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Hajir Hon By Anil Maheshwari

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  .. हाजिर हों  , द्वारा :अनिल माहेश्वरी   सेतु प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 299.00 समीक्षा क्रमांक :   202   अनिल माहेश्वरी द्वारा रचित “.... हाजिर हों” एक पूर्णतः भिन्न एवं   अभिनव सोच को दर्शाता कथानक है। यूं तो पौराणिक ग्रंथों पर आलोचनाएं एवं उनके घटना क्रम तथा पात्रों पर क्रिटिक्स द्वारा अपने अपने नजरिए प्रस्तुत किए गए हैं किन्तु अनिल जी के कथानक में भिन्नता है। पुस्तक मूल रूप से जहां एक ओर पात्रों के तत्कालीन   कृत्य एवं आचरण के आधार पर उनको वर्तमान विधि के मुताबिक आंकलन करती है वहीं पाठक को भी एक नई सोच एवं स्वयं की नवीन विचारण शैली जागृत करने का अवसर देती है। यूं तो पौराणिक पात्रों के विषय में भिन्न भिन्न नज़रिए पूर्व में भी पढ़ने में आते रहे हैं जहां पात्रों के क्रिया कलापों को तार्किकता के मापदंडों पर परखा जाकर उन्हें उस काल के हिसाब से उचित अथवा अनुचित सिद्ध किया गया किन्तु प्रस्तुत पुस्तक पौराणिक पात्रों को,   वर्तमान विधि के अंतर्गत दोषी कौन, यह ढूंढने का सफल   प्रयास करती है। पुस्तक की विशेषता यही है कि आम वाद व...

Metamorphosis By Franz Kafka

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  METAMORPHOSIS BY : Farnz Kafka First published in : 1915 Book Re ader’s View : E _ 002 Metamorphosis was first published in 1915 written by “Franz Kafka” , who was a German-language Jewish Czech writer and novelist. His best-known works include the novels The Metamorphosis , The Trial and The Castle . The Metamorphosis was first published more than century ago and still we are reading it,   that itself proves that the book has something special in it and signifies the quality of the plot, writing skills and writer’s command over the thoughts too .   Before   we proceed further and start discussing about the book, it’s very much important to understand the title of the novel i.e. “Metamorphosis”. What is it. Metamorphosis is a medical situation and defined as complete fundamental change in the body where someone’s character, behavior and appearance changes which involves changes in body structure, and behavior, In its simplest form can be described as...

Gandharnandini By Nilima Gupta

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  गांधारनन्दिनी विधा : पौराणिक कथा        द्वारा : नीलिमा गुप्ता दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 400.00 समीक्षा क्रमांक : 201 अपने पूर्व प्रकाशित तीन पौराणिक उपन्यासों “मैं   हूँ सीता”, “मैं कृष्ण सखी”   और “मैं बाबा का कान्हा”, के समान ही एक बार पुनः नीलिमा जी ने महाभारत की एक प्रमुख स्त्री पात्र , “ गांधारी ” को अपनी पारखी नज़रों एवं अपने तार्किक विश्लेषण की कसौटी पर परखा है और पौराणिकता के स्थापित माप-दंडों   की तराजू पर तौला है। लेखिका द्वारा इन पौराणिक कथाओं के प्रमुख पात्रों को अपनी तार्किक दृष्टि से एक अलग ही नजरिए से देखा गया है। उनके द्वारा इन पौराणिक पात्रों के संग घटित घटनाओं एवं तत्कालीन परिवेश में अन्य समायोजनों को भी उन्होंने एक अलग ही नजरिए से देखा परखा    है जो पूर्णतः तार्किक होते हुए उन मान्यताओं से अलहदा विमर्श हेतु बाध्य करता है जो अनंत काल से विद्यमान रही है। प्रस्तुत विश्लेषणात्मक उपन्यास में गांधारी के द्वारा ताजीवन आँखों पर पट्टी बांध कर रहने के संकल्प को उन्होंने जिस नजर से देखा है वह सर्वथा...

