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Shri Ramayana -- pustak samiksha : Atulya Khare

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Pustak samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक :  श्री रामायण द्वारा      : एम. आई. राजस्वी प्रकाशक: FINGERPRINT रामायण के रचयिता वाल्‍मीकि ने प्रथम अलंकृत काव्‍य लिखकर समस्‍त पश्चातवर्ती भारतीय कवियों के लिए आदर्श प्रस्‍तुत   किया था। वाल्मीकि रचित रामायण में राम की   कथा बहुत विस्‍तार से वर्णित है।   वाल्‍मीकि की दृष्टि   इतनी सूक्ष्म और कल्‍पना-शक्ति इतनी उर्वर है कि प्रत्येक दृश्‍य को उन्‍होंने सुन्दर विस्‍तार प्रदान किया है।   रामायण का विभाजन सात खण्डों में हुआ है यथा - बालकाण्‍ड , अयोध्‍याकाण्‍ड ,  अरण्‍यकाण्‍ड , किष्किन्धा कांड , सुन्दरकाण्‍ड , लंकाकाण्‍ड तथा उत्तरकाण्‍ड। रामायण काल की बात करें तो रामायण की रचना पाँचवी शताब्दी ई. पू.   में मानी जाती है जो महाभारत के पूर्व का घटना क्रम है एवं महाभारत में रामायण की पूरी कथा वर्णित है और   राम के जीवन से सम्‍बद्ध कुछ स्‍थलों को वहाँ तीर्थ के रूप में देखा गया है। रामायण का   संकेत जैन और बौद्ध ग्रन्‍थों से भी प्राप्‍त होता है। रामायण के केंद्र म...

Moongate -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : मून गेट विधा : कहानी    द्वारा: पूनम अहमद  प्रकाशक : साहित्य विमर्श प्रकाशन प्रथम संस्करण     सामाजिक ताने बाने के बीच बेबुनियादी मान्यताओं, पुरुष प्रधान समाज द्वारा बनायीं गयी दमनकारी नीतियों एवं गुलामी या कहें की   दासता के   बन्धनों की गिरफ्त में , घर की चार दीवारी में कैद रखने वाली सदियों पुरानी   सोची समझी साजिशों से जकड़ी नारी को आज़ाद करती, उसे ज़माने की परवाह किये बगैर अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेते हुए दिखलाती , ये चारों कहानियां जो पूनम जी की नारी स्वातंत्र्य, उसकी बेड़ियों को तोड़ने की यात्रा , बंधनों एवं वर्जनाओं से जूझने एवं उन्हें परास्त करने की हर संभव कोशिश दिखलाती श्रेष्ट रचना हैं ।   जो अनछुए विषय उन्होंने इन कहानियों के नारी पात्रों के माध्यम से उठाये   हैं , उन्हें जिस तरह कुंठित मान्यताओं एवं वर्जनाओं से बाहर   आते दिखलाया है , निश्चय ही कुछ रूढ़िवादियों को असहज करेगा एवं अन्य जन हेतु एक नयी सोच को विकसित करने का विषय प्रदान करता है।   प्र...

Koyale Ki Lakeer -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare   समीक्षित पुस्तक : कोयले की लकीर   द्वारा       : पूनम अहमद विधा : कहानी  बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित   मूल्य : 190 /- रूपये प्रथम संस्करण : अप्रैल 2022   पूनम अहमद अपनी सहज सरल भाषा शैली एवं आम जन जीवन के बीच से लिए गए विषयों पर लिखने हेतु बखूबी जानी जाती हैं। इसके पूर्व मेरे द्वारा उनकी पुस्तक “ मूनगेट” की समीक्षा की गयी थी जिसकी चारों कहानियों में नारी विमर्श को प्रमुखता से देखा गया था । उनकी प्रस्तुत पुस्तक “कोयले की लकीर” भी कहानी संग्रह है जिसमें विभिन्न विषयों पर 18 कहानियां हैं जो न तो बहुत बड़ी हैं न ही छोटी एवं अधिकंश में, स्त्री विमर्श प्रमुखता से देखने को मिलता है . पुस्तक के विषय में यदि संक्षेप में कहा जाये तो सभी कहानियां अत्यंत रोचक हैं सरल प्रवाह में किसी भी प्रकार की क्लिष्टता से दूरी बनाये रखते हुए मनोरंजक तरीके से कही गयीं हैं , विषय भी ऐसे हैं कि पाठक कहीं न कहीं उस से जुड़ ही जाता है और कहानी उसे अंत तक बाँध कर रखती हैं , हाँ   अमूमन प्रत्येक कहानी के अंत ...