deep mein divakar -- pustak samiksha : Atulya Khare
- Pustak Samiksha : Atulya Khare
- समीक्षित पुस्तक : दीप में दिवाकर
- द्वारा : मीरा जैन
- विधा : लघुकथा
- हिन्दी साहित्य संस्था द्वारा प्रकाशित
- प्रथम संस्करण : 2025
- मूल्य : 280.00
- समीक्षा क्रमांक : 229
इसमें
दो मत नहीं कि लघुकथा हिंदी साहित्य की एक प्रचलित एवं सशक्त विधा है, हिंदी साहित्य में लघुकथा की यात्रा सदियों पुरानी है, भारतीय साहित्य में हितोपदेश, पंचतंत्र और जातक
कथाओं में भी लघुकथा की उपस्थिति प्रतिविंबित होती हैं। माधवराव सप्रे द्वारा रचित
“एक टोकरी भर मिट्टी” को साहित्य मनीषियों ने देश की पहली लघुकथा माना है।
प्रतिष्ठित साहित्यकारों यथा कमलेश्वर, राजेंद्र यादव जी,
और विष्णु प्रभाकर जी जैसे
लेखकों ने इसे परिपक्व बनाया और साहित्य की इस विधा को पहचान दिलवाई।
एक
विधा के रूप में इसका विकास आधुनिक काल में हुआ। आज लघुकथा एक स्थापित विधा है। यह
केवल "छोटी कहानी" नहीं है, बल्कि कम शब्दों में एक गहरा प्रभाव छोड़ने वाली कला है। लघुकथा की संरचना आम
लघुकथा से कई मायनों में भिन्न होती है। सर्व प्रथम तो यह जान लें कि लघुकथा का
आधार कोई एक ही विचार, घटना या संवेदना होती है, अर्थात बहुत
सी घटनाएं पात्र अथवा घटना क्रम लघुकथा में नहीं पाए जाते। इसमें मात्र एक ही भाव
स्थिति अथवा घटना का चित्रण होता है, और इसमें आम तौर पर विस्तार की संभावनाएं
नहीं होती और यदि हों भी तो अत्यंत क्षीण।
बात करें लघुकथा के प्रभावी प्रस्तुतीकरण की, तो यह संभवतः इस विधा में लेखन हेतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण अनिवार्यता है। कम से कम शब्दों में बड़ी बात कह देना ही लघुकथा की सफलता का द्योतक है। है। लघुकथा में क्यूंकि बात को स्पष्ट करने हेतु विस्तार संभव नहीं होता अतः वाक्यांश का प्रभावी होना एवं प्रभाव तीव्र होना अनिवार्य है। सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते आज लघुकथा सबसे अधिक लिखी जाने वाली विधा है। व्यस्त जीवन शैली के कारण पाठक इसे पसंद कर रहे हैं। हालांकि इसे नैतिक शिक्षा का जरिया, चुटकुला अथवा घटना की लघु रिपोर्ट मान लेना इसकी साहित्यिक महत्ता को कमतर आँकन होगा।
समीक्षाधीन
लघुकथा संग्रह वरिष्ट साहित्यकार मीरा जैन जी की बेहतरीन लघुकथाओं का संग्रह है। मीरा
जैन जी एक कुशल प्रशासक, प्रतिष्ठित बाल विज्ञानी एवं वरिष्ठ लेखिका हैं एवं
पूर्व में भी उनकी लघुकथा संग्रह सहित 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, वहीं देश
की अमूमन हर पत्र पत्रिका ने उनकी कथाओं को प्रमुखता से स्थान दिया है। बाल
साहित्य एवं सशक्तिकरण हेतु उनके विशेष योगदान एवं समर्पण के दृष्टिगत उन्हें म.
