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Heti By Sinwali

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  हेति   सुकन्या : अकथ कथा द्वारा   : सिनीवाली रुद्रादित्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2023 मूल्य: 300.00 पुस्तक समीक्षा क्रमांक 86  “हेति”   सुकन्या : अकथ कथा, पौराणिक पृष्टभूमि में , स्त्री विमर्श आधारित   उपन्यास है जो कि   सिनीवाली जी का   प्रथम प्रकाशित उपन्यास भी है।   इससे पूर्व सिनीवाली जी के कहानी-संग्रह "गुलाबी नदी की मछलियाँ" जो कि गांव की पृष्ठ भूमि पर केंद्रित एक कथा संग्रह है एवं “हंस अकेला रोया” ,   को   भी सुधि पाठकों का उत्तम प्रतिसाद प्राप्त हुआ था।     सिनीवाली जी   दोनों   कहानी -संग्रह एवं अन्य व्यापक साहित्यिक गतिविधियों के चलते बखूबी जानी जाती हैं। प्रस्तुत उपन्यास में स्त्री विमर्श के विभिन्न   आयामों को लेखिका ने अत्यंत गंभीर विचारण के पश्चात प्रस्तुत   किया है। पौराणिकता संबंधित विषय, एवं विषय पर केंद्रित गहन शोध के दृष्टिगत दुरूह विषय की श्रेणी में आते हैं एवं इस विषय को चुनकर के   अपने प्रथम उपन्यास की विषयवस्तु बनाना निश्चय ही उनकी अपने लेखन के ...

Pyarana Zindagi Ka By Kumar Vivek

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  प्याराना ज़िन्दगी का द्वारा : कुमार विवेक साहित्य संचय द्वारा प्रकाशित अमूमन हर शख्स को जिंदगी में एक बार तो प्यार का खूबसूरत एहसास ज़रूर होता है, अगर बहुत ही सामान्य रूप में देखें तो पहला प्यार किशोर अवस्था से  युवावस्था की तरफ बढ़ती बाली उम्र  से जुड़ी हुयी एक बड़ी ही सामान्य सी किन्तु बेहद नाज़ुक एवं महत्वपूर्ण घटना है, और उसी पहले प्यार की सम्पूर्ण गहराई में डूब कर लिखी गयी है कुमार विवेक की “ज़िन्दगी का याराना” जो प्यार के आलावा और भी ज्यादा खास इस लिए भी हो जाती है क्यूंकि वह पहले प्यार की बात करते है   ।   पहले प्यार की विशेषता आदर्शवाद , मासूमियत , पारस्परिक भावनात्मक जुड़ाव , भविष्य के प्रति अभिविन्यास और प्रियजन की व्यापक उपस्थिति  की इच्छा है। पहले प्यार में  दिल मानसिक मिलन एवं जुडाव पर ही केन्द्रित रहता है वहां भौतिकता से अधिक महत्त्व एहसासों को दिया जाता है । पहले प्यार में दुनिया की हर चीज अच्छी लगने लगती है क्योंकि यह समय जीवन का वह समय   होता है जब पहली-पहली बार जवानी की दहलीज पर आकर खड़े होते हैं और   उस समय जीवन से जु़ड़ा ...

Raagmahal By Mukesh Sohan

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  रागमहल द्वारा: मुकेश “सोहन” दृष्टि प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित      कथाकार : मुकेश सोहन जी मूलतः राजस्थान से हैं एवं   अरसे से हिंदी लेखन से जुड़े हुए हैं एवं अमूमन साहित्य की समस्त विधाओं में आपने अपना रचनात्मक योगदान दिया है किन्तु आपका अधिक झुकाव उपन्यास की ओर   प्रतीत होता है यथा प्रस्तुत उपन्यास   “राग महल” के पूर्व आपके पांच उपन्यास “द्रोंण   की व्यथा” , “स्वयंसिद्धा” ,    “व्यर्थ का प्रलाप” , “इर्द गिर्द” व “राग हवेली”   प्रकाशित हो चुके हैं जिन्हें उनकी विशिष्ठ विषयवस्तु के दृष्टिगत आम जन के बीच काफी सराहा गया   तथा राज्य स्तर पर विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थानों द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया एवं “साहित्य सुधाकर” , “साहित्य श्री” व   “साहित्य कुसुमाकर” जैसी श्रेष्ठ उपाधियों से नवाज़ा गया।     भाषा शैली :- भाषा सामान्य है बोलचाल की ही भाषा है जो पात्रों   के स्तर एवं परिवेश के   उपयुक्त है। वाक्य विन्यास , सुन्दर है किन्तु चंद वर्तनी सम्बंधित कमियां आनन्द दायक पाठन में व...