही प्रिय...

kuchh To Bacha Rahe By RamDulari Sharma

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  कुछ तो बचा   रहे - कविता संग्रह   विधा : कविता द्वारा : रामदुलारी  शर्मा  ज्ञानमुद्रा पब्लिकेशन भोपाल द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण :2023 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 136 रामदुलारी जी के विषय में अधिक तो नही किंतु हाँ ,  उनकी पुस्तक की चंद कविताएं पढ़ कर व  पूर्व में भी विभिन्न पटलों  पर उनकी कृतियाँ देखी एवं उनसे इतना तो अवश्य ही कह सकता हूँ की सुलझी हुई एवं रिश्तों तथा मानवीय मूल्यों को तरजीह देने वाली शख्सियत हैं। अभी हाल ही उनकी पुस्तक “कुछ तो बचा   रहे” प्राप्त हुई किंतु विस्तार से   पढ़ा जाना अभी शेष है। किन्तु जितनी भी कविताएं पढ़ी बहुत सीधी सरल सी बातें है कहीं किसी विशिष्ट शैली का प्रभाव अथवा   रचना को अतिरिक्त सौंदर्य प्रदान करने हेतु चुनिंदा शब्दों को समायोजित करने का प्रयास नहीं दिख रहा न ही उन्होंने वाक्यांशों को बेवजह क्लिष्ट बनाने के लिए अलंकारिक शब्द ही   डाले हैं। तबियत थोड़ी नासाज है जिसके चलते अभी पुस्तक पूरी नहीं पढ़ पाया हूं। कुछ ही कविताएं पढ़ीं जो वाकई अच्छी बन पड़ी है क्योंकि दिल की बा...

Bharat Ka Swadheenta Sangram Aur Krantikari By Shailendra Chouhan

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  भारत का स्वाधीनता संग्राम   और क्रांतिकारी द्वारा शैलेन्द्र चौहान विधा : शोधग्रंथ प्रथम संस्करण : 2023 मंथन प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित  मूल्य : 400 समीक्षा क्रमांक : 135     विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर अपनी तीखी टिप्पणियों के संग संग सारगर्भित,तीक्ष्ण एवं चोट करती हुई कविताओं हेतु साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान रखने वाले वरिष्ट साहित्यकार एवं विश्लेषक शैलेन्द्र जी की प्रस्तुत शोध परक पुस्तक भारतीय स्वयंत्रता संग्राम से परिचय करवाती हुई ऐसे तमाम क्रांतिकारी चेहरों को प्रस्तुत करती है जो अपने बहुमूल्य योगदान के बावजूद गुमनामी में खोए भले ही न हों किन्तु धूमिल अवश्य रहे। साथ ही वे उन महान क्रांतिकारियों का उल्लेख करने से विरत नहीं रहे हैं जिनके विषय में अमूमन देश का बच्चा बच्चा जनता है यथा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई , राजगुरु सुखदेव इत्यादि।              भारतीय स्वाधीनता संग्राम भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।   इस संग्राम के दौरान , भारतीय जनता ने अंग्रेजों के विरुद्ध अद्वितीय साहसिक संघ...