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Paati chacha By Sanjiv Kumar Gangvar

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  पाती चाचा विधा : कहानी द्वारा :   संजीव कुमार गंगवार गरुड़ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2024 मूल्य: 299.00 समीक्षा क्रमांक : 141                                                                              25 वर्षों से निरंतर साहित्य की प्रत्येक विधा को अपने सृजन से सवारते हुए संजीव जी ने अब “पाती चाचा” के रूप में अपना प्रथम कहानी संग्रह प्रस्तुत किया है। अब तक उनकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें   उपन्यास , कविता , गजल , सेल्फ इंप्रूवमेंट , बाल साहित्य , नॉन फिक्शन , मर्डर मिस्ट्री , और कहानी संग्रह शामिल हैं एवं उन की इन   प्रस्तुतियों के द्वारा जहां एक ओर उनकी बहुमुखी प्रतिभा और समस्त विधाओं पर समान नियंत्रण नजर आता है वहीं कहीं न कहीं यह लेखक के अंतर्मन की असंतुष्टि, व्यक्ति , व्यवस्था एवं समाज से अपेक्षाएं एवं कहीं न कहीं व्यवस्था तथा सत...

Kahaniyon Ka Karwan By Ram Pal Shrivastav

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कहानियों का कारवां द्वारा :  रामपाल श्रीवास्तव   विधा : कहानी संग्रह  समदर्शी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण वर्ष : 2024 मूल्य : 200.00                                                             रामपाल श्रीवास्तव जी की विभिन्न साहित्यिक कृतियों की समीक्षा के मार्फत  पहले भी आपका परिचय उनके कृतित्व से करवाया है एवम यह निर्विवादित ही है की उर्दू भाषा का वृहद  ज्ञान , एक आती समृद्ध प्राचीन एवं बहुत सुंदर भाषा के अमूमन प्रत्येक पहलू पर उनकी पकड़ निश्चय ही उनकी उर्दू भाषा की तालीम के साथ साथ उर्दू भाषा एवं उर्दू साहित्य में उनकी रुचि का ही परिणाम है । समय समय पर अपनी रचनाओं   में उर्दू का प्रयोग उन्हें सामान्य से तनिक अलग खड़ा करता है ।   हिन्दी साहित्य में भी हिन्दी भाषा की तरह ही लचीलापन देखने को मिलता है यथा हिन्दी भाषा अन्य भाषाओं के शब्दों को स्वीकार कर समाहित कर लेतीं है ठीक उसी प्र...

Manrangana by Nanda Pandey

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  मनरंगना द्वारा : नंदा पाण्डेय विधा : काव्य श्वेतवर्णा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संस्करण- प्रथम     मूल्य :299 समीक्षा क्रमांक : 138 शीर्षक कुछ अलग सा है न , बरबस ही अपनी ओर बुलाता हुआ - “मनरंगना”। नंदा पाण्डेय जी का नवीनतम काव्य संग्रह इस बेहद आकर्षक शीर्षक एवं प्रस्तुति के साथ लुभाता है एवं बरबस ही अपने नाम एवं आकार से अपनी ओर आकृष्ट करता है । सहज ही प्रश्न कौंधता है कौन है   मनरंगना , क्या वह छलिया है या वह मनमोहन है जिस के प्रेम में दीवानी हुई     है नायिका और भुला बैठी है स्वयम को   उस छलिया के प्रेम रस में । जहां स्वयम को प्रियतम के प्रेम में सरोबार कर लिया आकंठ डूब गए ,स्वयम को प्रिय में इस कदर समा दिया की अब तो सब कुछ त्याग कर भी बहुत कुछ पा लेने का भाव आ   गया   तन मन सब ही प्रेम मय हो गया , कहाँ अलग हो प्रिय से , तुम तो हो ही नहीं यही तो प्रेम की पराकाष्ठा है भुला बैठे हो स्वयम को उस के प्रेम में और वही तो है मनरंगना . और मनरंगना भी कैसा, साँवरे मोहन जैसा जहां मीरा सब कुछ भुला बैठी, खुद को भूल गए अब तो जो है बस वही प्रिय...

kuchh To Bacha Rahe By RamDulari Sharma

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  कुछ तो बचा   रहे - कविता संग्रह   विधा : कविता द्वारा : रामदुलारी  शर्मा  ज्ञानमुद्रा पब्लिकेशन भोपाल द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण :2023 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 136 रामदुलारी जी के विषय में अधिक तो नही किंतु हाँ ,  उनकी पुस्तक की चंद कविताएं पढ़ कर व  पूर्व में भी विभिन्न पटलों  पर उनकी कृतियाँ देखी एवं उनसे इतना तो अवश्य ही कह सकता हूँ की सुलझी हुई एवं रिश्तों तथा मानवीय मूल्यों को तरजीह देने वाली शख्सियत हैं। अभी हाल ही उनकी पुस्तक “कुछ तो बचा   रहे” प्राप्त हुई किंतु विस्तार से   पढ़ा जाना अभी शेष है। किन्तु जितनी भी कविताएं पढ़ी बहुत सीधी सरल सी बातें है कहीं किसी विशिष्ट शैली का प्रभाव अथवा   रचना को अतिरिक्त सौंदर्य प्रदान करने हेतु चुनिंदा शब्दों को समायोजित करने का प्रयास नहीं दिख रहा न ही उन्होंने वाक्यांशों को बेवजह क्लिष्ट बनाने के लिए अलंकारिक शब्द ही   डाले हैं। तबियत थोड़ी नासाज है जिसके चलते अभी पुस्तक पूरी नहीं पढ़ पाया हूं। कुछ ही कविताएं पढ़ीं जो वाकई अच्छी बन पड़ी है क्योंकि दिल की बा...