Rang Mehsoos Hote Hain by Piyush Singh
रंग महसूस होते हैं द्वारा - पीयूष सिंह प्रकाशक – अन्जुमन प्रकाशन पीयूष सिंह जी का इसके पूर्व एक काव्य संग्रह “रात की धूप में” प्रकाशित हो चुका है एवं उसे पाठकों से प्राप्त प्रतिसाद तथा प्रोत्साहन के फलस्वरूप उन्होंने पहले से भी बेहतर प्रस्तुत करने का प्रयास करते हुए नया काव्य संग्रह “रंग महसूस होते हैं” पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। प्रथम कविता संग्रह “रात की धूप में” जिसकी समीक्षा भी आप के लिए मैंने प्रस्तुत की थी, उस में भी उन्होंने गंभीर सोच का परिचय दिया था और प्रस्तुत संग्रह में भी उन्होंने जीवन में भिन्न भिन्न मौकों पर जो विभिन्न रंग अनुभव किये उन भावों को अपने शब्द दिए हैं। रंगों से तात्पर्य जीवन के हर उतार चढाव, ख़ुशी, पीढ़ा, दर्द, घुटन, और वे तमाम एहसास जो रोजाना की जिंदगी में उन्होंने महसूस किये उन सभी हालात से है जिनके चलते जिंदगी कई रंगों से बनी एक तस्वीर होती है जो नज़रिए पर निर्भर करती है देखने वाले के, कि वह उसे किस रूप में देख रहा है। संग्रह “रंग महसूस होते हैं” की काव्यात्मक प्रस्तुति देते हुए कविता “रात की धूप ...