Pratyasha by Anumita

 

प्रत्याशा

लेखिका :  अनुमिता शर्मा
प्रकाशक:  हिन्द युग्म



युवा पीढ़ी की सशक्त हस्ताक्षरहिंदी और अंग्रेजी  में जिनकी लेखनी समान  रूप से विचारों को शब्द रूप में व्यक्त करने में सक्षम है, ऐसी प्रतिभाशाली सुश्री अनुमिता शर्मा द्वारा रचित, उनकी नवीन कृति है, “प्रत्याशा”।

अनुमिता जी की अब तक चार पुस्तकों का प्रकाशन हो चूका है, इसके पहले हिंदी में “कुछ आप बीती कुछ जग बीती” नाम से एवं अंग्रेजी भाषा में लिखे गए उपन्यास काफी सराहे गए थे अतः अनुमिता जी साहित्य प्रेमियों के लिए नया नाम तो नही है।

अनुमिता शर्मा की कृति प्रत्याशा, 11 चुनिन्दा कहानियों का संग्रह है। हर कहानी एक भिन्न रूप एवं आधार लिए हुए है, कहना अतिश्योक्ति न होगी की कहानियों का गुलदस्ता लेखिका ने प्रस्तुत किया है। रोमांच, प्यार-अभिसार, सामजिक, ग्रामीण परिवेश, अवचेतन मन की दशा, भावनात्मकता, एकाकी जीवन, वृद्धावस्था जैसे विभिन्न  विषयों पर लेखिका की कथन शैली  प्रभावित करती है, भावनाओं का सूक्ष्म अवलोकन, विषय के गर्भ में उतरकर  विषय को, उसमें अन्तर्निहित भावनाओं को समझने की क्षमता लेखिका  में लक्षित होती है। शब्द चयन, सामान्य  किन्तु  स्थितियों के अनुकूल है, वाक्य विन्यास अत्यधिक सुगठित, प्रभावी एवं  शुद्ध है। व्याकरण संबंधी कोई अशुद्धि नही नज़र आती। अधिकांश कहानियों के प्रमुख  पात्र, अंतर्मुखी व्यतित्व एवं काल्पनिक,ख्वाबों की दुनिया मे विचरण करने वाले दर्शाए गए हैं। उपमाओं एवं विशेषणों का सुन्दर प्रयोग है।

हर कहानी में पात्र संख्या  सीमित  है उनका प्रवेश अथवा निर्गमन यथोचित एवं परिस्थिति के अनुकूल है। प्रकृति वर्णन के माध्यम से लेखिका ने बहत ही सुन्दर उपमाएं देते हुए वातावरण का मनलुभावन चित्रण किया है।कई स्थानों पर लेखिका ने स्वयं के भीतर छुपे, कविहृदय का भी सुन्दर परिचय दिया है। दिल में बसे कई भाव कविता बन कर भी उभरे हैं।

 पुस्तक का प्रारंभ, लीक से हटकर अप्रत्याशित रूप से एक रोमांचक कहानी “दीवार पर लटकती लड़की” से करते हुए  लेखिका ने चमत्कृत किया एवं सशक्त रचना की प्रस्तुति इतने बढ़िया, सधे हुए तरीके से की है कि पाठक शीघ्र अंत जान लेने हेतु बेताब रहता है जो  रोमांचक किस्सागो की कलम की विजय का द्योतक है। 

 वही दूसरी कहानी “सत्तर के प्यार का भूगोल” नारी केन्द्रित, एकाकीपन से जूझती,प्रेम-अभिसार  की कामनाओं के संग, प्रेम प्रतीक्षित ख्वाबों में जीने वाली, किन्तु समयानुसार अपने मन पर, नियंत्रण की क्षमता  वाली युवती  के मन की, उसके अंतर्द्वंदों की  उसके ख्वाबों  के सच होने और बिखरने के बीच की, उसकी मनोदशा को बखूबी वर्णित करती है। एकाकीपन से सहसा उबरने पर मन के दबे हुए ज़ज़्बातों का उफान एवं पश्चातवर्ती ज़ज़्बातों पर नियंत्रण के दृश्य सुंदरता से लिखे गए है।

हृदय से  प्रेमातुर, अभिसार एवं समर्पण हेतु  नि:संकोच प्रस्तुत होने पर भी युवति के अनायास हृदय परिवर्तन को लेखिका जिस तरह से मर्यादित  एवं सधी हुई भाषा में अश्लीलता से बचते हुए  शिष्ट शैली में प्रस्तुत कर सकी है वैसा विरले कथाकार  ही कर पाते है।  लेखिका की नायिका संभवतः  ख्वाब को ख्वाब ही रहने दो कोई नाम न दो विचारधारा से प्रेरित है किन्तु मानसिक अंतर्द्वंद के पश्चात स्वयं पर विजय प्राप्त करना कहीं न कहीं उसकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।

