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Train To Pakistan By Khushwant Singh

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  Re aders  View : E_001 Book   TRAIN TO PAKISTAN BY: KHUSHWANT SINGH (02.02.1915 - 20.03.2014) Published By : Chatto & Windus (British Publisher) First Edition :1956   Price : 203                          “KHUSHWANT SINGH”, The great Author, renowned editor and reputed columnist, and very famous Novelist, needs no further introduction.                       Though, we have seen many films, web series and TV serials on this painful incident of partition for independence, but experience of reading this book is entirely different, every page of this book you turn, it will force you to think about that greed of few leaders. Whether they really didn’t aware of the consequences, or, all these so called leaders deliberately pre p...

kaisi Paheli Zindgani By Renu Gupta

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  कैसी पहेली ज़िंदगानी (कहानी संग्रह) विधा : कहानी द्वारा : रेणु गुप्ता बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 370.00 प्रथम संस्करण : 2025  समीक्षा क्रमांक : 200 “कैसी पहेली ज़िंदगानी” रेणु गुप्ता   की 21 कहानियों का बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह, जहां जीवन के अमूमन सभी क्षेत्रों से जुड़ी, बहुत हद तक वास्तविकता के करीब, जीवन के हर रंग को अपने में समेटते हुए कहानियां हैं, जहां हमारे करीबी जन, यथा आस पड़ोस का बेरोजगार युवक अथवा घरेलू कार्यों हेतु आने वाली सहायिका या फिर सब्जी वाला, ऑटो वाला या फिर मकान मालिक, कोई सहकर्मी अथवा परिवार का ही सदस्य जैसे जाने पहचाने लोग   ही किरदार हैं वहीं उनकी कहानियों के विषय हमारे रोजमर्रा जीवन से जुड़े हुए भरपूर विविधता लिए हुए हैं। आकार के हिसाब से एक दो को छोड़ दें तो कहानियां छोटी ही हैं , भाषा प्रभावित करती है, कहानियों के शीर्षक पर मेहनत की गई है जो की कथानक से जोड़ता है और कथानक अपनी गतिशीलता के चलते पाठक को सम्बद्ध रखने में सक्षम है। लेखिका की अधिकांश कहानियों नारी विमर्श केंद्रित हैं जहां उनकी नारी सजग मुखर...

Ek Zid Yah Bhi By Pragati Gupta

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    एक जिद यह भी ( कहानी संग्रह) विधा : कहानी द्वारा : प्रगति गुप्ता ग्रंथ अकादमी नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित मूल्य : 300 समीक्षा क्रमांक : 199 “स्टेपल्ड पर्चियाँ” , “कुछ यूं हुआ उस रात” जैसे संग्रहणीय कहानी संग्रह एवं उपन्यास “पूर्ण विराम से पहले” के द्वारा अपनी लेखन प्रतिभा का सशक्त परिचय प्रस्तुत कर चुकी “प्रगति गुप्ता” आधुनिक साहित्य जगत में खासा नाम अर्जित कर चुकी हैं , उनकी कहानियाँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में समय समय पर प्रकाशित होती हैं। पात्र की मनः स्थिति को समझते हुए   पात्रों की मनोवैज्ञानिक अवस्था का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है वह उनके लेखन को विशिष्टता प्रदान करता है।    प्रगति गुप्ता का लेखन मात्र किसी विषय पर एक कहानी न होकर   सम्पूर्ण विचारों का नवीन आंदोलन प्रवाह होता है। उनकी प्रत्येक कहानी कुछ नया कहा जाती है साथ ही एक नवीन विचार भी दे जाती है। चिकित्सकीय जगत से उनकी गहन समीपता उनकी कहानियों में बहुधा लक्षित होती है, कभी किसी गंभीर बीमारी पर केंद्रित अथवा कभी किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पर केंद्रित करते हुए वे व...

Head Ya Tale By Gita Pandit

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  हेड या टेल   विधा : उपन्यास द्वारा : गीता पंडित   बिंब प्रतिबिंब प्रकाशन   द्वारा प्रकाशित मूल्य : 300 समीक्षा   क्रमांक :   198 विदुषी लेखिका गीता   पंडित रचित   उपन्यास “हेड या टेल” नारी विमर्श , एवं मूल रूप से   दाम्पत्य संबंधों में तनाव   तथा बिखरते रिश्तों पर केंद्रित है किन्तु उस से भी अधिक महत्वपूर्ण वह विषय है जो इस तनाव के मूल में है जिस के विषय में आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। लेखिका गीता पण्डित लेखन, सम्पादन में जाना पहचान नाम हैं एवं किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं , फिर बात लेखन हो अथवा विविध साहित्यिक गतिविधियां। प्रस्तुत उपन्यास में कथानक से इतर भावनात्मक लेखन प्रभावित करता है। यथास्थान संदर्भ विशेष में विभिन्न प्रख्यात कवि , मशहूर शायरों के प्रासंगिक शेरो-शायरी, कवित्त के यथोचित अंश, कोट्स रूप में प्रस्तुत किये गए हैं उनका कथानक के संग सुंदर तालमेल किया गया है जो पाठन में रोचकता एवं कहन को सौंदर्य प्रदान करते हैं। पात्र संख्या अत्यंत सीमित है मात्र दो-तीन पात्रों को लेकर एक भावनात्मकता से परिपूर्ण उपन्...