प्र. शासन द्वारा बाल कल्याण समिति का प्रथम श्रेणी मैजिस्ट्रैट नियुक्त किया गया।
उनकी साहित्यिक उपलब्धियों एवं प्राप्त पुरस्कारों तथा सम्मान इत्यादि की एक लंबी
फेहरिस्त है जो साहित्य जगत में उनके योगदान का प्रमाण हैं वहीं म.प्र साहित्य
अकादमी का शरद जोशी व्यंग्य सम्मान एवं मैथलीशरण गुप्त सम्मान उल्लेखनीय हैं।
“दीप
में दिवाकर” मीरा जैन का जी का सद्य प्रकाशित नवीनतम लघुकथा संग्रह है जो अपने
विषय, भाव, भाषा एवं सरल प्रस्तुति जैसी विशेषताओं के कारण विधा में अपनी सशक्त
उपस्थिति दर्ज करवाता है। प्रस्तुत संग्रह में तकरीबन 100 लघुकथाएं संग्रहीत हैं
एवं इसे हिन्दी साहित्य संस्था नें अत्यंत आकर्षक कलेवर में प्रकाशित किया है।
पुस्तक का पूर्णतः त्रुटिरहित होना उसकी एक अतिरिक्त खूबी कही जा सकती है।
वरिष्ठ लेखिका के प्रस्तुत लघुकथा संग्रह की हर
कथा मानवीय मूल्यों व इंसानियत के ज़ज़्बे को दर्शाती है, उनकी कहानियां मानवीय
संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। उनकी पारखी नजर, गंभीर गहन सोच एवं विचारण तथा सामाजिक
विषमताओं को चिन्हित करती रचनाएं इस संग्रह को विशिष्ट बनाती हैं, साथ ही नारी
विमर्श आधारित लघुकथा के द्वारा नारी अस्मिता एवं समाज में नारी संग भेदभाव को भी
उनके विभिन्न कथानक में स्थान मिला है।
मीरा
जी की लघुकथाओं के विषय आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सामान्य विषय ही हैं,
देशप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, शहीदों के प्रति सम्मान एवं संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम संबंधित विषय उनकी
अधिकांश लघुकथाओं में लक्षित होते है। उनकी लघु कथाएं मात्र कथ्य न होकर एक
वैचारिक चेतना जागृत करती हैं तथा आम आदमी की सोच को उसके मनोभावों को बखूबी अपने
शब्दों में डाल कर प्रभावी रूप में अभिव्यक्त करती हैं।
उनकी
लघुकथाओं से गुजरते हुए स्पष्ट लक्षित हो जाता है कि उनकी कहानियां बेहद सादगी भरी
होती है जिनमें आम आदमी की ज़िंदगी, उसके एहसास और ज़ज़्बातों से जुड़े सुख दुख के किस्से प्रमुखता से स्थान पाते
हैं। विविधता के संग सरलता एवं यथार्थ के बेहद करीब, सामान्य
जन जीवन के रोज मर्रा के किस्से पाठक को कहीं न कहीं अपनी सी अथवा अपने ही परिवेश
की कहानियाँ प्रतीत होती हैं जो उसके मानस से त्वरित संबंध स्थापित कर लेने में
सक्षम हैं।
मीरा
जी की कहानियों से गुजरते हुए उनकी सुंदर प्रभावी भाषा एवं संवादात्मक सहज बोधगम्य
शैली प्रकट होती है। विषय चुनकर उस पर कथा रचने जैसे प्रयास उनकी कथाओं एवं शैली
में नहीं प्रतीत होते अर्थात उनके कथानक के विषय, लेखन हेतु चुने हुए कदापि नहीं
हैं अपितु किसी भी घटना, भाव अथवा व्यवहार को जिसने उन्हें कहीं प्रभावित किया
अथवा मानस को स्पर्श किया, उसे ही उन्होंने शाब्दिक अभिव्यक्ति के द्वारा रचना में
तब्दील कर दिया है।
संग्रह
की पहली लघुकथा “भक्ति का सैलाब” देश भक्ति से ओतप्रोत हर खासोआम हिंदुस्तानी
के जज्बे को सलाम करती है वहीं शहीद की पत्नी द्वारा अपने माथे की बिंदिया को भारत
मां के माथे को सजाने के लिए न्योछावर करने जैसे भाव दर्शाती लघुकथा “श्रंगार
रस” शहीद के बलिदान को और भी गौरवशाली बना देती है। शहीदों के सम्मान की एक और
लघुकथा है “महापुरुष”। शहीद के बलिदान पर उन्हें स्मरण करती हुई एक और
सुंदर लघुकथा है “पत्थर में हीरा”।तो वहीं देशभक्ति और देश प्रेम की एक अलग
ही छवि पेश करती है लघुकथा “सेवा का पैमाना”। लघुकथा “दीप का उजास”
शहीदों के प्रति आम जन के मन की श्रृद्धा को बखूबी दर्शाती है।
पर्यावरण
पर केंद्रित उनकी कथाएं “गेहूं की चिंता” एवं “कुर्बानी” हैं तो लघुकथा
