Shri Ramayana -- pustak samiksha : Atulya Khare
Pustak samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : श्री रामायण द्वारा : एम. आई. राजस्वी प्रकाशक: FINGERPRINT रामायण के रचयिता वाल्मीकि ने प्रथम अलंकृत काव्य लिखकर समस्त पश्चातवर्ती भारतीय कवियों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया था। वाल्मीकि रचित रामायण में राम की कथा बहुत विस्तार से वर्णित है। वाल्मीकि की दृष्टि इतनी सूक्ष्म और कल्पना-शक्ति इतनी उर्वर है कि प्रत्येक दृश्य को उन्होंने सुन्दर विस्तार प्रदान किया है। रामायण का विभाजन सात खण्डों में हुआ है यथा - बालकाण्ड , अयोध्याकाण्ड , अरण्यकाण्ड , किष्किन्धा कांड , सुन्दरकाण्ड , लंकाकाण्ड तथा उत्तरकाण्ड। रामायण काल की बात करें तो रामायण की रचना पाँचवी शताब्दी ई. पू. में मानी जाती है जो महाभारत के पूर्व का घटना क्रम है एवं महाभारत में रामायण की पूरी कथा वर्णित है और राम के जीवन से सम्बद्ध कुछ स्थलों को वहाँ तीर्थ के रूप में देखा गया है। रामायण का संकेत जैन और बौद्ध ग्रन्थों से भी प्राप्त होता है। रामायण के केंद्र म...