Train To Pakistan By Khushwant Singh

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  Re aders  View : E_001 Book   TRAIN TO PAKISTAN BY: KHUSHWANT SINGH (02.02.1915 - 20.03.2014) Published By : Chatto & Windus (British Publisher) First Edition :1956   Price : 203                          “KHUSHWANT SINGH”, The great Author, renowned editor and reputed columnist, and very famous Novelist, needs no further introduction.                       Though, we have seen many films, web series and TV serials on this painful incident of partition for independence, but experience of reading this book is entirely different, every page of this book you turn, it will force you to think about that greed of few leaders. Whether they really didn’t aware of the consequences, or, all these so called leaders deliberately pre p...

kaisi Paheli Zindgani By Renu Gupta

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  कैसी पहेली ज़िंदगानी (कहानी संग्रह) विधा : कहानी द्वारा : रेणु गुप्ता बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मूल्य : 370.00 प्रथम संस्करण : 2025  समीक्षा क्रमांक : 200 “कैसी पहेली ज़िंदगानी” रेणु गुप्ता   की 21 कहानियों का बोधरस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह, जहां जीवन के अमूमन सभी क्षेत्रों से जुड़ी, बहुत हद तक वास्तविकता के करीब, जीवन के हर रंग को अपने में समेटते हुए कहानियां हैं, जहां हमारे करीबी जन, यथा आस पड़ोस का बेरोजगार युवक अथवा घरेलू कार्यों हेतु आने वाली सहायिका या फिर सब्जी वाला, ऑटो वाला या फिर मकान मालिक, कोई सहकर्मी अथवा परिवार का ही सदस्य जैसे जाने पहचाने लोग   ही किरदार हैं वहीं उनकी कहानियों के विषय हमारे रोजमर्रा जीवन से जुड़े हुए भरपूर विविधता लिए हुए हैं। आकार के हिसाब से एक दो को छोड़ दें तो कहानियां छोटी ही हैं , भाषा प्रभावित करती है, कहानियों के शीर्षक पर मेहनत की गई है जो की कथानक से जोड़ता है और कथानक अपनी गतिशीलता के चलते पाठक को सम्बद्ध रखने में सक्षम है। लेखिका की अधिकांश कहानियों नारी विमर्श केंद्रित हैं जहां उनकी नारी सजग मुखर...

Ek Zid Yah Bhi By Pragati Gupta

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    एक जिद यह भी ( कहानी संग्रह) विधा : कहानी द्वारा : प्रगति गुप्ता ग्रंथ अकादमी नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित मूल्य : 300 समीक्षा क्रमांक : 199 “स्टेपल्ड पर्चियाँ” , “कुछ यूं हुआ उस रात” जैसे संग्रहणीय कहानी संग्रह एवं उपन्यास “पूर्ण विराम से पहले” के द्वारा अपनी लेखन प्रतिभा का सशक्त परिचय प्रस्तुत कर चुकी “प्रगति गुप्ता” आधुनिक साहित्य जगत में खासा नाम अर्जित कर चुकी हैं , उनकी कहानियाँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में समय समय पर प्रकाशित होती हैं। पात्र की मनः स्थिति को समझते हुए   पात्रों की मनोवैज्ञानिक अवस्था का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है वह उनके लेखन को विशिष्टता प्रदान करता है।    प्रगति गुप्ता का लेखन मात्र किसी विषय पर एक कहानी न होकर   सम्पूर्ण विचारों का नवीन आंदोलन प्रवाह होता है। उनकी प्रत्येक कहानी कुछ नया कहा जाती है साथ ही एक नवीन विचार भी दे जाती है। चिकित्सकीय जगत से उनकी गहन समीपता उनकी कहानियों में बहुधा लक्षित होती है, कभी किसी गंभीर बीमारी पर केंद्रित अथवा कभी किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पर केंद्रित करते हुए वे व...