Chup Bhi Ek Bhasha Hai By Suresh Singh

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चुप भी एक भाषा है  विधा : काव्य  द्वारा : सुरेश सिंह  New World Publication द्वारा प्रकाशित  मूल्य : 250 समीक्षा क्रमांक : 197  वरिष्ठ कवि सुरेश सिंह अपने पूर्व प्रकाशित कविता संग्रहों भव्य: मकड़जालम, आज फिर धूप मैली है और पृथ्वी फैलाती है पंख के द्वारा अपनी विशिष्ट लेखन शैली से एवं बहुधा अपनी जमीनी जुड़ाव वाली कविताओं के द्वारा वे पाठक वर्ग के बीच अपना विशेष स्थान बना चुके हैं उनकी कविताएं विशेष तौर पर जीवन. प्रकृति, राजनैतिक व्यवस्था से असंतोष  एवं वैश्विक अशांति पर केंद्रित देखी गई हैं।    प्रस्तुत कविता संग्रहों "चुप भी एक भाषा है" के द्वारा उन्होंने अपने तकरीबन १००विचारों को पाठकों  से काव्य रूप में साझा किया है,  एक बात विशेष तौर पर कहीं जा सकती है उनके बारे में कि,  कही भी, उनकी कविता किसी बंधन में नहीं है न भाव के न समाज अथवा राजव्यवस्था के, वे स्वतंत्र लेखन करते है उनके भाव पूर्णतः आजादी के साथ हमारे सामने आते हैं एवं उन्हें पढ़ कर यह स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने मात्र अपने भावों को शब्द दे दिए है बिना किसी अतिरिक्त प्रयास...

KORA KAGAZ BY GAJARA KOTHARI AND NIRMAL CHAWLA

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 “कोरा  कागज” विधा : उपन्यास  द्वारा : गजरा  कोटारी एवं निर्मल चावला  प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित  प्रथम संस्करण : वर्ष 2013  मूल्य : 175  समीक्षा / पाठकीय प्रतिक्रिया क्रमांक : 196 उपन्यास “कोरा कागज़” गजरा कोटारी एवं निर्मल चावला द्वारा लिखा गया जो 2013 में प्रकाशित हुआ किन्तु एक लम्बे अरसे पश्चात  इस  पुस्तक का समीक्षार्थ चयन सिर्फ इस लिए किया गया चूंकि, गजरा कोटारी के नाम  “बालिका वधू” जो की एक समय का मशहूर  TV धारावाहिक  था उसके 2175 एपिसोड्स लिखने का रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में  दर्ज है, और बस यही कारण  रहा कि एक अच्छे उपन्यास कि आस ही मुझे इसको खरीदने को बाध्य कर गयी ।  यूं तो आमतौर पर मैं किसी भी  पुस्तक पर कम से कम ऋणात्मक टिप्पणी करने का प्रयास करता हूँ,  एवं  सामान्य गलतियों को नज़रंदाज़ ही करता हूँ किन्तु यह लिखते हुए  मुझे कतई  अफसोस  नही हो रहा की पुस्तक ने अपनी अनेकोंनेक कमियों के चलते पूर्णतः निराश किया है तथा गलतियों का स्तर सामान्य से कहीं ऊपर हो जाने ...

BANARAS TALKIES BY SATYA VYAS

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 “बनारस टॉकीज”  विधा : उपन्यास  द्वारा : सत्य व्यास हिंद युग्म द्वारा प्रकाशित  प्रथम संस्करण : जनवरी 2015 प्रस्तुत संस्करण : 16 वाँ 2021 मूल्य : 199.00 समीक्षा क्रमांक : 195   सत्य व्यास द्वारा लिखित एवं 2015  में प्रकाशित उपन्यास “बनारस टॉकीज” कई मायनों में विशिष्ठहै  । जहां एक ओर इसकी भाषा शैली कुछ अलग हट कर है, वहीं कथानक का सरल सहज प्रवाह इसे रोचकता एवं लोकप्रियता प्रदान करता है। (6 वर्ष में 16 संस्करण प्रकाशित हो जाना स्वयं ही प्रमाण है )   पाठक इस पुस्तक के पात्रों के संग अपने कॉलेज जीवन के पल फिर से जी लेते हैं ।  शैली विशिष्ट है जो क्षेत्र विशेष की रग में रच बस जाने को बेताब करती है वहीं भाषा वही सीधी सरल बिना किसी विशिष्ट शब्दावली के , जो इस उम्र में आम बनारस का छात्र स्तेमाल करता है और सच कहा जाए तो यह विशिष्ट भाषा शैली ही  पाठक को स्वयं में समाहित करती है  छात्र जीवन की दैनिक गतिविधियां, चुहलबाजियां और मस्ती  है जो सामान्य किंतु अपनी प्रस्तुति से उन्हें विशिष्ट बनाती हैं । छात्रों के बीच सामान्य वार्तालाप ही हो...