 कहानी “गर्जन तर्जन” भी अनोखी है, विषय-वस्तु ग्रामीण परिवेश में पुराने रईसों पर केन्द्रित  है, प्रकृति का सुंदर एवं मनमोहक चित्रण प्रस्तुत किया गया है। मन के डर एवं भावों को प्रेत बाधा, आत्मा, का प्रकोप मानना जैसे विषय भी लेखिका ने शामिल किये है।

  संवेदनशील, अत्यधिक भावनात्मकप्रतिभा की पहचान न होने का गम कही न कही प्रसिद्धि पाने की ललक,रिश्तों को सीमा तक  खुले मन से स्वीकारती-तजति, कभी कभी  नकारात्मकता की ओर बढ़ती हुई“सिरंडीपिटी”  की नायिका में दिखते ये समस्त भाव पाठक को कथा संग बांधने में पूर्ण सक्षम है। सीमा से परे, आकस्मिक आनन्द की अनुभूति का वर्णन करते हुए जिस खूबसूरती से प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन लेखिका ने किया है वह कथा के शीर्षक चयन “सिरंडीपिटी” को  पूर्णतः सार्थक करता है।

लेखिका के लेखन पर कहीं न कहीं अमृता प्रीतम जी के लेखन जैसी गहरी गंभीर सोच, लिखने की अद्भुत शैली की छाप महसूस होती है। लेखन में वह गाम्भीर्य है, जो कि एक अनुभवी लेखक के पास ही हो सकता है। हर कहानी एक भिन्न कलेवर लिए हुए है, परन्तु मुख्यतः एकाकी  नारी केंद्रित, सुंदर  प्राकृतिक वर्णन से युक्त पर किसी न किसी नारी से जुड़े मुद्दे की ओर इंगित करती हुई है।

 कहानी “वो कही नही थी” में  जहाँ दहेज, पारिवारिक बटवारे जैसी सामाजिक समस्याओं को इंगित किया है  वहीं लेखन में  आत्मा का अस्तित्व, प्रेत,मौत,  समलैंगिकता जैसे विषय भी कथानक को बोझिल न बनाते हुए  उपस्थित रहे है, जो आम तौर पर अन्य  लेखकों  हेतु अछूत ही रहते है।

 “सतह के नीचे” एक विधवा की कहानी है, जो कभी  एक अज्ञात लेखक को उनकी रचनाओं के कारण चाहती तो  थी, किन्तु मात्र नि:श्छल पाठक एवं लेखक वाला  प्रेम। भविष्य में  उनके मिलन का  घटनाक्रम जानना अवश्य ही रोचक है। हर कहानी के अंत में पाठक को कुछ विचारों कि धुंध में छोड़ जाना  जहाँ  पाठक   कुछ सोचने हेतु विवश हो जाये यह  लेखिका की विशेषता जन पड़ती है।

 अगली कथा “चेतना के अद्भुत तमाशे” पुनः अवचेतन मन व विचारों के झंझावात को दर्शाती है  सीमित पात्रों द्वारा कहानी को जिस तरीके से आगे ले जाया गया है वह सुंदर एवं रोचक है।

एक अन्य कहानी “आत्मा या आजीविका” में मुफ़्लिसि के दौर में इंसान की मानसिक अवस्थाओं का बखूबी चित्रण किया गया है। कथा का नायक महानगरी में कुछ बनने  के असंभव से प्रतीत होते  सपने को पूरा करने हेतु कितना और कैसे कैसे  जूझता है सड़क छाप तांत्रिकों के खेल,  इन का डर एवं असफलता के बाद   वापसी पर किन हालातों से  दो चार होता है, जानना वाकई दिलचस्प है।

 अंतिम कहानी “प्रत्याशा” इस कथा संग्रह की अंतिम कथा है जिसमें एक ऐसे स्त्री पात्र को चुना है जिसे आम भाषा में काली जुबान वाले कहा जाता है उसके इस अभिशाप या आम जन के विश्वास को लेकर उत्पन्न स्थितियों का वर्णन है एवं कह सकते है कि पिछली कथा का शेष भाग है। अक्सर कथा का अंत न निर्धारित करना अथवा किसी बिंदु पर या दोराहे पर लाकर पाठक को विचारों की मझधार में    उसे  स्वंय अंत निर्धारित करने की स्वतंत्रता देना लेखिका की प्रस्तुति की विशेषता है। 

पुस्तक को जैसा मैंने समझा समीक्षा रूप में प्रस्तुत है।

पाठक कृपया पुस्तक को आद्योपांत  पढ़ कर अपनी राय दें पर पढ़ें ज़रूर

सादर,
अतुल्य

 

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