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Sanshaynivritti Aatmgyane Geetopdesh -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  समीक्षा  द्वारा: अतुल्य खरे समीक्षित पुस्तक : “संशयनिवृत्ति”: आत्मज्ञाने गीतोपदेश द्वारा : सीमा सक्सेना “वर्णिका” BOOK RIVERS द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : वर्ष 2024 मूल्य : 199.00 समीक्षा क्रमांक : 222                                                                                             अनंतकाल पूर्व रचित महान ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता, मनोविज्ञान, दर्शन एवं आध्यात्म का अद्भुत मेल है जिसकी शिक्षाएं वर्तमान युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी की आदिकाल में। गीता के दोहों की क्लिष्टता एवं आम जन को संस्कृत का सीमित ज्ञान उन्हें आम जन मानस के बीच वैसा प्रचलित एवं लोकप्रिय नहीं कर पाई जैसे की रामचरितमानस की चौपाइयाँ। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य ही मनुष्य के मन में व्याप्त संशयों को दूर कर मन के भटकाव को शांत कर उसे ज्ञान के मार्ग पर प्...

Neera -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : नीरा द्वारा: शिखा मनमोहन शर्मा बोधि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2023 मूल्य : 150.00 समीक्षा क्रमांक : 220    नीरा” , कोरोना काल की भयावह त्रासदी और रूह कंपा देनी वाली यादों को ताज़ा करते दृश्यों से प्रारंभ होती है युवा लेखिका शिखा जी ने, नीरा की कहानी को , शब्दों के जरिए वास्तविकता के इतना करीब ला दिया है मानो सब सामने ही घटित हो रहा हो एवं इसका संपूर्ण श्रेय लेखिका को है , जिन्होंने अपने उपन्यास “नीरा” में घटनाक्रम को उसके संपूर्ण यथार्थ के संग चित्रित करते हुए पेश हर भाव को शब्दरूप में हूबहू अभिव्यक्त कर दिया। बात करे शिखा जी के साहित्य सृजन की तो “नीरा” उनका दूसरा उपन्यास है हाल ही प्राप्त जानकारी के मुताबिक उनका तीसरा उपन्यास “दमयंति” भी साहित्य अकादमी द्वारा स्वीकृत हुआ है तथा शीघ्र पाठकों के समक्ष होगा। इसके पूर्व उपन्यास   “ मैं अभी जिंदा हूं” प्रकाशित हो चुका है वहीं विभिन्न एकल काव्य एवं कहानी संग्रह तथा साझा संग्रह भी प्रकाशित हो चुके है। विभिन्न समाचार पत्रों में उनकी रचनाएं अ...

Meri Fantasiyan -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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    Pustak Samiksha : Atulya Khare    समीक्षित पुस्तक : मेरी फंतासियाँ द्वारा: सुरेश उनियाल काव्यांश प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण :2025 मूल्य : 275.00 समीक्षा क्रमांक : 219 सत्य घटनाओं पर आधारित किस्से कहानियों से परे, अमूमन प्रत्येक कहानी अंततः लेखक की “कल्पना” ही होती है, फिर वह कहानी सामाजिक हो अथवा कोई प्रेम कथा, लेखक पात्रों और परिस्थितियों का सृजन अपनी कल्पना के आधार पर स्वयं करता है। “ फैंटेसी ” भी है तो लेखक की कल्पना ही, फिर सहज ही यह प्रश्न कौंधता है कि सहज कल्पना और फेंटेसी में ऐसे क्या फरक हैं की इसे अलग विधा के रूप में देखा जाता है।     साहित्य की दुनिया में  ' कल्पना ' और  ' फैंटेसी ' के बीच एक महीन किन्तु स्पष्ट विभाजन रेखा है , जिसके कारण फैंटेसी को एक अलग विधा माना जाता है। ​ यथार्थवादी कहानियाँ जहां दुनिया के भौतिक एवं सामाजिक नियमों का पालन करती हैं, एवं लेखक द्वारा की गई कल्पना “ संभावनाओं ” के भीतर होती है अर्थात उसकी कल्पना सत्य में परिणित भी हो सकती है, वहीं ​ फैंटेसी में लेखक अपनी दुनिया और उस फेंटसी ...

Prem Prakriya Hai -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare  समीक्षित पुस्तक : प्रेम प्रक्रिया है द्वारा : भुवनेश्वर उपाध्याय विचार प्रकाशन, ग्वालियर, द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2024 मूल्य : 250.00 समीक्षा क्रमांक : 218 प्रेम, एक निस्वार्थ भावना, जिसमें अन्य की खुशी एवं कल्याण “स्व” से ऊपर है। सम्मान, समर्पण एवं निजता संग आजादी की उपस्थिति में ही सच्चा प्रेम अंकुरित होता है। प्रेम मात्र आकर्षण नहीं , अपितु गहरा जुड़ाव , सुरक्षा और विश्वास का अहसास है। इसके प्रति भिन्न भावनात्मक , मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक तथा साहित्यिक दृष्टिकोण व्यापक रूप में नज़र आते हैं, किन्तु सभी में अमूमन आत्मीयता , चाहत का जुनून एवं प्रिय के प्रति प्रतिबद्धता जैसे तत्व विद्यमान रहते हैं वहीं विज्ञान इसे मस्तिष्क में होने वाली एक रासायनिक क्रिया मात्र मानता है जहां कुछ ऐसे रसायन उतत्पन्न होते हैं जो खुशी का एहसास करवाते हैं।                                                         ...

Kanpur To Kalapani -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

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  Pustak Samiksha : Atulya Khare समीक्षित पुस्तक : कानपुर टु कालापानी द्वारा : रूपसिंह चन्देल अमन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण : 2019 मूल्य : 225.00 समीक्षा क्रमांक : 217                                                                        “कानपुर टू कालापानी” ,  वरिष्ठ उपन्यासकार रूप सिंह चन्देल द्वारा लिखित एक विशिष्ट उपन्यास है, जिसे   अमन प्रकाशन   ने वर्ष 2019 में प्रकाशित किया था। रूप सिंह चंदेल जी द्वारा प्रथम विश्व युद्ध के परिदृश्य में लिखित एक सामाजिक उपन्यास जो तत्कालीन भारत की सामाजिक, आर्थिक एवम धार्मिक स्थितियों का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है।                                                         प्रस्तुत उपन्यास प्रथम विश्व...