"जादू भरी लड़की"
( कहानी संग्रह )
द्वारा : किशोर चौधरी
विधा : कहानी
हिन्द युग्म द्वारा प्रकाशित
प्रकाशन वर्ष : 2015, 2020 (2nd)
मूल्य : 125.00
समीक्षा क्रमांक : 194
कहानीकार किशोर चौधरी मुख्यतः अपनी भाव प्रवण शैली एवं विशिष्ठ काव्यमयी, सुन्दर प्रवाह युक्त भाषा के लिए जाने जाते हैं .उनके प्रस्तुत कहानी संग्रह में उनकी चुनिन्दा 9 कहानियां हैं जिन पर बात करने से अधिक बेहतर होगा कि उनकी इसी संग्रह कि कहानियों के कुछ चुने हुए अंश जिनसे भाव एवं भाषा दोनों का ही सुन्दर परिचय मिलता है पर एक नज़र डाल ली जाये संभवतः उसके बाद एक एक कहानी पर अथवा किसी कहानी विशेष पर कुछ भी टिप्पणी करने कि आवश्यकता ही न रहे.

वैसे भी किशोर चौधरी एक जाने माने कहानीकार हैं जिन्होंने अपनी खूबसूरत लेखनी के कमाल से पाठकों के दिलों को जीता है उनकी कहानियों में जहाँ एक और हमें रिश्तों कि मुश्किलात और जीवन की जटिलतायें दिखती हैं वहीँ दूसरी और रिश्तों को बहुत गहराई एवं बारीकी से समझने का अवसर भी मिलता है. उनकी कहानियों में सच्चे सरल प्रेम का कठिनतम पक्ष दिखलायी पड़ता है तथा कहानियाँ विशेष तौर पर नारी पात्र के आसपास से उन लम्हों को चित्रित करते हैं जो उनके दुरूह जीवन को चित्रित करती हैं।
उनकी भाषा विशिष्ठ है एवं लहजा एक नाज़ुकी तथा अदायगी का एक विशेष अंदाज़ लिए हुए है जो पाठक का ध्यानाकर्षण करता है साथ ही पाठक कि एकाग्रता भी चाहता है. उनकी विशिष्ठ शैली के कारण पाठक उनके कथानक से जुड़ पाता है यह कहना भी थोडा सा मुश्किल अवश्य है किन्तु कथानक बाँध कर रखने में सक्षम अवश्य हैं.
"चौराहे पर सीढियां" , "छोरी कमली', 'बातें बेवज़ह" और उनके प्रकाशित कहानी एवं कविता संग्रह हैं जबकि "कालो थियु सै" एक संस्मरण है. . कविता संग्रह की कविताओं की बात न भी करें तो उनकी कहानियों के द्वारा भी हमें उनकी सुन्दर काव्यमयी भाषा का परिचय मिलता है जहाँ वे अत्यधिक शालीनता परिपूर्ण लहजे में पात्रों के माध्यम से जीवन की कठिनताओं एवं चुनौतियों को बहुत सरलता से सामने रख देते हैं .
प्रस्तुत कहानी संग्रह "जादू भरी लड़की" उनकी नौ श्रेष्ठ कहानियों का संकलन है, जिसमें हर कहानी एक अलग ही रूप एवं भाव में हैं तथा उनके द्वारा हमें एक ओर बड़े शहरों कि व्यस्तता भरी ज़िन्दगी से पैदा हुआ अकेलेपन दीखता है तो वहीँ ग्रामीण परिवेश में कही गयी कहानियां भी देखने में आती हैं.
प्रस्तुत संग्रह कि शीर्षक कहानी *जादू भरी लड़की* एक बहुत मासूम सी प्रेम कहानी है जिसे सुन्दर जादुई लिबास में पेश किया है कुछ जादुई करिश्मात भी पढ़ने में आते हैं लेकिन कहानी कुल ज़मा एक प्रेम में पड़ी हुयी लड़की के धीरज और भोलेपन की दास्तान है, इस कहानी के सुन्दर भाव जानने के लिए चंद पंक्तियों को भी देखें :
"वह दीवार खूब जीती जागती लग रही थी . ऐसा लग रहा था जैसे कोई सहारा चाहिए और उसे दीवार पूरा कर रही है. वह दीवार अटल खड़ी है . उसका साथ दे रही है .उसे देखते हुए अच्छा लग रहा है. उस पर दो फ्रेम टंगे हुए हैं एक में पहाड़ और कटाव के पास बहती हुयी बलखाती नदी और हरियाली है दुसरे फ्रेम में ऊँची पुरातन इमारत के आगे बैठे हुए मज़दूर दिखाई दे रहे हैं वह अपलक दोनों फ्रेम में समाये निर्जीव जीवन के अक्स को कम और दीवार को आशा भरे भाव से ज्यादा देख रही थी."