“सार्थक सोच” जीवन में उत्कृष्ट आचरण को विषय बनाती है।
पुस्तक
में किंचित स्थानों पर भाषाई सौंदर्य संवृद्धि हेतु सामान्य प्रचलित शब्द से हट कर
उच्च कोटि के शब्दों का सुंदर प्रयोग हुआ है जिसने श्रेष्ट उन्नत प्रभाव उत्पन्न
किया है हालांकि उस से क्लिष्टता तनिक बढ़ गयी है।
भाई
बहन के रिश्ते को एक नई ऊंचाई देती है लघुकथा “प्यार का बंधन” और “धन
रक्षाबंधन”, वहीं पर्व की भावना की सही
व्याख्या प्रस्तुत करती है लघुकथा “रक्षाबंधन की महत्ता”।
संग्रह
में नारी विमर्श केंद्रित लघुकथाएं प्रभावी हैं एवं सोचने को विवश करती हैं। लघुकथा
“काम का विभाजन” भी ऐसी ही एक लघुकथा है जिसमें घर की बहु के प्रति काम के
बंटवारे का पक्षपात निंदनीय है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटी को आगे बढ़ाव जैसे
मूलमंत्र पर आधारित है लघुकथा “देवी शक्ति”, और नारी शक्ति का एक और रूप
मुखर होते हम देखते हैं लघुकथा “शक्ति” में। समाज में विधवा के संग जुड़े कुछ
रिवाज और कुरीतियों के विरुद्ध जागरण का संदेश देती है लघुकथा “पहला कदम”।
उनके
इस लघुकथा संग्रह की कथाएं हमारे दैनिक जीवन से बेतरह जुड़ी हुई हैं तथा हर उस विषय
पर लघुकथा संग्रह में कथा मिलती है जिस से हम हमारे दैनिक जीवन रूबरू होते हैं।
संग्रह में कोरोना महामारी से संबंधित कुछ लघुकथाओं का भी समावेश किया गया है, उनमें
दिल को छू जाती है लघुकथा “चश्मा”।
अपने विशेष अंदाज में कुछ अलग ही तरीके से अमीरी गरीबी की खाई को दिखलाती है लघुकथा “पॉश इलाका”। तो रिश्तों को एक नई परिभाषा दे जाती है लघुकथा “मुराद”। वहीं परस्पर संबंधों में ताजगी और जीवन में खुशियों का आसान नुस्खा बतलाती हैं लघुकथा “राज की बात”, और लघुकथा “अनुकरण”।
इंसानियत
और मानवता ऐसे संस्कार है जो यदि बचपन से बच्चों कों दिए जावे तो वे उन्हें एक
काबिल इंसान बनाने में सहायक होते हैं ऐसी ही एक लघुकथा है “मन्नू का मन”,
एक खास किन्तु ऐसा विषय जिस पर आम तौर पर कम ही चर्चा होती है वह है पुनर्विवाह।
पुनर्विवाह में पहले विवाह के बच्चे (विशेषकर महिला के बच्चे) के विषय में सोच को
दिशा देती हैं लघुकथा “पतझड़ वसंत”। लघुकथा “प्रभाव” दर्शाती है कि
बच्चे कैसे छोटी छोटी बातों से भी गहरे अर्थ निकल लेते हैं और उनके अनुमान कितने
सटीक एवं व्यापक होते हैं।
जीवन
में नैतिकता की आवश्यकता का सुंदर पाठ पढ़ाती है लघुकथा “शिक्षा और शिक्षक”,
वहीं मानवता का पाठ पढ़ती है लघुकथा “सांताक्लाज का सफर”। तो “वेदना”
एक लघुकथा न होकर मन का प्यार और दर्द दोनों दर्शाती है जहां एक माँ वृद्धाश्रम
में रहते हुए भी बेटे की इज्जत बचा कर चलती है। वहीं कर्त्तव्यपरायणता के संग
मानवीयता की अद्भुत मिसाल पेश करती लघुकथा है “कर्तव्य”।
नवरात्रों
का परव सम्पूर्ण देश में अत्यंत श्रद्धा एवं भव्यता से मनाया जाता है। उन्हीं
नवरात्रों में माता पूजन और कन्या भोज की महिला डॉक्टर द्वारा एक नई ही अनुकरणीय
व्याख्या प्रस्तुत करती है लघुकथा “कन्या पूजन”। और एक मां की नजरों में
बेटे की अहमियत किसी भी अमूल्य उपहार से बढ़ कर है यह दर्शाती है लघुकथा “पार्सल”।
हर
तरह का भेद भाव भूल मानवता दर्शाती लघुकथा “पेड़ और पक्षी” प्रभावित करती
है, वहीं संग्रह की अंतिम कथा “सुहाग की चूड़ी” एक शहीद की बेवा की
चूड़ियों के मार्फत शहीद को दिए गए सम्मान और बेवा को दिए गए सहयोग की अनुकरणीय
मिसाल प्रस्तुत करती है।
संग्रह
की कहानियाँ जीवन के विभिन्न पक्षों को उजागर करती हुई, अपनी संक्षिप्तता के
बावजूद पाठकों के माँ पर अपना गहरा, अमिट प्रभाव छोड़ने में पूर्णतः सफल हैं एवं
पुस्तक निश्चय ही पठनीय व संग्रहणीय है।




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