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Jagne se pahle By Prabhu Dayal Khattar

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जागने से पहले जागने से पहले विधा : बाल कथा द्वारा: प्रभु दयाल   ठक्कर अनुराधा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक समीक्षा क्रमांक : 108 पृष्ट संख्या :109 मूल्य : 200.00 प्रथम संस्करण :   2022   वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक सेवा के दीर्घ कालीन अनुभवों से समृद्ध   प्रभुदयाल खट्टर जी   की पुस्तक “जागने से पहले” बाल कथाओं एवं बाल कविताओं का संग्रह है जो सहज एवं सरल भाषा में बाल सुलभ जिज्ञासा से युक्त विषयों पर   12 बाल कथाएं तथा 40 बाल कविताएं संजोए हुए है ।             दूरदर्शन तथा राष्ट्रिय अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् में लगभग 35 वर्षों तक कार्यरत रहने के साथ साथ   खट्टर जी निरंतर साहित्य से जुड़े रहे हैं तथा उन्होनें अमूमन साहित्य की प्रत्येक विधा में सृजन कर्म किया है।   भिन्न विधाओं से सम्बद्ध रहते हुए सेवाएँ दी । समय समय पर विभिन लघुकथा संग्रह एवं काव्य संग्रह प्रकशित हुए , जिसमें से एक 18 कहानियों का संग्रह “उठा पटक” पढ़ने का सौभाग्य मुझे भी मिला जिसमें नारी विमर्श प्रमुख...

Dedh Aankh Se Likhi Kahaniyan By Tej Beer Singh

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  डेढ़ आंख से लिखी कहानियां समीक्षा क्रमांक :  107 डेढ़ आंख से लिखी कहानियां  ( एकल कहानी संग्रह) विधा : कहानी    द्वारा तेजबीर सिंह न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पृष्ट संख्या :125 मूल्य : ₹ 225     ता-उम्र देश विदेश में विभिन्न चीनी मिलों में अपनी सेवाएं प्रदान करने के पश्चात तेजबीर जी ने अपने बचपन के शौक “कहानी लेखन” को लगभग 50 वर्षों के बाद पुनः अपनी सेकेंड इनिंग में अपना साथी बनाया है एवं प्रस्तुत कहानी संग्रह उनका इस दिशा में प्रथम प्रयास है।   लगभग 30 कहानियों का यह संग्रह उनके तजुर्बों की शाब्दिक अभिव्यक्ति अधिक प्रतीत हुआ जिसमें वे जीवन के विभिन्न खट्टे मीठे पलों को जीने के   तजुर्बे एवं उम्र के इस सफ़र में मिले भिन्न भिन्न किरदारों से   पाठक का परिचय करवाते हुए दिखे।      संग्रह की पहली कहानी "पेंशन" एक पेंशनर के जीवन में व्याप्त ऋणात्मकता का विषय उठाती है वहीं जीवन साथी के सहयोग एवं सकारात्मक रवैए पर भी अत्यंत खूबसूरती से ,   एवं शब्दों में अधिक न बयान करते हुए सांकेतिक रूप से ही जी...

Peeli Mand Udas Saanjh by Arvind Kumar Sambhav

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  पीली मंद उदास साँझ द्वारा : अरविन्द कुमारसंभव विधा : लघुकथा संग्रह सबलपुर प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित मूल्य : 150.00 प्रथम संस्करण : 2023 समीक्षा क्रमांक 104   ख्यातिलब्ध साहित्यकार अरविन्द कुमारसंभव जी हिन्दी साहित्य जगत में , सुपरिचित नाम है , साहित्य जगत का, अथवा साहित्य से किसी भी प्रकार से सरोकार रखने वाला कोई विरला   ही होगा जो उनके नाम से परिचित न हो। साहित्य जगत में   उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु   साहित्य जगत के पुरोधाओं के बीच एवं साहित्य से सम्बद्ध नामचीन मंचों द्वारा भी उनका नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, एवं वे स्वयम ही विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए रहकर निरंतर साहित्य जगत को अपना अमूल्य योगदान प्रदान कर रहे हैं।           साहित्य में अपने उल्लेखनीय योगदान के फलस्वरूप आज उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है उस के पश्चात वे किसी भी परिचय के मोहताज नहीं हैं उनका नाम स्वयम ही उच्च कोटी के साहित्य की मिसाल बन चुका है , आज वे   उस मुकाम पर हैं जहां उनका नाम ही श्रेष्टता की म...

Andhere Ke Khilaf By Ram Pal Shrivastav

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अँधेरे के खिलाफ़ समीक्षा क्रमांक 101 “ अँधेरे के खिलाफ़ ” काव्य संग्रह द्वारा : राम पाल श्रीवास्तव ‘अनथक’ समदर्शी प्रकाशन गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित पृष्ट संख्या : 128 मूल्य : Rs.   200.00 “ खाबे हस्ती मिटे तो हमारी हस्ती हो , वरना हस्ती तो खाब ही की है ” जब जीवन की विसंगतियाँ और त्रासद स्थितियाँ सामने आती हैं , तो कविता प्रस्फुटित एवं उच्चारित होती है   अपनी पुस्तक का परिचय करवाते हुए एवं प्रस्तुत काव्य संग्रह की कविताओं के विषय में ये विचार स्वयं   रामपाल श्रीवास्तव जी के हैं,   वे कहते हैं की कवि वास्तविक जीवन के निकट पहुंचता है और सच्चाई की ओर समाज की रहनुमाई करता है। अपनी पीड़ा , वेदना और व्यथा का उद्घाटन करता है। अंधेरे के खिलाफ़ लड़ने के लिए समुचित वातावरण और धरातल निर्मित करने की ओर उन्मुख होता है। द हकते अंगार उत्पन्न कर सकूँ पैशाचिक प्रवृत्ति का दलन कर डालूँ उन सभी का शमन कर सकूँ जो साज संभार में बाधक बनें सभी का अंत कर डालूँ सभी का जीवन बना डालूँ संग्रह की कविता “सुन शब्द” की उपरोक्त पंक्तियों से हमें उनके भाव को समझने में काफ...