Sanshaynivritti Aatmgyane Geetopdesh -- Pustak Samiksha : Atulya Khare
समीक्षा द्वारा: अतुल्य खरे समीक्षित पुस्तक : “संशयनिवृत्ति”: आत्मज्ञाने गीतोपदेश द्वारा : सीमा सक्सेना “वर्णिका” BOOK RIVERS द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : वर्ष 2024 मूल्य : 199.00 समीक्षा क्रमांक : 222 अनंतकाल पूर्व रचित महान ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता, मनोविज्ञान, दर्शन एवं आध्यात्म का अद्भुत मेल है जिसकी शिक्षाएं वर्तमान युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी की आदिकाल में। गीता के दोहों की क्लिष्टता एवं आम जन को संस्कृत का सीमित ज्ञान उन्हें आम जन मानस के बीच वैसा प्रचलित एवं लोकप्रिय नहीं कर पाई जैसे की रामचरितमानस की चौपाइयाँ। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य ही मनुष्य के मन में व्याप्त संशयों को दूर कर मन के भटकाव को शांत कर उसे ज्ञान के मार्ग पर प्...