पहली ही कहानी "गुलजान, देखो परिंदे!" सिर्फ और सिर्फ अपनी सुन्दर भाषा के लिए बार बार पढ़ी जानी चाहिए , सहज यथार्थ में आगे चलती एक रोचक कहानी , ये पंक्तियाँ देखें
"नज़र गिरती तो लुढकती हुयी धूसर सलेटी रंग के बीच जाकर खो जाती , जैसे कंचे खो जाते थे. वे वहीँ आसपास ही पड़े होते मगर रंगों के छलावे में खुद को ऐसे छिपा लेते कि दिखाई न देते ."
"उसकी निगाहें इंतज़ार में इस तह तेज़ी से घूम रहीं थी जैसे बचपन कि कोई ताज़ा और छोटी याद."
यह कहानी इस तरह के तमाम खूबसूरत वाक्यांशों से सरोबार है.
कहानी "सात मुलाक़ातें" एक गृहणी की किसी अजनबी से सात मुलाकातों के माध्यम से कहीं न कहीं उसके अन्दर के प्रेम को तलाशने का प्रयास रहा है किन्तु अंत में विजय महिला कि ही है । वाक्यांश इस कहानी के भी बेजोड़ हैं ,यथा :-
'सुख असल में असीम होने में है. ऐसा असीम जो न्यून में समां जाये ".
"आधी कही बातें भी पूरी समझ जाते "
"सुखों की लिप्सा और दु:खों के नैराश्य एवं पीढ़ा से भरे ज़िन्दगी के इस बीहड़ में हम आँखें मूंदे आये हुए थे" .
"उसने प्यार किया था यानि अन्दर का इन्द्रधनुष अमिट रूप से खिला हुआ था' .
"वे दो अनजाने लोग थे . वे अचानक मिले जैसे किसी वीराने में रेल कि पटरियां तिकोने ढंग से आपस में मिलाती हैं और फिर खो जाती हैं .दोबारा मिलने के लिए रेल को लौटना होता है .
तो कहानी "पक्की ज़मानत" असहाय के शोषण और नारी प्रतिशोध की एक मार्मिक किन्तु सख्त सन्देश देती कहानी है जिसमें जहाँ हमें नारी के कठोरतम रूप के साक्ष्य मिलते हैं वहीँ उसकी कोमल हृदया होना भी प्रमाणित होता है. घटना प्रधा कहानी है । किशोर जी कि कहानियों में सीमित पात्र ही देखे हैं अतः कथानक अधिक उलझता नहीं है जो पाठक के दृष्टिकोण से उचित ही है.
कहानी "उस मौसम के दिन" और 'श्यामल सखी तेरी' नारी विमर्श आधारित होते हुए नारी मन की गहराईयों तक पहुँचने प्रयास करती हैं एवं अन्ततोगत्वा अपने प्रयासों में सफल होती हुयी परिलक्षित होती हैं.
तो कहानी "एक पूरा आदमी" के द्वारा बाकि सभी कहानियों से पूर्णतः भिन्न कथानक सामने रखा है . सम्पूर्ण कहानी ही विशिष्ठ वाक्यांशों से परिपूर्ण है , प्रारंभ ही देखें :
'उसकी ज़िन्दगी में नमक कि तरह शामिल शामें अक्सर दिन भर के उबाऊ चेहरों और सड़े गले पुराने संवादों को चबाने में मदद किया करतीं थीं . उस दिन कि धुप बहुत अकेली थी और पेड़ों के पार छीजते हुए उजाले में उसका मन डूबता जा रहा था ".
वहीँ पुरुष , पूर्ण पुरुष के व्यवहार और इन तथाकथित पूर्न्पुरुशों के महिलाओं के प्रति नज़रिए तथा मापदंडों की सोच पर प्रश्नचिन्ह लगाती विचारशीलता जगाती कहानी।
उक्त के आधार पर सहज ही कहा जा सकता है कि उनकी लेखनी में काव्यात्मकता, भावुकता और जीवंत चित्रण है। उनकी रचनाएँ किसी विशेष भाव , काल अथवा परिवर्तन के सन्देश से प्रेरित हों ऐसा तो प्रतीत नहीं होता उनकी कहानियों में स्त्री-मन की संवेदनशीलता अपने सम्पूर्ण यथार्थ के संग परिवेश जनित बाध्यताओ को समेटे हुए है.
वे सामाजिक परिवर्तनों और जीवनशैली का उल्लेख तो अवश्य ही करते हैं किन्तु कहीं कटाक्ष जैसे भाव नहीं लक्षित होते अपितु उनकी रचनाओं में तो संवेदनशीलता अधिक दिखलाई पड़ती है.
उनका लेखन गहरे विचारों से भरपूर है तथा भाषा किसी कविता के जैसी सुन्दर । उनकी रचनाएँ प्यार, प्रकृति और मन की अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती हैं। उनकी रचना पाठकों को पात्र से भावनात्मक रूप से जोड़ने में मदद करती है व् जो कहीं न कहीं जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने में अवश्य सहायता प्रदान कर सकती है यही कारण है कि उनकी रचनाओं को पढना मन को सुकून देता है ।
अतुल्य
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