islet Pinsin By Pavan Kumar Arpit : Pustak samiksha By Atulya Khare

  • Pustak Samiksha: Atulya Khare

  • समीक्षित पुस्तक : इस्लेट पिंसिन

  • विधा : कहानी

  • द्वारा : पवन कुमार अर्पित

  • Lion’s Publication द्वारा प्रकाशित

  • प्रथम संस्करण : 2024

  • मूल्य : 160.00

  • समीक्षा क्रमांक : 253



                                                        



बेशक यह युवा लेखक पवन कुमार अर्पित का पहला ही कहानी संग्रह है किन्तु उनकी कहानियों के भाव एवं पात्र की भावनाओं को अभिव्यक्त करने की कला निःसंदेह सराहनीय है।

यदि बात सिर्फ उनकी कहानियों के आकार विस्तार की हो तो उनकी कहानियों को कमोबेश  लघुकथा की श्रेणी में भी रख सकते हैं। अल्प शब्दों में ही सुंदरता से भाव अभिव्यक्त करे गए हैं एवं अपनी सभी कहानियों में वे मुद्दे पर रहे हैं, व्यर्थ का भटकाव लक्षित नही होता। लेखक अपने आप में स्पष्ट है कि उसे क्या लिखना है उसका संदेश क्या है उसके पात्रों के भाव किस रूप में आ रहे हैं एवं उस अवस्था विशेष में क्या भाव अपेक्षित हैं। कह सकते हैं कि सभी बिन्दुओं पर लेखक की पकड़ अच्छी है साथ ही है अल्पतम वाक्यों में बहुत कुछ समेट लेने की अद्भुत कला भी।

                                 


संग्रह की पहली कहानी "महावर" में ही हमें उनकी अद्भुत प्रतिभा की झलक मिल जाती है । कहानी निश्छल प्रेम और कहीं एक अविश्वास के जन्म एवं उसके प्रत्युत्तर को परिभाषित करती है। उनकी हर कहानी किसी न किसी भाव विशेष पर एक गंभीर चिंतन है।  फिर वह कहानी "सहजन की सब्जी" हो जहां वे एक बहु की प्रताड़ना से उत्पन्न असहाय वृद्धा के दर्द और उसके दिल के समझौते को बयां करती है वहीं कहानी "अमावट" के द्वारा औलाद के दूर जाने का  दर्द, एक माँ के हृदय के अत्यंत गंभीर भाव को सम्पूर्ण यथार्थ के संग अभिव्यक्त किया गया है।

   


उनकी कहानियों में कहीं न कहीं प्रेम में विछोह का भाव है, और विछोह के उस दर्द की टीस में, प्रेम की यादों में जीते हुए भी बहुत कुछ लिखा गया है जो अपनी शैली एवं अभिव्यक्ति से प्रभावित करता है वहीं अधिकांश कहानियां ग्रामीण परिवेश से संबद्द हैं तथा उनमें मिट्टी की खुशबू उभर कर आती है। उनकी कहानियाँ रूमानियत से दूर हैं व कहीं न कहीं लेखक के दिल में सुलग रहे परिवर्तन की अपेक्षा करते क्रांतिकारी विचारों का आभास देती है। अधिकांश कहानियाँ नितांत पारिवारिक एवं सामाजिक हैं एवं उनके भाव दिल और समाज के इर्द गिर्द ही है संभवतः यह प्रमुख कारण है जो अर्पित जी की हर कहानी अपने पाठक की कहानी बन जाती है। भाव इतने सहज हैं कि वे पाठक को अपनी ही जिंदगी के वाकयात् जान पड़ते हैं। उनकी कहानियों के भाव के लिए किसी विशेष कथानक का सृजन अथवा किसी विशिष्ट विषय का चयन करने के पश्चात उस पर कथानक का सृजन हुआ हो ऐसा तो प्रतीत नहीं होता । 

कहानी "पंचायत" सामाजिक व्यवस्था एवं आज के युवाओं की वृद्ध माता पिता के प्रति उपेक्षित सोच को स्पष्ट दर्शाती है एवं हमारे समाज, वर्तमान परिवेश एवं आधुनिक पीढी पर एक तीखा तंज़ भी है। वहीं कहानी "प्रेम के पीछे का संघर्ष" में वे सच्चे दिलों में पनपते भावों को पूर्ण वास्तविकता संग सामने रखते हैं तो कहानी "चाह" जहां समाज को सोचने पर विवश करती है तथा समाज में वृद्ध आबादी की उनके घरों के अंदर दोयम दर्जे की जीवन यापन की अवस्थाओं पर भी ध्यान आकर्षण का प्रयास है। (कहानियों में क्षेत्रीयता की भीनी भीनी खुशबू है वही क्षेत्र विशेष की मीठी प्यारी बोली पात्र एवं क्षेत्र से सीधे संबद्द करती है।

     

कहानियों के शीर्षक सरल हैं एवं अपने आप में संपूर्ण हैं किंतु प्रतीत होता है कि यदि उन पर विशेष ध्यान दिया  जावे तो बेहतर किया जा सकता है तथा और अधिक भावपूर्ण एवं आकर्षक बनाया जा सकता है। वहीं आज भी दहेज जैसी बुराई को बखूबी प्रभावी ढंग से दर्शाती है कहानी "दहेजू बुलेट आ नईहर की चुनरी"। कहानी, दहेज हत्या एवं संबंधित विषय पर पढ़ी सुनी गई तमाम कहानियों से ऊपर के दर्जे पर स्थापित करने की सभी खूबियों के संग उपस्थित हुई है ।

नारी विमर्श पर केंद्रित है कहानी "लाल रंग", महिलाओं के महत्वपूर्ण किन्तु अल्प-चर्चित विषय पीरियड्स पर अत्यंत तार्किक चर्चा प्रस्तुत की गयी है। वहीं लंबी कहानी है "पेट के बिच्छू", जहां किसी की आपदा किसी के लिए अवसर बन जाती है कहानी लंबी और अत्यंत भावपूर्ण कहानी है जो गरीब की भूख और विवशता को अमीरों के शगल के सापेक्ष रखती है। कहानी का अंत प्रबल संदेशात्मक है वहीं भाव अभिव्यक्ति उत्तम तथा क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग भी बखूबी किया गया है । अंत अपराध बोध एवं प्रायश्चित दर्शाता है जो एक सकारात्मक संदेश दे जाता है।

       

कहानी "तो अच्छा था" ज़िंदगी जी लेने का और हर लम्हे को खूबसूरत बना लेने का प्यार भरा संदेश दे जाती है। 

जहां उनकी अधिकांश कहानियाँ ग्राम्य परिवेश एवं सामान्य निम्न मध्यमवर्गीय मानसिकता वाले समाज के विषय में बात करती हैं वहीं वही ऑर्गेज़म जैसे विषय पर दो विपरीत विचारधाराओं की महिलाओं के विचारों को भी बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है कहानी "सुख का चरम" में ।

लालच से वशीभूत व्यक्ति सही गलत का फ़र्क भूल जब सिर्फ अपनी पिपासाओं को तुष्ट करने एवं संचय में जुट जाता है तब अंत भी सुखद कदापि नहीं होता, यही संदेश देती है कहानी "मुक्ति"। विधवा स्त्री की सामाजिक स्थिति पर तीक्ष्ण टिप्पणी है कहानी "बलमुआ कइसे तेजब" किन्तु कहानी का अंत कुप्रथाओं के सम्मुख समर्पण ही दर्शाता है जबकी उसे आधुनिक मानसिकता एवं परिवेश के दृष्टिगत परिवर्तित किए जाने की सम्पूर्ण संभावनाएं विद्यमान हैं। कहानी "बचवा" संस्कारों पर स्पष्ट एवं तार्किक दृष्टिकोण अत्यंत सरल कथानक द्वारा समझा देती है।

       


आध्यात्म,प्रेम,वैराग्य एवं दाम्पत्य संबंधों पर सुंदर कहानी है "पथिक", कथानक सरल होते हुए भी कहीं कहीं वाक्यांश बोझिल एवं तनिक नाटकीय प्रतीत होते हैं। प्रेम वह भी विभिन्न धर्म और संप्रदायों के युवक युवती के बीच सदा सर्वदा रहा किन्तु,सांप्रदायिकता, प्रेम और धर्म वर्तमान में कुछ अधिक ही ध्यानाकर्षक विषय हैं, कहानी "टू डिफरेंट व्हील्स" इस विषय को सशक्त रूप में उठाती तो अवश्य है किन्तु समस्या का समाधान नहीं मिलता।

शीर्षक कथा "इस्लेट पिंसिन" बालिका शिक्षा के विषय की मुखरता से पैरवी करते हुए संदेश समेटे हुए है कि उत्तर दायित्व के निर्वहन में उम्र कोई बाधा नहीं । वहीं राज्य विशेष की शिक्षा व्यवस्था एवं रोजगार की उपलब्धता पर भी तंज़ है।

  

अन्य कहानियाँ भी कहीं संदेश तो कहीं गंभीर विचार समेटे हुए इस कहानी संग्रह को सहज ही अवश्य पठनीय पुस्तक की श्रेणी में ला खड़ा करती है साथ ही प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से लेखक ने जिस प्रतिभा का परिचय दिया है उस से युवा लेखक से अपेक्षाएं भी बढ़ जाती है।

                 अतुल्य खरे


     
                            

                                  

                                
PUSTAK SAMIKSHA : ATULYA kHARE 

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